Meerut News: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में सोमवार को उस समय हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जब नगर निगम की बदहाली के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों और पार्षद की एडीएम सिटी (ADM City) के साथ तीखी झड़प हो गई. बात इतनी बढ़ गई कि अधिकारी अपना आपा खो बैठे और प्रदर्शनकारियों को देख लेने की धमकी दे डाली. इस पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एडीएम सिटी गुस्से में यह कहते सुनाई दे रहे हैं, ‘दिमाग खराब है तुम्हारा… अभी तू मुझे जानता नहीं है… दो मिनट में तरीका सिखा दूंगा.’
दरअसल, जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, उसमें एडीएम सिटी बृजेश सिंह बेहद गुस्से में नजर आ रहे हैं. वे एक प्रदर्शनकारी से कहते दिख रहे हैं, ‘दिमाग खराब हो गया है तुम्हारा… अभी तू मुझे जानता नहीं है, दो मिनट में… तरीका सिखाओगे मुझे तुम? इसको समझा लो.’ अधिकारी के इन तल्ख तेवरों को देख प्रदर्शनकारी भड़क गए और मौके पर ‘नगर निगम हाय-हाय’ और ‘प्रशासन मुर्दाबाद’ के नारे लगने लगे. स्थिति को बिगड़ता देख वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने मोर्चा संभाला और एडीएम सिटी को सुरक्षा घेरे में लेकर पीछे किया.
क्या है पूरा मामला? क्यों भड़के थे ग्रामीण और पार्षद
दरअसल, यह पूरा विवाद वार्ड संख्या 6 के पार्षद प्रदीप कसाना के नेतृत्व में शुरू हुआ. जानकारी के मुताबिक, कुंडा, पुट्ठा और डूंगरवाली जैसे गांवों के सैकड़ों ग्रामीण ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर कमिश्नरी कार्यालय पहुंचे थे. ग्रामीणों का आरोप है कि उनका इलाका अब ‘नगर निगम’ नहीं बल्कि ‘नरक निगम’ बन चुका है. वार्ड में सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप है, नालियां चोक हैं और कूड़े के ढेर लगे हैं. पार्षद का कहना है कि 20-25 वर्ग किलोमीटर के इस वार्ड में कर्मचारियों की भारी कमी है, जबकि आधे से ज्यादा कर्मचारी सिर्फ वीआईपी इलाकों (दिल्ली रोड) में तैनात कर दिए गए हैं.
ट्रैक्टर की चाबियां छीनने पर बढ़ा तनाव
ग्रामीण जब ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर कमिश्नरी पहुंचे, तो पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। इस दौरान पुलिसकर्मियों और ग्रामीणों के बीच धक्का-मुक्की हुई. आरोप है कि पुलिस ने ट्रैक्टरों की चाबियां छीन लीं, जिससे लोग और ज्यादा आक्रोशित हो गए. सूचना पर जब एडीएम सिटी बृजेश सिंह और अपर नगर आयुक्त लवी त्रिपाठी मौके पर पहुंचे, तो उन्होंने जाम का हवाला देकर ट्रैक्टर हटाने को कहा. इसी दौरान पार्षद और अधिकारी के बीच कहासुनी शुरू हो गई.
देखते ही देखते बहस इतनी बढ़ गई कि एडीएम सिटी ने पार्षद को जेल भेजने की धमकी दे दी. एडीएम के तल्ख तेवर देख ग्रामीण और भड़क गए और उन्होंने ‘नगर निगम हाय-हाय’ और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी शुरू कर दी.
‘नरक निगम’ बन चुका है नगर निगम: पार्षद
पार्षद प्रदीप कसाना का आरोप है कि उनके वार्ड का क्षेत्रफल करीब 20-25 वर्ग किमी है, लेकिन सफाई के नाम पर वहां खानापूर्ति हो रही है. आधे से ज्यादा सफाई कर्मचारी वीआईपी इलाकों (दिल्ली रोड) में तैनात हैं, जबकि गांवों और गलियों में कूड़े के ढेर लगे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां दो-दो हफ्ते तक नहीं आतीं. प्रदर्शन के दौरान एक ग्रामीण कुशलपाल ने तो यहां तक कह दिया कि ‘आपका नगर निगम अब ‘नरक निगम’ बन चुका है.’
गंदगी और जलभराव से परेशान हैं ग्रामीण
कुंडा, पुट्ठा और डूंगरवाली जैसे गांवों से आए ग्रामीणों का कहना है कि वे पिछले काफी समय से गंदगी, जलभराव, आवारा कुत्तों और बंदरों के आतंक से परेशान हैं. सुंदरा और इंद्रावती मोहल्लों में बंदरों ने जीना मुहाल कर रखा है. बीवीजी कंपनी की गाड़ियां हफ्ते-हफ्ते भर कूड़ा उठाने नहीं आतीं. बरसात के बाद जलभराव से महामारी फैलने का खतरा पैदा हो गया है. ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और उग्र होगा. वहीं, पार्षद का दावा है कि कई बार शिकायत के बावजूद जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो उन्हें मजबूरी में ट्रैक्टर लेकर कमिश्नरी का घेराव करना पड़ा.
पुलिस ने की वीडियो रिकॉर्डिंग, शांत कराया मामला
हंगामे को बढ़ता देख भारी पुलिस बल मौके पर तैनात किया गया. पुलिस ने हंगामा कर रहे लोगों की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की है. हालांकि, काफी देर तक चली जद्दोजहद और अपर नगर आयुक्त द्वारा जल्द समाधान के आश्वासन के बाद ग्रामीण शांत हुए. एडीएम सिटी ने साफ किया कि ट्रैक्टरों की वजह से आम जनता को परेशानी हो रही थी, इसलिए उन्हें हटाने को कहा गया था. फिलहाल, इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है, लेकिन प्रशासनिक अधिकारी और जनता के बीच की यह तकरार चर्चा का विषय बनी हुई है.


