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जंगली बाबा शिवलिंग I temples in gonda

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गोंडा के केशवपुर पहाड़वा में स्थित जंगली बाबा महादेव शिवलिंग अपनी रहस्यमयी कथा और गहरी आस्था के लिए प्रसिद्ध है. मान्यता है कि औरंगजेब के समय इसे तोड़ने की कोशिश नाकाम रही, और आज भी इसके निशान मौजूद हैं. सावन और महाशिवरात्रि पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, जो इसे चमत्कार और विश्वास का प्रतीक मानते हैं.

गोंडा. उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के विकासखंड झंझरी ग्राम सभा केशवपुर पहाड़वा में स्थित एक जंगली बाबा प्राचीन महादेव शिवलिंग अपनी अनोखी कहानी और गहरी आस्था के लिए जाना जाता है. स्थानीय लोगों के अनुसार, यह मंदिर सैकड़ों साल पुराना है और यहां का शिवलिंग बेहद पवित्र माना जाता है. लोकल 18 से बातचीत के दौरान गांव के राधेश्याम गिरी के मुताबिक, मुगल शासक औरंगजेब के शासनकाल में इस शिवलिंग को तोड़ने की कोशिश की गई थी. कहा जाता है कि जब सैनिकों ने शिवलिंग को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया, तभी वहां एक अजीब घटना हुई. लोगों का मानना है कि शिवलिंग से अचानक सांप और बिच्छू निकलने लगे, जिससे सैनिक घबरा गए और वहां से भाग खड़े हुए. आज भी जंगली बाबा शिवलिंग पर किसी ऐसी चीज के निशान बने हुए है जिस पत्थर की पढ़ाई की जा रही थी. राधेश्याम गिरी बताते हैं कि हमारे पूर्वज हम लोग को कहानी किस्से बताते थे, यहां जो निशान है. औरंगजेब के सैनिकों द्वारा शिवलिंग को तोड़ने की कोशिश की गई थी वह निशान आज भी मौजूद है. इस घटना के बाद शिवलिंग को नुकसान पहुंचाने की कोशिश छोड़ दी गई. तभी से यह स्थान लोगों के बीच आस्था और चमत्कार का प्रतीक बन गया. दूर-दूर से श्रद्धालु यहां भगवान शिव के दर्शन करने आते हैं और अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं.

नाम के पीछे की क्या है कहानी

राधेश्याम गिरी बताते हैं कि आज से 5 साल पहले गांव के कुछ लोगों ने शिवलिंग के नीचे खुदाई करने की कोशिश की तो उनको एक विशाल सांप दिखा. जिसके बाद वह उस स्थान को वैसे ही छोड़कर चले गए. लेकिन माना जाता है कि 24 घंटे बाद उनका देहांत हो गया. स्थानीय शिव बहादुर सिंह बताते हैं कि यहां आने वाले भक्तों को मानसिक शांति मिलती है. सावन और महाशिवरात्रि जैसे खास अवसरों पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. इसके अलावा यहां पर प्रत्येक सोमवार और शुक्रवार को श्रद्धालु आते हैं.  शिव बहादुर सिंह बताते हैं कि इस घटना के बारे में कोई आधिकारिक ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है, लेकिन स्थानीय मान्यताओं और लोगों की आस्था इसे आज भी जीवित रखे हुए हैं. यही कारण है कि यह मंदिर सिर्फ पूजा का स्थान ही नहीं, बल्कि एक रहस्यमयी और आकर्षक स्थल भी बन गया है. यह कहानी हमें बताती है कि आस्था और विश्वास लोगों के जीवन में कितना बड़ा स्थान रखते हैं. गोंडा का यह प्राचीन जंगली बाबा महादेव शिवलिंग आज भी श्रद्धा और विश्वास का केंद्र बना हुआ है. इस शिवलिंग की खासियत यह है कि ऊपर से गोल बीच में अष्टभुजाकार और नीचे चतुर्भुजाकार में है ऐसा शिवलिंग बहुत कम देखने को मिलता है या अपने आप में अद्भुत शिवलिंग है. शिव बहादुर सिंह बताते हैं कि जंगली बाबा शिवलिंग की सबसे बड़ी मान्यता यह है कि यहां पर पांच सोमवार जलाभिषेक करने से भगवान भोलेनाथ की सारी मनोकामना पूरी करते हैं.
राधेश्याम गिरी बताते हैं हमारे पूर्वज हम लोग को बताते थे कि यहां पर एक विशाल जंगल हुआ करता था और जब औरंगजेब ने इस शिवलिंग तोड़ने की कोशिश की तो लोगों को इस शिवलिंग के बारे में पता चला फिर यहां पर लोगों ने इस स्थान को जंगली बाबा शिवलिंग के नाम से प्रसिद्ध किया और इस समय पूरे देश में जंगली बाबा शिवलिंग के नाम से प्रसिद्ध है.

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Monali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें



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