6.8 C
Munich

सामने आई नोएडा हिंसा की खतरनाक साजिश, दिल्ली तक फैला नेटवर्क, कब क्या करना है…ब्लूप्रिंट बरामद

Must read


Last Updated:

Noida violence news : नोएडा में श्रमिकों का आंदोलन स्वत:स्फूर्त नहीं था. नोएडा और आसपास के इलाकों में हिंसा और बड़े स्तर पर अव्यवस्था फैलाने की साजिश का खुलासा हुआ है. पूरी साजिश की पटकथा कई महीनों पहले लिखी गई. इसमें अलग-अलग संगठनों और फ्रंट के जरिए लोगों को जोड़कर एक संगठित आंदोलन की आड़ में हालात बिगाड़ने की तैयारी थी. नोएडा के अरुण विहार इलाके से प्रिंटेड दस्तावेज बरामद किए गए हैं, जिनमें पूरी साजिश का ब्लूप्रिंट दर्ज है. 31 मार्च और 1 अप्रैल के बीच इस पूरी साजिश की अंतिम स्क्रिप्ट तैयार की गई.

Zoom

तमिलनाडु से गिरफ्तार मुख्य संदिग्ध आदित्य आनंद जून 2025 से नोएडा में रह रहा था.

नोएडा. दिल्ली से सटे नोएडा और आसपास के इलाकों में हिंसा और बड़े स्तर पर अव्यवस्था फैलाने की साजिश का खुलासा हुआ है. जांच एजेंसियों को मिले इनपुट और बरामद दस्तावेजों के आधार पर यह सामने आया है कि इस पूरी साजिश की पटकथा कई महीनों पहले लिखी गई थी, जिसमें अलग-अलग संगठनों और फ्रंट के जरिए लोगों को जोड़कर एक संगठित आंदोलन की आड़ में हालात बिगाड़ने की तैयारी थी. मुख्य संदिग्ध तमिलनाडु से गिरफ्तार आदित्य आनंद जून 2025 से नोएडा में रह रहा था, जबकि उससे पहले वह गुरुग्राम में रहता था. नोएडा में उसने एक रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल के घर में तीन कमरों का सेट किराए पर लिया हुआ था. इस घर को नोएडा-दिल्ली-गुरुग्राम हिंसा का सेंटर पॉइंट बनाया गया. वह खुद को एक IT कंपनी (Genpact) से जुड़ा बताता था.

जांच में यह भी सामने आया है कि साल 2022 में वह एक कैंपस इंटरव्यू के जरिए चयनित हुआ था और उसी दौरान उसकी कुछ अल्ट्रा लेफ्टिस्ट एक्टिविस्ट ग्रुप्स से नजदीकियां बढ़ी. जांच एजेंसियों के मुताबिक, कई संगठनों और फ्रंट के बीच गहरा कनेक्शन सामने आया, जिन्होंने मिलकर नोएडा हिंसा की प्लानिंग रची. इनमें RWPI (राजनीतिक फ्रंट), मजदूर बिगुल दस्ता, नौजवान भारत सभा और दिशा ऑर्गनाइजेशन शामिल थे. बताया जा रहा है कि ये सभी संगठन आपस में जुड़े हुए थे और एक साझा एजेंडा पर काम कर रहे थे.

लेबर स्ट्राइक के बहाने 
फरवरी 2026 में बड़े स्तर पर लेबर स्ट्राइक की योजना बनाई गई. इसके पीछे मकसद सिर्फ मजदूरों के मुद्दे उठाना नहीं, बल्कि सड़कों को जाम कर प्रशासनिक व्यवस्था को बाधित करना था. “मोटो जाम करना है” इस एजेंडे पर सभी 2022 से काम कर रहे थे. नोएडा के अरुण विहार इलाके से प्रिंटेड दस्तावेज बरामद किए गए हैं, जिनमें पूरी साजिश का ब्लूप्रिंट दर्ज है. इन दस्तावेजों में- किस फेज में क्या करना है, कब और कहां लोगों को इकट्ठा करना है, किस तरह से प्रदर्शन को आगे बढ़ाना है, व्हाट्सएप का एडमिन कब बनाना है, प्लानिंग सफल होने पर कब लेफ्ट होना है. जिसमें श्रमिक काम करते हैं उन्हीं कंपनी नाम पर हिंसा के व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए.

मानेसर से नोएडा तक
जांच में सामने आया है कि करावल नगर, मानेसर और नोएडा को जोड़ते हुए एक श्रृंखलाबद्ध प्रदर्शन की योजना बनाई गई थी. मार्च 2026 के अंत से अप्रैल तक मानेसर में मजदूर प्रदर्शन हुआ. 30 मार्च से 1 अप्रैल के बीच बड़ी संख्या में लोग अरुण विहार में जुटे. अलग-अलग संगठनों के फ्रंट के जरिए भीड़ को संगठित किया गया. बरामद दस्तावेजों के अनुसार, इस पूरे आंदोलन को मई 2026 तक जारी रखने की योजना थी, ताकि धीरे-धीरे इसका दायरा बढ़ाया जा सके और व्यापक असर डाला जा सके.

कर रहा पीएचडी की तैयारी
एजेंसियां अब इस बात की जांच कर रही हैं कि इस पूरे नेटवर्क को फंडिंग कहां से मिल रही थी. साथ ही यह भी पता लगाया गया है कि युवाओं को कैसे इस नेटवर्क में जोड़ा गया और उनकी भर्ती किस तरीके से की गई. जांच में कुछ नाम सामने आए हैं, जैसे- हिमांशु (उधमपुर नगर का रहने वाला) और आदित्य (जिसका लैपटॉप और फोन गायब बताया जा रहा है). बताया जा रहा है कि दोनों के बीच गहरा संपर्क था. आदित्य ने लेबर स्टडी में MA किया है. वो हंसराज कॉलेज से भी स्टडी कर चुका है. फिलहाल पीएचडी की तैयारी कर रहा था. आदित्य 2022 में कॉलेज प्लेसमेंट के दौरान ही 1 लाख कमाता था, इसलिए वो हिंसा के लिए पैसे खर्च कर भी रहा था.

दिल्ली रेड में क्या मिला
दिल्ली के आदर्श नगर और शाहबाद डेरी इलाके में छापेमारी की गई थी, जहां से इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, संदिग्ध दस्तावेज, पेम्फलेट और एक अज्ञात डिवाइस बरामद किए गए हैं. पिछले एक महीने से पेम्फलेट बांटकर लोगों को जोड़ने का काम किया जा रहा था. जांच के मुताबिक, 31 मार्च और 1 अप्रैल के बीच इस पूरी साजिश की अंतिम स्क्रिप्ट तैयार की गई थी, जिसमें कई लोगों की भूमिका चिन्हित की गई है. फिलहाल एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं. फंडिंग, विदेशी लिंक, और अन्य संगठनों के संभावित संबंधों की भी जांच की जा रही है. नोएडा हिंसा की इस साजिश ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि कैसे संगठित तरीके से आंदोलन की आड़ में बड़े स्तर पर अस्थिरता फैलाने की कोशिश की जा रही थी.

About the Author

authorimg

Priyanshu Gupta

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें



Source link

- Advertisement -spot_img

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img

Latest article