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दुनिया का इकलौता बल्लेबाज… जिसके नाम एक दिन में 2 शतक जड़ने का है रिकॉर्ड, 130 साल से नहीं टूटा विश्व कीर्तिमान

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नई दिल्ली. क्रिकेट के खेल में रोजाना नए रिकॉर्ड बनते हैं और पुराने टूट जाते हैं. लेकिन इस खेल के 150 से अधिक सालों के इतिहास में कुछ पन्ने ऐसे भी हैं, जिन्हें दोबारा कोई नहीं लिख सका. आज से ठीक 130 साल पहले, भारतीय क्रिकेट के ‘पितामह’ कहे जाने वाले कुमार श्री रणजीत सिंहजी ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया था, जो आज भी एक अनसुलझी पहेली और अटूट दीवार की तरह खड़ा है. दरअसल, रणजीत सिंहजी दुनिया के इकलौते ऐसे बल्लेबाज हैं, जिन्होंने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में एक ही दिन में दो अलग-अलग पारियों में दो शतक जड़ने का अजूबा किया था. सदियां बीत गईं, क्रिकेट का स्वरूप बदल गया, लेकिन इस रिकॉर्ड को तोड़ना तो दूर, आज तक कोई इसके करीब भी नहीं पहुंच सका है.

यह ऐतिहासिक कहानी साल 1896 की है. इंग्लैंड के खूबसूरत शहर होव में ससेक्स और यॉर्कशायर के बीच एक फर्स्ट क्लास मुकाबला खेला जा रहा था. यॉर्कशायर की टीम ने अपनी पहली पारी में रनों का पहाड़ खड़ा करते हुए 407 रन बनाए. जवाब में उतरी ससेक्स की टीम ताश के पत्तों की तरह बिखर गई. मैच के तीसरे दिन ससेक्स की पहली पारी महज 191 रनों पर सिमट गई. हालांकि, इस तबाही के बीच रणजीत सिंहजी (Ranjit Singhji) अकेले चट्टान की तरह डटे रहे और उन्होंने शानदार 100 रन बनाए, चूंकि ससेक्स की टीम बहुत पीछे रह गई थी, इसलिए यॉर्कशायर ने उन्हें फॉलोऑन खेलने के लिए मजबूर किया.

रणजीत सिंह के नाम एक दिन में दो सेंचुरी जड़ने का विश्व कीर्तिमान है.

रणजीत सिंहजी ने गेंदबाजों की धज्जियां उड़ा दीं
यहां से शुरू हुआ असली रोमांच. किसी ने नहीं सोचा था कि इतिहास बनने वाला है. ससेक्स जब दोबारा बल्लेबाजी करने उतरी, तो खेल के उसी तीसरे ही दिन रणजीत सिंहजी ने यॉर्कशायर के गेंदबाजों की फिर से धज्जियां उड़ा दीं. उन्होंने उसी दिन अपनी दूसरी पारी में भी नाबाद 125 रनों की जादुई पारी खेल डाली. एक ही दिन में दो शतक! रणजीत सिंहजी के इस अदम्य साहस की बदौलत ससेक्स ने दूसरी पारी में 2 विकेट पर 260 रन बनाकर मैच को सम्मानजनक रूप से ड्रॉ करा दिया.

करीब तो आए, पर रणजी की बराबरी नहीं कर सके
ऐसा नहीं है कि बाद के वर्षों में बल्लेबाजों ने एक मैच में दो शतक नहीं लगाए, लेकिन ‘एक ही दिन में दो शतक’ लगाने का जादू कोई दोबारा नहीं दोहरा सका. 31 दिसंबर 1995 को विक्टोरिया के लिए खेलते हुए मैथ्यू एलियट ने पहली पारी में 104 और फॉलोऑन के बाद दूसरी पारी में 135 रन बनाए. आंकड़े देखने में रणजी जैसे ही लगते हैं, लेकिन पेंच यह था कि एलियट ने अपनी पहली पारी के 98 रन एक दिन पहले यानी 30 दिसंबर को ही बना लिए थे. इसलिए, तकनीकी रूप से यह रिकॉर्ड रणजीत सिंहजी के समकक्ष नहीं ठहरता.

