4 C
Munich

गोहत्या सांप्रदायिक तनाव भड़काती है.. याची पर लगे रासुका को सही ठहराते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

Must read


Last Updated:

Allahabad High Court News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गोहत्या के एक मामले अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि इससे सांप्रदायिक भावनाएं आहत होती हैं और समाज में वैमनस्य फैलता है. इस टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने रासुका के तहत याची की हिरासत को सही ठहराया.

ख़बरें फटाफट

Zoom

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गोहत्या को लेकर सुनाया अहम फैसला

प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट का गौ हत्या को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट ने कहा कि गौ हिंसा एक शांत समाज को नुकसान पहुंचाती है और जीवन की सामान्य गति को पूरी तरह से बाधित कर देती है. कोर्ट ने कहा गाय की हत्या स्वतः ही तीव्र भावनाएं और हिंसक प्रतिक्रियाएं भड़काती है. इस टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने रासुका के तहत याची की हिरासत को सही ठहराया. याची पर 2025 में होली के समय के आस-पास जंगल में एक गाय और दो बछड़ों की हत्या करने का आरोप है.

इस मामले की सुनवाई जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस संजीव कुमार की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई. कोर्ट ने अपने आदेश में टिप्पणी की, “कुछ ऐसे मुद्दे हैं, जिनके प्रति समुदाय इतना संवेदनशील होता है कि यदि वे सामने आते हैं तो उनमें समाज में व्यापक उथल-पुथल मचाने की अंतर्निहित क्षमता होती है. जो जीवन की सामान्य गति को प्रभावित करती है, इनमें से एक मुद्दा गाय की हत्या है. ” यह देखते हुए कि इस कृत्य में जीवन की सामान्य गति को बाधित करने की क्षमता है और यह सार्वजनिक व्यवस्था का उल्लंघन करता है, खंडपीठ ने हिरासत आदेश पारित करने में ‘हिरासत प्राधिकारी’ को पूरी तरह से उचित पाया. प्राधिकारी ने यह सोचकर आदेश दिया कि जेल से रिहा होने पर याचिकाकर्ता सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए हानिकारक गतिविधियों में शामिल हो सकता है. इस प्रकार कोर्ट ने याचिकाकर्ता समीर द्वारा अपनी हिरासत को चुनौती देने वाली ‘बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका’ खारिज कर दी.

ये है पूरा मामला

समीर की हिरासत का आदेश शामली के ज़िला मजिस्ट्रेट ने रासुका की धारा 3(3) के तहत दिया था. जिसे बाद में राज्य सरकार ने भी सही ठहराया था. 15 मार्च 2025 को पुलिस दल को शामली ज़िले के एक गांव के खेत में गाय के बछड़ों के अवशेष मिले. चूंकि उस समय होली का त्यौहार चल रहा था, इसलिए इस घटना से हिंदू आबादी के बीच अशांति फैल गई. जिसके चलते शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए वहां अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा. पुलिस ने दावा किया कि स्थानीय ग्रामीणों और विभिन्न हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं की आक्रोशित भीड़ घटनास्थल पर जमा हो गई. उन्होंने इस कृत्य के लिए ज़िम्मेदार अपराधियों की तत्काल गिरफ़्तारी की मांग करते हुए ज़ोरदार नारे लगाए. सड़क जाम कर दिया गया और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हुईं. पुलिस को कई गांवों में डेरा डालना पड़ा ताकि इस घटना से बिगड़ी सार्वजनिक व्यवस्था को बहाल किया जा सके.

याची की थी ये दलील

पुलिस जांच के बाद याचिकाकर्ता और उसके साथियों को गिरफ्तार कर लिया गया. और उन्होंने जंगल में एक गाय और दो बछड़ों की हत्या करने की बात कबूल कर ली थी. हाईकोर्ट के सामने याचिकाकर्ता ने दलील दी कि उस पर लगाया गया अपराध एक छोटा-मोटा अपराध है, जिसकी सुनवाई मजिस्ट्रेट कर सकता है; और अगर यह साबित भी हो जाता है कि यह अपराध उसी ने किया है, तो भी यह “कानून-व्यवस्था के उल्लंघन से ज़्यादा कुछ नहीं” माना जाएगा. इसलिए यह तर्क दिया गया कि रासुका के तहत हिरासत में रखना अनुचित था. दूसरी ओर, राज्य सरकार के वकील ने इस विवादित आदेश का बचाव किया. हाईकोर्ट ने 2002 के एक आदेश का हवाला दिया, जिसमें यह कहा गया कि गोहत्या सांप्रदायिक तनाव भड़काती है. वैमनस्य पैदा करती है और ऐसी स्थिति उत्पन्न करती है जिससे सार्वजनिक व्यवस्था भंग हो जाती है. बेंच ने इस तर्क पर भी विचार किया कि क्या जेल में बंद किसी व्यक्ति को निवारक हिरासत में रखा जा सकता है. इसने कमरुननिसा बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का हवाला देते हुए कहा कि अधिकारी ऐसे व्यक्ति के ख़िलाफ़ हिरासत का आदेश वैध रूप से पारित कर सकता है, यदि इस बात की वास्तविक संभावना हो कि उसे ज़मानत पर रिहा कर दिया जाएगा और रिहा होने पर वह सार्वजनिक व्यवस्था के लिए हानिकारक गतिविधियों में शामिल हो सकता है. हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के इस तर्क को भी ख़ारिज किया कि राज्य सरकार और सलाहकार बोर्ड ने उसकी हिरासत के ख़िलाफ़ उसके अभ्यावेदन पर निर्णय लेने में अत्यधिक विलंब किया.

About the Author

authorimg

Amit Tiwariवरिष्ठ संवाददाता

अमित तिवारी, News18 Hindi के डिजिटल विंग में प्रिंसिपल कॉरेस्पॉन्डेंट हैं. वर्तमान में अमित उत्तर प्रदेश की राजनीति, सामाजिक मुद्दों, ब्यूरोक्रेसी, क्राइम, ब्रेकिंग न्यूज और रिसर्च बेस्ड कवरेज कर रहे हैं. अख़बार…और पढ़ें



Source link

- Advertisement -spot_img

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img

Latest article