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टीम इंडिया के ड्रेसिंग रूम में घुसा दाऊद इब्राहिम…देने लगा बड़ा ऑफर, कपिल देव ने एक झटके में निकाली हेकड़ी- ‘चल बाहर निकल’

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टीम इंडिया के ड्रेसिंग रूम में घुसा दाऊद इब्राहिम, कपिल देव ने निकाली हेकड़ी

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Kapil dev kicked Dawood Ibrahim: यह किस्सा 1987 में शारजाह के ड्रेसिंग रूम का है, जब अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम ने पाकिस्तान को हराने के बदले भारतीय टीम को टोयोटा कार देने का ऑफर दिया था. टीम के दिग्गज खिलाड़ी इस प्रस्ताव से हैरान थे, तभी कप्तान कपिल देव ने वहां पहुंचकर बिना डरे दाऊद को फटकार लगाई और तुरंत बाहर जाने का आदेश दिया.उस वक्त कपिल नहीं जानते थे कि वह व्यक्ति कौन है, लेकिन उनके इस साहस ने खेल की गरिमा को बरकरार रखा.

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कपिल देव ने एक बार दाऊद इब्राहिम को ड्रेसिंग रूम से बाहर निकाला था.

नई दिल्ली. शारजाह का मैदान उस दिन तप रहा था. भारतीय टीम एक कड़े अभ्यास सत्र के बाद पसीने से तरबतर होकर ड्रेसिंग रूम में वापस लौटी थी. श्रीकांत, सुनील गावस्कर, दिलीप वेंगसरकर और कीर्ति आजाद जैसे दिग्गज खिलाड़ी अपनी थकान मिटाने की कोशिश कर रहे थे. ड्रेसिंग रूम का माहौल शांत था, लेकिन तभी दो लोग बिना किसी इजाजत के अंदर दाखिल हुए. उनमें से एक चेहरा तो सभी के लिए जाना-पहचाना था मशहूर बॉलीवुड कॉमेडियन महमूद. लेकिन उनके साथ मौजूद दूसरा शख्स, जिसने आंखों पर चश्मा चढ़ाया हुआ था, खिलाड़ियों के लिए अजनबी था. महमूद ने बड़े उत्साह के साथ उस शख्स का परिचय कराया और कहा कि वह एक बड़े बिजनेसमैन हैं.

दिलीप वेंगसरकर (Dilip Vengsarkar) ने सालों बाद इस वाकये को याद करते हुए बताया कि वह ‘बिजनेसमैन’ और कोई नहीं, बल्कि अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम (Dawood Ibrahim) था. दाऊद उस वक्त अपनी ताकत और रसूख बढ़ा रहा था. उसने ड्रेसिंग रूम में खड़े होकर भारतीय खिलाड़ियों के सामने एक हैरान करने वाला प्रस्ताव रखा. दाऊद ने कहा, ‘अगर तुम लोग कल पाकिस्तान की टीम को हरा देते हो और टूर्नामेंट जीतते हो, तो मैं टीम के हर सदस्य को चाहे वह खिलाड़ी हो या अधिकारी एक-एक टोयोटा कार तोहफे में दूंगा.’

कपिल देव ने एक बार दाऊद इब्राहिम को ड्रेसिंग रूम से बाहर निकाला था.

80 के दशक में टोयोटा कार किसी सपने से कम नहीं थी
1980 के दशक में टोयोटा कार किसी सपने से कम नहीं थी. ड्रेसिंग रूम में एक पल के लिए सन्नाटा छा गया. खिलाड़ी एक-दूसरे का मुंह देख रहे थे. प्रस्ताव लुभावना था, लेकिन यह खेल की गरिमा और अनुशासन के खिलाफ था. टीम ने उस वक्त उस प्रस्ताव पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन वह शख्स वहीं जमा रहा. तभी ड्रेसिंग रूम में भारतीय कप्तान कपिल देव (Kapil Dev) की एंट्री हुई. कपिल अभ्यास सत्र के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस या किसी अन्य काम से लौटे थे. जैसे ही उन्होंने ड्रेसिंग रूम में बाहरी लोगों को देखा, उनका पारा चढ़ गया. कपिल देव के लिए ड्रेसिंग रूम एक मंदिर की तरह था, जहां बाहरी लोगों का प्रवेश वैन था.

दाऊद ने कपिल देव की आंखों में देखा, मुड़ा और बाहर चला गया
कपिल देव ने उस शख्स की हैसियत या रसूख की परवाह किए बिना सीधे उसकी ओर इशारा किया और कड़क आवाज में कहा, ‘चल बाहर निकल!’ महमूद और दाऊद दोनों सन्न रह गए. जिस शख्स के नाम से मुंबई कांपती थी, उसे एक क्रिकेटर ने सबके सामने बाहर जाने का आदेश दे दिया था. दाऊद ने बिना एक शब्द कहे कपिल देव की आंखों में देखा, मुड़ा और चुपचाप ड्रेसिंग रूम से बाहर चला गया.

बाद में खुला असली नाम
दिलचस्प बात यह है कि उस वक्त कपिल देव को यह अंदाजा भी नहीं था कि उन्होंने किसे बाहर निकाला है. कपिल ने बाद में एक इंटरव्यू में स्पष्ट किया था, ‘मुझे बस इतना पता था कि कोई बाहरी व्यक्ति अंदर आया है और नियमों के मुताबिक उसे वहां नहीं होना चाहिए था. मैंने उसे जाने को कहा और वह चला गया. बाद में मुझे किसी ने बताया कि वह बॉम्बे का कोई स्मगलर है जिसका नाम दाऊद इब्राहिम है.’ कपिल के लिए वह केवल एक बाहरीह व्यक्ति था, लेकिन बाकी खिलाड़ियों के लिए वह एक खौफनाक पल था. वेंगसरकर के मुताबिक, वह प्रस्ताव सीधे तौर पर ठुकरा दिया गया था क्योंकि भारतीय टीम किसी इनाम के लिए नहीं, बल्कि तिरंगे की शान के लिए खेल रही थी.

‘हरियाणा हरिकेन’ के सामने डॉन की एक न चली
यह किस्सा आज भी भारतीय क्रिकेट के गलियारों में गर्व के साथ सुनाया जाता है. यह कहानी केवल दाऊद इब्राहिम और कपिल देव की मुठभेड़ की नहीं है, बल्कि यह उस दौर के भारतीय क्रिकेट के अनुशासन और ईमानदारी की मिसाल है. कपिल देव ने उस दिन यह साबित कर दिया था कि खेल का मैदान और खिलाड़ियों का ड्रेसिंग रूम किसी भी अपराधी की पहुंच से बहुत ऊपर है. भले ही दाऊद इब्राहिम ने बाद में अपराध की दुनिया में अपनी जड़ें कितनी भी गहरी कर ली हों, लेकिन 1987 के उस दिन शारजाह के ड्रेसिंग रूम में ‘हरियाणा हरिकेन’ के सामने डॉन की एक न चली. वह चुपचाप बाहर निकल गया, पीछे छोड़ गया एक ऐसा इतिहास जिसे आज भी कपिल देव की निडरता के प्रमाण के रूप में याद किया जाता है.

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Kamlesh Raiचीफ सब एडिटर

करीब 15 साल से पत्रकारिता में सक्रिय. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई. खेलों में खासकर क्रिकेट, बैडमिंटन, बॉक्सिंग और कुश्ती में दिलचस्पी. IPL, कॉमनवेल्थ गेम्स और प्रो रेसलिंग लीग इवेंट्स कवर किए हैं. फरवरी 2022 से…और पढ़ें



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