4.4 C
Munich

काशी के इस मंदिर में फूल माला नहीं चढ़ाएं ताला, जेल से मिलेगी मुक्ति, त्रेतायुग से जुड़ी है दिलचस्प कहानी

Must read


Last Updated:

Varanasi Bandi Devi Temple: मंदिर के प्रधान पुजारी सुधाकर दुबे ने बताया कि बंदी देवी पाताल लोक की देवी है. त्रेतायुग में भगवान राम को जब अहिरावण ने बंधक बनाया था, उस समय प्रभु श्री राम ने बंदी देवी का ध्यान करके उनके इस बंधन से मुक्ति की कामना की थी. जिसके बाद प्रभु श्रीराम अहिरावण के कैद से मुक्त हुए.ऐसी मान्यता है कि बंदी देवी के दरबार में ‘ताला’ चढ़ाने से झूठे मुकदमे में कारावास या जेल में रह रहे लोगो को इससे मुक्ति मिलती है

ख़बरें फटाफट

वराणसीः बनारस कई खास चींजों के लिए जाना जाता है. इस शहर में घाट और गलियों के अलावा कई प्राचीन मंदिर भी है. इन्ही में से एक है ‘बंदी देवी’ जहां माला फूल नहीं बल्कि भक्त ताला चढ़ाने आते है.इसके पीछे की कहानी भी दिलचस्प है.दशाश्वमेध घाट के करीब ही बंदी देवी का प्राचीन मंदिर है.इस मंदिर में हर तरफ ताले लटकें  दिख जाएंगे. ऐसी मान्यता है कि बंदी देवी के दरबार में ‘ताला’ चढ़ाने से झूठे मुकदमे में कारावास या जेल में रह रहे लोगो को इससे मुक्ति मिलती है.इसके साथ ही हर बंधन से भी बंदी देवी मुक्ति दिलाती है.पूरे दुनिया में सिर्फ और सिर्फ काशी में ही बंदी देवी का इकलौता मंदिर है.

स्कन्दपुराण के काशी खण्ड में है उल्लेख

मंदिर के प्रधान पुजारी सुधाकर दुबे ने बताया कि बंदी देवी पाताल लोक की देवी है.त्रेतायुग में भगवान राम को जब अहिरावण ने बंधक बनाया था.उस समय प्रभु श्री राम ने बंदी देवी का ध्यान करके उनके इस बंधन से मुक्ति की कामना की थी.जिसके बाद प्रभु श्रीराम अहिरावण के कैद से मुक्त हुए.

उस समय ही भगवान शिव ने उन्हें अपने प्रिय शहर काशी में संकट मोचन हनुमान के साथ विराजमान होने की बात कही थी.बस तभी बंदी देवी काशी में गंगा किनारे दशाश्वमेघ तीर्थ पर अपना स्थान तय किया.पंडित सुधाकर दुबे ने बताया कि यहां देवी स्वयम्भू रूप में विराजमान है.स्कंदपुराण के काशी खण्ड में इसका उल्लेख है.

41 दिन लगातार दर्शन का विधान

सुधाकर पांडेय ने बताया कि बंदी देवी के दर्शन से कोर्ट कचहरी के मामलों से मुक्ति मिल जाती है.इसके साथ ही बंद किस्मत के दरवाजे भी खुल जातें है.इसके लिए भक्त अपने मनोकामना की पूर्ति के लिए यहां आतें है और मंदिर के दरवाजे पर ताला लगाते है.उसके बाद लगातार यहां 41 दिन तक दर्शन करना चाहिए. फिर जब मनोकामना की सिद्धि के बाद भक्त यहां आते है तो अपने बंद ताले को खोलकर उसे मां गंगा में प्रवाहित करते है इसके बाद वो बंदी देवी का श्रृंगार कराते है.

About the Author

Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें



Source link

- Advertisement -spot_img

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img

Latest article