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Kamran khan lost in the darkness of anoynymous: आज़मगढ़ के एक साधारण मजदूर के बेटे कामरान खान की कहानी किसी चमत्कार से कम नहीं थी. शेन वॉर्न ने उनकी 140 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार देख उन्हें ‘टॉरनेडो’ नाम दिया और आईपीएल इतिहास का पहला सुपर ओवर फेंकने की जिम्मेदारी सौंपी. लेकिन चकिंग के आरोप और चोटों ने इस उभरते सितारे की चमक फीकी कर दी. जिस गेंदबाज को भारतीय क्रिकेट का भविष्य माना जा रहा था, वह वक्त के साथ गुमनामी के अंधेरे में खो गया.
कामरान खान जांच के लिए ऑस्ट्रेलिया गए थे.
नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कई ऐसी कहानियां हैं जो सुनहरे अक्षरों में लिखी गईं. लेकिन कुछ कहानियां ऐसी भी हैं जो किसी टूटते तारे की तरह आईं और पलक झपकते ही अंधेरे में ओझल हो गईं. यह कहानी है उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के एक लड़के की, जिसे दुनिया ने ‘टॉरनेडो’ (बवंडर) कहा. जिसे महान शेन वॉर्न ने अपना ‘मैजिकल वेपन’ माना था. आज जब आईपीएल की चकाचौंध सातवें आसमान पर है, तब उस तूफानी गेंदबाज कामरान खान का नाम शायद ही किसी की यादों में बचा हो.
कामरान खान (Kamran Khan) की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं थी.साल 2009 में जब आईपीएल का कारवां दक्षिण अफ्रीका कूच कर चुका था. राजस्थान रॉयल्स के कोचिंग डायरेक्टर डेरेन बैरी मुंबई के मैदानों पर एक ऐसे टैलेंट की तलाश में थे जो दुनिया को चौंका सके. उनकी नजर एक दुबले-पतले लड़के पर पड़ी जो टेनिस बॉल से बिजली की रफ्तार जैसी गेंदें फेंक रहा था. वह लड़का कामरान था, जिसके पिता मजदूर थे और मजदूरी से जो पैसा मिलता था उससे वह परिवार का पेट पालते थे. कामरान के पास न कोई फर्स्ट क्लास अनुभव था, न ही किसी बड़ी क्रिकेट एकेडमी की ट्रेनिंग. उनके पास थी तो बस कुदरती रफ्तार. जब राजस्थान रॉयल्स के वॉर्मअप मैच में कामरान ने जस्टिन ओंटोंग को एक सटीक और घातक यॉर्कर मारी, तो स्लिप में खड़े महान स्पिनर शेन वॉर्न दंग रह गए. वॉर्न ने उसी वक्त ऐलान कर दिया था कि यह लड़का साधारण नहीं है, यह तो टॉरनेडो है.
कामरान खान जांच के लिए ऑस्ट्रेलिया गए थे.
वो पहला सुपर ओवर और शोहरत की बुलंदी
अप्रैल 2009 का वह दौर कामरान के लिए किसी सपने जैसा था. 140 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक की रफ्तार और मलिंगा जैसा थोड़ा ‘स्लिंगी’ एक्शन. आईपीएल इतिहास का पहला सुपर ओवर फेंकने की जिम्मेदारी जब वॉर्न ने इस 19 साल के अनछुए टैलेंट को दी, तो पूरी दुनिया की सांसें थम गईं. सामने कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) जैसी दिग्गज टीम थी, लेकिन कामरान ने उस दबाव को ऐसे झेला जैसे वह सालों से खेल रहे हों. उन्होंने राजस्थान को जीत दिलाई और रातों-रात भारतीय क्रिकेट का अगला ‘भविष्य’ बन गए. क्रिस गेल और ब्रेंडन मैकुलम जैसे खूंखार बल्लेबाजों को आउट करना कामरान के लिए बाएं हाथ का खेल लगने लगा था.
एक आरोप और करियर पर लगा ‘ब्रेक’
कहते हैं कि शोहरत जितनी जल्दी आती है, चुनौतियां भी उतनी ही तेजी से पीछा करती हैं. साल 2010 में कामरान के गेंदबाजी एक्शन पर ‘चकिंग’ (गेंद फेंकने का गलत तरीका) का आरोप लगा. यह किसी भी तेज गेंदबाज के लिए मौत की सजा जैसा था. बीसीसीआई ने उन्हें जांच के लिए ऑस्ट्रेलिया भेजा. वहां बायोमैकेनिक्स परीक्षणों में उनके एक्शन को हरी झंडी तो मिल गई, लेकिन जो मानसिक आत्मविश्वास और शारीरिक लय टूट चुकी थी, वह कभी वापस नहीं आई. ऑस्ट्रेलिया से लौटने के बाद कामरान वह ‘टॉरनेडो’ नहीं रहे. उनकी रफ्तार कम हो गई थी और वह धार कुंद पड़ चुकी थी जिसने शेन वॉर्न को अपना मुरीद बनाया था. साल 2011 में वह पुणे वॉरियर्स के साथ जुड़े, लेकिन वहां उन्हें केवल एक मैच खेलने का मौका मिला.
सपनों का ढहना और गुमनामी का अंधेरा
विडंबना देखिए, जिस खिलाड़ी ने आईपीएल में धूम मचाने के बाद अपना करियर शुरू किया, उसने अपना फर्स्ट क्लास डेब्यू मार्च 2013 में किया.अपने आखिरी टी20 मैच के दो साल बाद. 9 आईपीएल मैचों में 9 विकेट और 11 टी20 मैचों में 11 विकेट के आंकड़े यह बताने के लिए काफी नहीं हैं कि इस लड़के में कितनी क्षमता थी. आज कामरान खान कहां हैं? कभी वह अपने गांव में खेती करते पाए गए, तो कभी फिर से उसी टेनिस बॉल क्रिकेट की गलियों में लौट गए जहां से शुरू हुए थे. जिस खिलाड़ी को भारतीय गेंदबाजी का भविष्य कहा गया, वह अचानक चयनकर्ताओं की नजरों से ही नहीं, बल्कि फैंस की यादों से भी ओझल हो गया.
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करीब 15 साल से पत्रकारिता में सक्रिय. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई. खेलों में खासकर क्रिकेट, बैडमिंटन, बॉक्सिंग और कुश्ती में दिलचस्पी. IPL, कॉमनवेल्थ गेम्स और प्रो रेसलिंग लीग इवेंट्स कवर किए हैं. फरवरी 2022 से…और पढ़ें


