15.1 C
Munich

क्या होता है प्लेऑफ? कितने मुकाबले खेले जाते हैं, टॉप-2 में रहने का क्या है फायदा और नुकसान, जानिए पूरा समीकरण और इतिहास

Must read


होमखेलक्रिकेट

आईपीएल में क्या होता है प्लेऑफ? कितने मुकाबले खेले जाते हैं, जानिए पूरा गणित

Last Updated:

IPL 2026 Playoffs: आईपीएल 2026 में 26 मई से प्लेऑफ का रोमांच शुरू होने जा रहा है, जहां ग्रुप स्टेज की टॉप-4 टीमें खिताब के लिए भिड़ेंगी. प्लेऑफ क्या है. इस नियम में पॉइंट्स टेबल की टॉप-2 टीमों को फाइनल में पहुंचने के दो मौके मिलते हैं, जबकि नंबर 3 और 4 की टीमों के लिए राह बेहद मुश्किल होती है.जानिए प्लेऑफ का पूरा समीकरण, इतिहास और इसके फायदे-नुकसान.

Zoom

आईपीएल प्लेऑफ की शुरुआत 26 मई से होगी.

नई दिल्ली. आईपीएल 2026 में इस वक्त प्लेऑफ का रोमांच सिर चढ़कर बोल रहा है. मंगलवार (26 मई) से इस सीजन के नॉकआउट मुकाबलों का बिगुल बजने जा रहा है. ग्रुप स्टेज की लंबी और थका देने वाली जंग के बाद आखिरकार वे 4 टीमें सामने आ चुकी हैं, जो खिताब की असली दावेदार हैं. कमेंट्री बॉक्स से लेकर सोशल मीडिया के गलियारों तक, हर तरफ सिर्फ ‘प्लेऑफ’ की गूंज है. प्लेऑफ की यह पहेली क्या है, इसकी शुरुआत कब हुई और यह कैसे सेमीफाइनल से पूरी तरह अलग और ज्यादा रोमांचक है.

आम तौर पर आईसीसी (ICC) के वर्ल्ड कप या अन्य बड़े टूर्नामेंट्स में ग्रुप स्टेज के बाद सेमीफाइनल का नियम होता है. सेमीफाइनल में नंबर-1 टीम नंबर-4 से और नंबर-2 टीम नंबर-3 से भिड़ती है. वहां नियम सीधा और क्रूर होता है ‘करो या मरो’. यानी एक खराब दिन, एक खराब ओवर और ग्रुप स्टेज की आपकी सारी मेहनत पर पानी फिर जाता है. प्लेऑफ इसी ‘अन्याय’ को खत्म करने और ग्रुप स्टेज में टॉप पर रहने वाली टीमों को उनके शानदार प्रदर्शन का इनाम देने के लिए बनाया गया है. प्लेऑफ के तहत कुल 4 मैच खेले जाते हैं. जिनमें क्वालीफायर 1, एलिमिनेटर , क्वालीफायर 2 और फाइनल. सेमीफाइनल में हारने वाली टीम सीधे घर जाती है, जबकि प्लेऑफ में टॉप-2 में रहने वाली टीमों को फाइनल में पहुंचने के दो मौके मिलते हैं. यही नियम प्लेऑफ को सबसे अनोखा और निष्पक्ष बनाता है.

आईपीएल प्लेऑफ की शुरुआत 26 मई से होगी.

समझिए प्लेऑफ का पूरा समीकरण: किसे क्या फायदा?
प्लेऑफ का पूरा गणित पॉइंट्स टेबल की रैंकिंग पर टिका होता है. इसमें टॉप-2 में फिनिश करने वाली टीमों को ‘लॉटरी’ लगती है, जबकि तीसरे और चौथे नंबर की टीमों की राह कांटों भरी होती है. पॉइंट्स टेबल पर पहले और दूसरे स्थान पर रहने वाली टीमें क्वालीफायर-1 में आमने-सामने होती हैं. जीतने वाली टीम सीधे फाइनल का टिकट कटा लेती है. हारने वाली टीम टूर्नामेंट से बाहर नहीं होती. उसे अपनी गलती सुधारने का एक और मौका मिलता है और वह क्वालीफायर-2 में खेलने पहुंच जाती है.

