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निमंत्रण का नाम सुनते ही आमतौर पर दावत, शादी या किसी बड़े आयोजन की तस्वीर सामने आती है, लेकिन क्या आपने कभी सिर्फ मिठाई के लिए दिए जाने वाले निमंत्रण के बारे में सुना है? उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में आज भी एक ऐसी ही अनोखी परंपरा निभाई जाती है, जिसे ‘चटपट पूजा’ कहा जाता है. यह सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सुहाग, आस्था और महिलाओं के मेल-मिलाप का खास उत्सव है, जो सदियों से अपनी परंपरा को संजोए हुए है.
सुल्तानपुरः खाने का निमंत्रण और छोटी-मोटी पार्टियों के निमंत्रण तो आपने बहुत सुना होगा, लेकिन क्या कभी सिर्फ मिठाई के निमंत्रण के बारे में सुना है? अगर नहीं, तो सुल्तानपुर की यह अनोखी परंपरा आपको जरूर हैरान कर देगी. उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में सदियों पुरानी एक खास परंपरा आज भी निभाई जाती है, जिसे चटपट कहा जाता है.

इस पूजा की सबसे खास बात यह है कि जिस घर में चटपट महारानी की पूजा होती है, वहां गांव की महिलाओं को विशेष रूप से मिठाई खाने का निमंत्रण दिया जाता है. यह केवल पूजा नहीं, बल्कि महिलाओं के मेल-मिलाप, आस्था और परंपरा का एक पारंपरिक उत्सव है. तो आइए जानते हैं, आखिर क्या है चटपट पूजा की यह अनोखी परंपरा और क्यों आज भी इसे इतने श्रद्धा से निभाया जाता है.

स्थानीय महिला उषा देवी ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि चटपट महारानी का पूजन, जिसे सुल्तानपुर सहित पूरे अवध क्षेत्र में अवसान चबाना कहा जाता है, एक बेहद प्राचीन परंपरा है.यह पूजा अवसान मैया की आराधना के रूप में की जाती है. उन्होंने बताया कि जब किसी लड़की की शादी होती है और वह ससुराल से मायके आती है, या ससुराल में ही यह अनुष्ठान करवाया जाता है, तब दोनों पक्षों की ओर से सात-सात सुहागिन महिलाओं को पूजन में बैठाया जाता है.
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इनके साथ वह नवविवाहिता महिला भी शामिल होती है, जिसने यह पूजा मन्नत के रूप में रखी होती है. कई बार इस अनुष्ठान में 14 या 21 सुहागिन महिलाएं भी भाग लेती हैं. उषा देवी के मुताबिक, चटपट पूजा की यह परंपरा नई नहीं, बल्कि सैकड़ों वर्षों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत है, जिसे आज भी महिलाएं पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभा रही हैं.

इस पूजन में पक्की मिठाई का प्रसाद होता है. सभी सुहागनो को बिंदी, चूड़ी, आलता लगाया, पहनाया जाता है और फिर गौर, सुपारी, पान, फूल, हल्दी, कुमकुम से माता रानी की पूजा होती है फिर सभी सुहागन मां गौरी से उठाकर सिंदूर लगाती हैं जिसे सुहाग लेना भी कहते हैं. इसके साथ ही इसमें पांच या फिर सात चटपट महारानी की कथा सुनाई जाती है और गीत गाए जाते हैं.

चटपट महारानी की इस पूजा में कोई ना तो लाई प्रसाद के रूप में इस्तेमाल की जाती है और ना ही किसी प्रकार का अन्य गुड़ और बतासे का इस्तेमाल किया जाता है बल्कि इसके लिए गाय के दूध का शुद्ध मिठाई बनाई जाती है और उसी का इस्तेमाल किया जाता है इसमें सिर्फ महिलाओं को मिठाई का नेवता दिया जाता है.