तारिक अली अवान का टी20 धमाका
4 सितंबर 2012 को स्पेन के बल्लेबाज तारिक अली अवान ने यूरोपियन चैम्पियनशिप (डिवीजन-2) में एक ही दिन में दो शतक (एस्टोनिया के खिलाफ नाबाद 150 और पुर्तगाल के खिलाफ 148 रन) जरूर लगाए. लेकिन, वह टी20 क्रिकेट था और दोनों मैच अलग-अलग टीमों के खिलाफ थे. इसका फर्स्ट क्लास क्रिकेट के पारंपरिक और कठिन रिकॉर्ड से कोई मुकाबला नहीं है.

भारत में जन्मे, लेकिन इंग्लैंड के लिए खेले टेस्ट
गुजरात के काठियावाड़ (जामनगर) के शाही परिवार में जन्मे कुमार श्री रणजीत सिंहजी की किस्मत में कभी भारतीय टीम के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट खेलना नहीं लिखा था, क्योंकि उस दौर में भारत की अपनी कोई आधिकारिक टेस्ट टीम नहीं थी. लेकिन वह इंग्लैंड के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले पहले भारतीय जरूर बने. रणजीत सिंहजी ने साल 1896 से 1902 के बीच इंग्लैंड के लिए कुल 15 टेस्ट मैच खेले. दिलचस्प बात यह है कि ये सभी 15 मैच उन्होंने पारंपरिक प्रतिद्वंदी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले थे. इस दौरान उन्होंने 44.95 की बेहतरीन औसत से 989 टेस्ट रन बनाए, जिसमें दो शानदार शतक शामिल थे. रणजी ने अपना पहला टेस्ट शतक (नाबाद 154 रन) जुलाई 1896 में अपने डेब्यू मैच में ही बनाया था. इसके बाद अगले साल उन्होंने सिडनी के मैदान पर ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों की क्लास लेते हुए 175 रनों की यादगार पारी खेली. उनके खेलने का अनोखा अंदाज और ‘लेग ग्लान्स’ शॉट उस दौर में इंग्लैंड के लोगों के लिए किसी कौतूहल से कम नहीं था.

एक दुर्घटना और ‘रणजी ट्रॉफी’ के रूप में अमरता
रणजीत सिंहजी का जीवन जितना गौरवमयी था, उसका उत्तरार्ध उतना ही कष्टदायी रहा. साल 1915 में एक शिकार के दौरान एक दर्दनाक दुर्घटना घटी, जिसमें उनकी दाईं आंख की रोशनी हमेशा के लिए चली गई. एक महान बल्लेबाज के लिए यह किसी वज्रपात से कम नहीं था. इसके बाद 60 साल की उम्र में, 2 अप्रैल 1933 को जामनगर पैलेस में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया.

भारतीय क्रिकेट का दिल रणजीत सिंहजी के नाम से ही धड़कता है
रणजीत सिंहजी भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन भारतीय क्रिकेट का दिल उनके नाम से ही धड़कता है. भारत का सबसे प्रतिष्ठित और घरेलू क्रिकेट का मुकुट कहा जाने वाला प्रथम श्रेणी टूर्नामेंट ‘रणजी ट्रॉफी’ (Ranji Trophy) उन्हीं की याद और सम्मान में खेला जाता है. रणजी का यह 130 साल पुराना रिकॉर्ड आज के युग के क्रिकेटरों को याद दिलाता है कि जब तकनीक और सुविधाएं नहीं थीं, तब भी भारतीय प्रतिभाएं दुनिया पर राज करना जानती थीं.



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