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Miracle Hanuman Mandir Gonda: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के रुदापुर गांव में एक ऐसा प्राचीन हनुमान मंदिर है, जिसके बारे में दावा किया जाता है कि वहां पहुंचने मात्र से ही मानसिक कष्ट और नकारात्मक शक्तियां खत्म हो जाती हैं. करीब 250 साल पुराने इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां बजरंगबली की प्रतिमा किसी इंसान ने स्थापित नहीं की, बल्कि वह स्वयं जमीन से प्रकट हुई थी. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, जो लोग ऊपरी साये या भूत-प्रेत जैसी बाधाओं से परेशान रहते हैं, उन्हें यहां के दर्शन और विशेष भभूत से तुरंत राहत मिलती है. आज यह मंदिर दूर-दराज के राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अटूट आस्था का केंद्र बन चुका है.
गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में कई प्राचीन और चमत्कारी मंदिर है. जहां दूर-दूर से लोग अपनी मुरादें लेकर आते हैं. इन्हीं में से एक है इटियाथोक ब्लॉक के रुदापुर गांव में स्थित हनुमानगढ़ी मंदिर अपनी पौराणिक मान्यताओं और चमत्कारों के लिए जाना जाता है. इस मंदिर को लेकर लोगों के मन में गहरी श्रद्धा है. कहा जाता है कि यहां आने वाले भक्तों की न केवल मनोकामनाएं पूरी होती हैं, बल्कि जिन लोगों पर किसी भी तरह की नकारात्मक शक्ति या ऊपरी साये का असर होता है, उन्हें भी यहां आकर शांति मिलती है.
मंदिर के महंत बलराम दास ने इस स्थान के प्राचीन इतिहास के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि करीब 200 से 250 साल पहले यहां बहुत घना जंगल हुआ करता था. इसी गांव के एक हनुमान भक्त को सपने में बजरंगबली ने दर्शन दिए और एक खास जगह के बारे में बताया. जब उस स्थान पर खुदाई की गई, तो वहां से हनुमान जी की एक दिव्य प्रतिमा निकली. खास बात यह है कि यह प्रतिमा मनुष्य द्वारा बनाई गई नहीं है, बल्कि यह स्वयं प्रकट हुई है. तब से इस स्थान पर मंदिर का निर्माण हुआ और धीरे-धीरे यह जगह देशभर में मशहूर हो गई.
इस मंदिर में दूर होती है ऊपरी बाधा
महंत बलराम दास बताते हैं कि इस मंदिर में उन लोगों का विशेष इलाज होता है जो ऊपरी बाधा या भूत-प्रेत की समस्या से परेशान रहते हैं. यहां की मान्यता है कि लगातार 7 मंगलवार तक मंदिर आने से बड़ी से बड़ी बाधा टल जाती है. परेशान लोगों को बजरंग बली के हवन की पवित्र भभूत दी जाती है और एक विशेष दीक्षा (रक्षा सूत्र) दी जाती है. इसे धारण करने के बाद भक्तों को मानसिक और शारीरिक रूप से बहुत आराम महसूस होने लगता है.
मंदिर परिसर में परिक्रमा का महत्व
इस मंदिर में एक और अनोखी बात देखी जाती है. महंत के अनुसार, जैसे ही कोई पीड़ित व्यक्ति मंदिर के अंदर कदम रखता है, उसकी शारीरिक क्रियाओं से ही पता चल जाता है कि उस पर नकारात्मक शक्ति का प्रभाव है. इसके बाद उससे मंदिर की परिक्रमा कराई जाती है. परिक्रमा पूरी होने के बाद पीड़ित को हनुमान जी की प्रतिमा के सामने बैठाया जाता है, जिससे धीरे-धीरे उसकी बेचैनी कम होने लगती है और वह पूरी तरह स्वस्थ हो जाता है.
बजरंग बली की महिमा के कारण हर मंगलवार और शनिवार को यहां मेले जैसा माहौल रहता है. इन दो दिनों में विशेष पूजा और हवन का आयोजन किया जाता है. जो लोग लंबी बीमारी या किसी अज्ञात डर से परेशान होते हैं, वे भी इन दिनों में आकर बजरंगबली के चरणों में माथा टेकते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि हनुमान जी की कृपा से यहां से कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता.
देशभर से खिंचे चले आते हैं श्रद्धालु
बजरंगबली के इस दरबार की ख्याति अब गोंडा ही नहीं बल्कि देश में फैल गई है. महंत जी बताते हैं कि यहां केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि बिहार, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों से भी लोग अपनी परेशानियां लेकर आते हैं. जिनकी समस्या का हल कहीं और नहीं मिलता, वे इस विश्वास के साथ रुदापुर पहुंचते हैं कि बजरंग बली उनके सारे दुख हर लेंगे.
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सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें


