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भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व दिग्गज क्रिकेटर नवजोत सिंह सिंद्धू को आज बच्चा-बच्चा जानता है. सिद्धू को आज की पीढ़ी भले ही खेलते हुए नहीं देखी है, उनकी कमेंट्री के हर कोई फैन है, लेकिन इस दिग्गज क्रिकेटर से जुड़ा एक ऐसा मामला भी रहा है जब उन्होंने गुस्से में एक बुजुर्ग की जान ले ली थी, जिसके लिए उन्हें 1 साल की जेल काटनी पड़ी थी.
पूर्व भारतीय क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू
नई दिल्ली: साल 1988 की वो सर्द दोपहर और पटियाला का शेरांवाला गेट. किसी ने नहीं सोचा था कि सड़क पर पार्किंग को लेकर शुरू हुई एक मामूली सी बहस जानलेवा बन जाएगा. ये घटना है उस समय के उभरते हुए क्रिकेटर नवजोत सिंद्धू की जो पार्किंग विवाद के कारण अपने एक शख्स की जान ले बैठे और आगे चलकर उन्हें जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ा. हालांकि, सिद्धू को जेल की सजा होने में 34 साल लग गए. जिसके कारण भारतीय न्याय व्यवस्था भी गंभीर सवाल उठे.
27 दिसंबर 1988 के उस दोपहर को क्या हुआ था
नवजोत सिंह सिद्धू के साथ रोड रेज का ये मामला 27 दिसंबर 1988 को हो हुआ था. दोपहर का समय था. सिद्धू अपने दोस्त रुपिंदर सिंह संधू के साथ पटियाला की सड़कों पर थे. बीच सड़क पर खड़ी एक कार को लेकर सिद्धू की एक 65 वर्षिय बुजुर्ग गुरनाम सिंह से हो गई.
मामला सिर्फ बहस तक नहीं रुका और हाथापाई हो गई. इस हाथपाई में सिद्धू पर आरोप लगा कि उन्होंने गुरनाम सिंह को घूंसा मारा वह वहां से चले गए. सिद्धू तो वह चले गए, लेकिन गुरनाम सिंह घायल अवस्था में अस्पताल ले जाएगा जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. इसके बाद सिद्धू मुश्किलों में पड़ गए.
कोर्ट में तीन दशक तक चला केस
रोड रेज के इस मामले में गुरनाम सिंह के परिवार किसी भी कीमत पर सिद्धू को सजा दिलाने चाहते थे. ऐसे में लंबी कानूनी लड़ाई चली और साल 1999 में निचली अदालत ने सिद्धू को बरी कर दिया. अदालत के इस फैसले के बाद ऐसा लगा कि ये मामला यहीं खत्म हो गया है, लेकिन गुरनाम सिंह के परिवार ने इस फैसले को चुनौती दे डाली. फिर क्या था मामला फिर से खुला और साल 2006 में हाई कोर्ट ने सिद्धू को 3 साल की सजा सुनाई. इस बार सिद्धू ने इस फैसले को चुनौती और वह सुप्रीम कोर्ट पहुंचे. सुप्रीम कोर्ट में साल 2018 में सिद्धू को महज 1000 रुपए के जुर्माने पर राहत मिल गई.
कोर्ट के इस फैसले से हताश गुरनाम सिंह रिव्यू पीटीशन दायर कर दिया. इसके बाद मई, 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने माना कि गुस्से पर नियंत्रण नहीं होना और एक बुजुर्ग के साथ शारीरिक हिंसा करना गंभीर है, जिसके लिए सिद्धू को एक साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई.
सिद्धू ने कोर्ट में किया सरेंडर
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद सिद्धू ने 20 मई 2022 को सरेंडर किया और जेल गए. जेल की दीवारों के पीछे सिद्धू ने अपना वक्त क्लर्क के तौर पर फाइलें व्यवस्थित करने और योग-ध्यान में बिताया. हालांकि, अच्छे आचरण और जेल नियमों के तहत मिलने वाली रियायतों के कारण सिद्धू ने अपनी एक साल की सजा पूरी होने से करीब 48 दिन पहले ही 1 अप्रैल 2023 को रिहाई पा ली.
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जितेंद्र कुमार डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में बीते 10 सालों से सक्रिय हैं. इस वक्त नेटवर्क 18 समूह में हिंदी स्पोर्ट्स सेक्शन में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. क्रिकेट के साथ बॉक्सिंग, कबड्डी, बैडमिंटन, ह…और पढ़ें