आरसीबी वर्सेस जीटी के बीच खेला जाएगा आईपीएल का पहला क्वालीफायर.

एलिमिनेटर क्या है ?
पॉइंट्स टेबल पर नंबर-3 और नंबर-4 पर रहने वाली टीमों के बीच एलिमिनेटर मैच होता है. नाम के मुताबिक ही, इस मैच का नियम बहुत सख्त है. हारने वाली टीम का सफर यहीं खत्म हो जाता है और वह टूर्नामेंट से बाहर हो जाती है. जीतने वाली टीम अभी फाइनल में नहीं पहुंचती, बल्कि उसे क्वालीफायर-2 का टिकट मिलता है. क्वालीफायर-2 फाइनल का आखिरी दरवाजा होता है. यह मैच एलिमिनेटर की विजेता टीम और क्वालीफायर-1 में हारने वाली टीम के बीच खेला जाता है. इस मैच को जीतने वाली टीम फाइनल में क्वालीफायर-1 की विजेता से भिड़ती है, जबकि हारने वाली टीम का बोरिया-बिस्तर बंध जाता है.

टॉप-2 में रहने का फायदा और नुकसान
इस फॉर्मेट को ध्यान से देखें तो साफ है कि आईपीएल में सिर्फ टॉप-4 में जगह बनाना काफी नहीं है, बल्कि टॉप-2 में फिनिश करना सबसे अहम है. नंबर 1 और नंबर 2 पर रहने का फायदा जान लेते हैं. ग्रुप स्टेज के 14 मैचों में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने का इनाम यह मिलता है कि फाइनल में जाने के लिए आपके पास दो चांस होते हैं. अगर क्वालीफायर-1 में एक बुरा दिन रहा, तब भी खिताब जीतने की उम्मीदें जिंदा रहती हैं. नंबर तीन और चार पर रहने वाली टीमों को नुकसान कैसे होता है. अब इसको समझते हैं. इन टीमों के लिए प्लेऑफ का रास्ता किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होता. इन्हें फाइनल जीतने के लिए लगातार 3 मैच जीतने होते हैं. एक भी हार और ट्रॉफी जीतने का सपना चकनाचूर हो जाता है.

सेमीफाइनल से प्लेऑफ का सफर
आईपीएल की शुरुआत साल 2008 में हुई थी. शुरुआती तीन सीजन (2008, 2009 और 2010) तक आईपीएल में भी पुराना और पारंपरिक सेमीफाइनल फॉर्मेट ही लागू था. लेकिन तब एक कमी महसूस की गई. ग्रुप स्टेज में 14 में से 11 या 12 मैच जीतकर टॉप पर रहने वाली टीम अगर सेमीफाइनल के एक बुरे दिन की वजह से बाहर हो जाए, तो यह उसके साथ नाइंसाफी थी. इसी को ध्यान में रखते हुए, साल 2011 में आईपीएल में पहली बार प्लेऑफ फॉर्मेट को पेश किया गया. इसके बाद से यह फॉर्मेट इतना हिट और रोमांचक साबित हुआ कि फैंस के साथ-साथ क्रिकेट एक्सपर्ट्स ने भी इसकी जमकर तारीफ की. आज दुनिया भर की तमाम क्रिकेट लीग (जैसे पीएसएल, बिग बैश, डब्ल्यूपीएल) इसी प्लेऑफ मॉडल को अपनाती हैं.

About the Author

authorimg

Kamlesh Raiचीफ सब एडिटर

कमलेश राय वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर कार्यरत हैं. 17 वर्षों से अधिक के अपने सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में उन्होंने डिजिटल मीडिया की बारीकियों और खबरों की गहरी समझ के साथ एक विशिष्ट पहचान बनाई ह…और पढ़ें



Source link

- Advertisement -spot_img

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img

Latest article