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Exit Poll Result: एग्जिट पोल बता रहे हैं कि असम में हिमंता बिस्वा सरमा ने बीजेपी को उस मुकाम पर पहुंचा दिया है, जहां से आगे का रास्ता बहुत साफ दिखता है. 38 फीसदी मुस्लिम आबादी वाले राज्य में अगर बीजेपी 48 फीसदी वोट ले रही है, तो ये ‘भगवा लहर’ नहीं, बल्कि ‘भगवा सुनामी’ है.
असम में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या लगभग 38 फीसदी है.
असम को लेकर एग्जिट पोल के जो आंकड़े आए हैं, उन्होंने बड़े-बड़े राजनीतिक पंडितों के चश्मे उतार दिए हैं. न्यूज18 वोट वाइब और एक्सिस माई इंडिया के सर्वे ने जो तस्वीर दिखाई है, वो साफ- साफ कह रही कि बीजेपी के लिए ‘पूर्वोत्तर के चाणक्य’ हिमंता बिस्वा सरमा ने चमत्कार कर दिया है. उस राज्य में जहां 38% के करीब मुस्लिम आबादी है, वहां भगवा लहर के संकेत मिल रहे हैं. सर्वे के आंकड़े बता रहे कि बीजेपी वहां 50 फीसदी के आसपास वोट हासिल कर सकती है. असम की राजनीति को समझने वाले एक्सपर्ट की मानें तो पहले ऐसा सोचना भी असंभव लग रहा था.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बहुत पहले एक बात कही थी, जो बीजेपी के कार्यकर्ताओं के लिए मंत्र बन गई थी. दिल्ली में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था- हमें सिर्फ चुनाव नहीं जीतना है, हमें 50 फीसदी वोट शेयर के लिए लड़ना है. और हिमंता पीएम मोदी का वही सपना असम में पूरा करते दिख रहे हैं. अब आप सोचिए, जिस राज्य में 38 फीसदी मुस्लिम आबादी हो, वहां कोई पार्टी 50 फीसदी वोट शेयर का सपना देखे, तो सुनने में ये पॉलिटिकल फंतासी जैसा लगता है. लेकिन सर्वे देखकर ऐसा लगता है कि हिमंता बिस्वा सरमा ने इसे हकीकत के धरातल पर उतार दिया है. ये आंकड़ा सिर्फ नंबर नहीं है, ये विपक्ष के लिए खतरे का सायरन है.
क्या बदला इस बार?
2021 के चुनाव में मुस्लिम वोटों का बड़ा हिस्सा कांग्रेस और उसके सहयोगी एआईयूडीएफ की ओर गया था. इसकी बदौलत तब कांग्रेस को लगभग 29.67% वोट शेयर मिला था. बीजेपी को मुस्लिम मतदाताओं का समर्थन अपेक्षाकृत कम मिलता रहा है. लेकिन सर्वे के आंकड़े बता रहे कि कुछ तो बदला है.
- न्यूज18 और वोट वाइब का सर्वे बता रहा कि बीजेपी को इस बार 46.1% वोट मिल सकता है, जो 2021 में सिर्फ 33.21% था. एक चौंकाने वाली बात सामने आई है. मुस्लिम बहुल इलाकों में गौरव गोगोई पहली पसंद नजर आए. 73.7% मुस्लिम उन्हें सीएम के रूप में चेहरा देखते हैं. जबकि सिर्फ 15.2% मुसलमान ही हिमंता बिस्वा सरमा को पसंद करते हैं.
- बात एक्सिस माई इंडिया के सर्वे से करें तो असम में इस बार बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए को 48 फीसदी वोट मिल सकते हैं. जबकि कांग्रेस 38 फीसदी पर अटक सकती है. साफ इशारा है कि पूरे मुसलमानों ने भी कांग्रेस को वोट नहीं दिया है. कुछ एआईयूडीएफ की ओर गए हैं, तो हो सकता है कि कुछ बीजेपी के साथ भी गए हों.
हिमंता ने कैसे किया चमत्कार
- असम की डेमोग्राफी को समझना बहुत जरूरी है. वहां करीब 38 फीसदी मुस्लिम आबादी है. चुनावी गणित के हिसाब से माना जाता था कि अगर ये वोट बैंक एकमुश्त कहीं गिरता है, तो बीजेपी की राह मुश्किल होगी. लेकिन हिमंता बिस्वा सरमा ने इस पॉलिटिकल नैरेटिव को ही बदल दिया.
- हिमंता ने दो मोर्चों पर काम किया. पहला, स्वदेशी समुदायों के बीच ये भरोसा जगाया कि उनकी पहचान सुरक्षित है. और दूसरा, ‘लाडली ब्राह्मण’ और ‘ओरुनोडोई’ जैसी योजनाओं के जरिए सीधा महिलाओं के किचन तक एंट्री मारी.
- जब 48-50 फीसदी वोट शेयर की बात होती है, तो इसका मतलब है कि राज्य का हर दूसरा व्यक्ति बीजेपी को वोट दे रहा है. इसमें वो लोग भी शामिल हैं जो पारंपरिक तौर पर बीजेपी के कट्टर समर्थक नहीं रहे हैं.
चाणक्य क्यों कहे जा रहे हैं हिमंता?
हिमंता बिस्वा सरमा को लोग ‘पूर्वोत्तर का चाणक्य’ ऐसे ही नहीं कहते. उन्होंने असम में राजनीति का खेल ही पलट दिया. बाल विवाह के खिलाफ उनकी सख्त कार्रवाई हो, या मदरसों को स्कूल में बदलने का फैसला… हिमंता ने पोलराइजेशन और प्रोग्रेस को एक ही पटरी पर दौड़ाया. विपक्ष इस कोशिश में था कि ध्रुवीकरण के जरिए बीजेपी को घेरा जाए, लेकिन हिमंता ने इसे असमिया अस्मिता और ‘अवैध घुसपैठ’ के खिलाफ लड़ाई बताकर गेम ही पलट दिया. नतीजा सर्वे में नजर आ रहा है.
50 फीसदी वोट शेयर का पॉलिटिकल वेटेज
जब किसी पार्टी को 50 फीसदी वोट मिलते हैं, तो विपक्ष की एकता बेमानी हो जाती है. अगर सारा विपक्ष एक साथ आ भी जाए, तब भी वो आपको नहीं हरा सकता. ये वो स्थिति है जिसे राजनीति में अजेय कहा जाता है. असम में अगर बीजेपी 48-50% वोट शेयर लाती है, तो इसका मतलब है कि वहां अब कोई महागठबंधन काम नहीं आने वाला.
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Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें


