नई दिल्ली: क्रिकेट को हमेशा से एक जेंटलमैन खेल कहा जा रहा है, लेकिन समय के साथ-साथ इस खेल की छवि को दागदार करने वाले कुछ खिलाड़ी भी हुए जिनकी वजह से जेंटलमैन के तमगे पर सवालिया निशान भी उठे हैं. खास तौर से पाकिस्तान क्रिकेट का इसमें बहुत बड़ा योगदान रहा है. पाकिस्तान हमेशा से वर्ल्ड क्रिकेट की एक मजबूत टीम मानी जाती रही है. यहां से कुछ बेहतरीन और महान खिलाड़ी भी निकले हैं, लेकिन इसी पाकिस्तान में कुछ ऐसे बेईमान खिलाड़ी भी हुए, जिन्होंने चंद पैसों के लिए न सिर्फ अपना इमान बेचा बल्कि उन्होंने क्रिकेट की आत्म के साथ खिलवाड़ किया.
ऐसा ही एक खिलाड़ी और टीम के पूर्व कप्तान सलमान बट हैं. पूर्व पाकिस्तानी कप्तान सलमान बट ने इस जेंटलमैन गेम वाली छवि को हमेशा के लिए दागदार कर दिया. क्योंकि साल 2010 का लॉर्ड्स टेस्ट और सलमान बट का नाम आज भी फिक्सिंग के पर्याय के रूप में याद किया जाता है. सिर्फ सलमान बट ही नहीं, इस फिक्सिंग कांड में पाकिस्तान के दो और खिलाड़ियों का भी करियर बर्बाद हो गया.
कहां से शुरू हुआ फिक्सिंग का काला कांड
इस पूरी साजिश के पीछे मुख्य सूत्रधार मजहर मजीद था जो एक सट्टेबाज और एजेंट के रूप में काम करता था. सलमान बट न केवल टीम के कप्तान थे बल्कि मजीद के साथ उनकी गहरी सांठगांठ थी. बट ने अपनी कप्तानी का दुरुपयोग करते हुए टीम के दो युवा और प्रतिभाशाली तेज गेंदबाजों मोहम्मद आमिर और मोहम्मद आसिफ को भी इस दलदल में घसीट लिया. मोहम्मद आमिर तो उस समय सिर्फ 18 साल के थे और दुनिया के उभरते हुए सितारे थे, जिन्हें सलमान बट ने बहला-फुसलाकर इस फिक्सिंग कांड का चेहरा बना दिया.
क्या था मैच फिक्सिंग का तरीका
बता दें कि लॉर्ड्स में जो घटना हुई थी वह मैच फिक्सिंग का मामला नहीं था, बल्कि ये पूरी तरह से स्पॉट फिक्सिंग कांड था. दरअसल इसमें पूरे मैच का परिणाम नहीं बदला जाता है, बल्कि मैच के छोटे-छोटे हिस्सों जैसे की कोई ओवर या सेशन को फिक्स किया जता था. इस में अगर सट्टेबाज ने किसी ओवर में नो बॉल की मांग की तो गेंदबाज को नो बॉल फेंकनी पड़ती है. वहीं अगर कोई बल्लेबाज स्पॉट फिक्सिंग में है तो किसी सेशन के रन को लेकर मोलभाव करता और उस सट्टा लगता.
कैसे हुआ था लॉर्ड्स में फिक्सिंग
लॉर्ड्स टेस्ट में हुए फिक्सिंग कांड में ये तय किया गया था कि मोहम्मद आसिफ और आमिर तय किए गए ओवर में नो बॉल डालेंगे. चुकी ये सब पहले तय था कि कब नो बॉल डालेंगे. ऐसे में बुकी को पहले से पता था कि क्या होने वाला है. इसमें कप्तान सलमान बट की भूमिका सबसे ज्यादा थी. क्योंकि सलमान बट ही ये तय करते कि आसिफ और आमिर को कब नो बॉल डालनी है. सबकुछ प्लान के मुताबिक हुआ, लेकिन मजहर मजीद, सलमान बट, आसिफ और आमिर को नहीं पता था कि ये सब एक ट्रैप है.
दरअसल हुआ ये था कि ब्रिटिश अखबार ‘न्यूज ऑफ द वर्ल्ड’ के एक अंडरकवर रिपोर्टर मजीद अहमद ने एक फर्जी बिजनेसमैन बनकर मजहर मजीद से मुलाकात की. मजीद ने पैसे के बदले पहले ही बता दिया कि किस समय नो-बॉल फेंकी जाएगी. जब मैच के दौरान ठीक उसी समय आमिर और आसिफ ने जानबूझकर क्रीज से बहुत आगे निकलकर बड़ी नो-बॉल फेंकी, तो पूरी दुनिया स्तब्ध रह गई.
मजीद अहमद ने किया पूरे कांड का पर्दफाश
चुकी मजीद अहमद कोई बुकी नहीं थे, ऐसे में उन्होंने इस पूरे घटना का पर्दाफाश कर दिया. इसके बाद स्कॉटलैंड यार्ड की जांच और आईसीसी की ट्रिब्यूनल के सामने सच्चाई सामने आई. सलमान बट को इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड माना गया. जांच में पाया गया कि बट ने न केवल खुद भ्रष्टाचार किया, बल्कि अपने जूनियर खिलाड़ियों को भी इसके लिए मजबूर किया.
इस पूरे मामले में तीनों पाकिस्तानी खिलाड़ियों को सजा मिली. सलमान बट को 10 साल का बैन और 30 महीने की जेल की हुई. हालांकि, बाद में उनके बैन को 5 साल कर दिया गया. इसके अलावा मोहम्मद आसिफ पर 7 साल का बैन लगा और 1 साल की सजा हुई. वहीं मोहम्मद आमिर पर 5 साल का बैन और 6 महीने की सजा हुई. इस पूरी घटना में पाकिस्तान क्रिकेट की पूरी दुनिया में बेइज्जती हुई और देश का क्रिकेट कई साल पीछे चला गया.


