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दुनिया के वो 5 क्रिकेटर्स… जिन्हें देखकर भारतीय फैंस का खौल उठता है खून, किसी ने गला काटने की दी धमकी तो कोई मेढ़क की तरह उछला

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नई दिल्ली. भारत में क्रिकेट सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि एक जज्बा है जो करोड़ों दिलों को एक साथ धड़काता है. यहां क्रिकेटर्स को भगवान का दर्जा दिया जाता है, और उनकी जीत का जश्न दीवाली की तरह मनाया जाता है. लेकिन जहां इस खेल में बेपनाह मोहब्बत मिलती है, वहीं कुछ ऐसे पल और खिलाड़ी भी रहे हैं जिन्होंने भारतीय प्रशंसकों के दिलों को गहरी ठेस पहुंचाई है. मैदान पर की गई बदतमीजी, हद से ज्यादा आक्रामकता और खेल भावना के विपरीत किए गए बर्ताव के कारण कुछ महान खिलाड़ी भारतीय फैंस की नजरों में विलेन बन गए. अतीत के कुछ कड़वे विवादों और ऐतिहासिक टकरावों को समेटती, यह कहानी है दुनिया के उन 5 दिग्गज क्रिकेटर्स की, जिन्हें भारतीय फैंस आज तक माफ नहीं कर पाए हैं.

रिकी पोंटिंग (Ricky Ponting) को क्रिकेट इतिहास के सबसे सफल कप्तानों और बल्लेबाजों में गिना जाता है. उन्होंने अपनी कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया को दो बार वर्ल्ड कप जिताया और एक कप्तान के रूप में 324 इंटरनेशनल मैचों में से 220 में जीत हासिल की, जो अपने आप में एक अविश्वसनीय रिकॉर्ड है. वनडे क्रिकेट में उनके नाम 13,000 से ज्यादा रन दर्ज हैं. लेकिन इन सुनहरे आंकड़ों के पीछे एक ऐसा आक्रामक और घमंडी रवैया छिपा था, जिसे भारतीय फैंस कभी हजम नहीं कर पाए. मैदान पर पोंटिंग का व्यवहार अक्सर खेल भावना के विपरीत होता था. वह न सिर्फ भारतीय गेंदबाजों पर हावी होने की कोशिश करते थे, बल्कि अंपायरों के फैसलों पर उंगली उठाने और भारतीय खिलाड़ियों से सरेआम पंगा लेने से भी पीछे नहीं हटते थे. मैच जीतने के लिए किसी भी हद तक जाने की उनकी इसी जिद और रूखे व्यवहार के कारण वह भारतीय प्रशंसकों के बीच सबसे नापसंद किए जाने वाले कड़वे प्रतिद्वंदी बन गए.

इन पांच विदेशी खिलाड़ियों के शक्ल तक नहीं देखना चाहते भारतीय क्रिकेट फैंस.

पोंटिंग का भारत विरोधी रवैया और कप्तानी का घमंड
पोंटिंग का भारत के खिलाफ रिकॉर्ड बेहद शानदार रहा, खासकर 2003 के वर्ल्ड कप फाइनल में खेली गई उनकी 140 रनों की नाबाद पारी, जिसने करोड़ों भारतीयों का दिल तोड़ा था. लेकिन फैंस की नफरत रनों की वजह से नहीं, बल्कि उनके बर्ताव की वजह से थी. साल 2006 की चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान जब ऑस्ट्रेलियाई टीम ने खिताब जीता, तो मंच पर पुरस्कार वितरण के दौरान पोंटिंग और उनकी टीम ने तत्कालीन बीसीसीआई अध्यक्ष शरद पवार को मंच से धक्का देकर आगे बढ़ने का इशारा किया था. इस घटना ने पूरे भारत को आक्रोशित कर दिया था. मैदान पर जब भी भारतीय टीम पोंटिंग को स्लेज करती या आउट करती, तो उनका रिएक्शन बेहद आक्रामक और अपमानजनक होता था. इसी ऑन-फील्ड एरोगेंस की वजह से पोंटिंग की महानता भारतीय प्रशंसकों के गुस्से के आगे हमेशा फीकी बनी रही.

मंकीगेट विवाद और स्लेजिंग की सीमाएं
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व ऑलराउंडर एंड्रयू साइमंड्स (Andrew Symonds) अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी और बेहतरीन फील्डिंग के लिए जाने जाते थे. भारत के खिलाफ उनका प्रदर्शन हमेशा दमदार रहा. उन्होंने भारत के खिलाफ वनडे मैचों में 1000 से अधिक रन बनाए और गेंद से भी कई बार मैच का पासा पलटा. साइमंड्स को भारतीय पिचों पर खेलना और भारतीय गेंदबाजों की धुनाई करना बेहद पसंद था. लेकिन इस शानदार खेल के साथ उनकी एक बड़ी कमजोरी थी मैदान पर लगातार स्लेजिंग करना और विरोधी खिलाड़ियों को उकसाना. वह अक्सर भारतीय खिलाड़ियों के सब्र का इम्तिहान लेते थे, जिससे मैदान का माहौल बेहद तनावपूर्ण हो जाता था. उनका यही रवैया एक दिन क्रिकेट इतिहास के सबसे बड़े विवाद की वजह बन गया.

मंकीगेट का वो कड़वा सच जिसने साइमंड्स को विलेन बनाया
साल 2007-08 के ऑस्ट्रेलियाई दौरे के दौरान सिडनी टेस्ट में जो हुआ, उसने भारत और ऑस्ट्रेलिया के क्रिकेट संबंधों को हिलाकर रख दिया था. एंड्रयू साइमंड्स (Andrew Symonds) और भारतीय स्पिनर हरभजन सिंह के बीच मैदान पर तीखी बहस हुई. साइमंड्स ने आरोप लगाया कि हरभजन ने उन्हें ‘मंकी’ (बंदर) कहा, जिसे नस्लीय टिप्पणी माना गया। इस ‘मंकीगेट’ विवाद ने पूरी दुनिया में तूल पकड़ा. हालांकि बाद में जांच में कई बातें सामने आईं, लेकिन इस घटना के बाद भारतीय फैंस के मन में साइमंड्स के लिए नफरत की एक गहरी दीवार खड़ी हो गई. भले ही साइमंड्स अब इस दुनिया में नहीं हैं और बाद में आईपीएल के दौरान उनके और भारतीय खिलाड़ियों के रिश्ते सुधर गए थे, लेकिन इतिहास का वह कड़वा पन्ना आज भी फैंस के जेहन में दर्ज है.

जावेद मियांदाद का हद से ज्यादा आक्रामकता और सचिन पर विवादित बयान
पड़ोसी देश पाकिस्तान के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज जावेद मियांदाद को उनके जुझारू खेल के लिए जाना जाता है. मियांदाद ने भारत के खिलाफ कई यादगार पारियां खेलीं, जिसमें 1986 में शारजाह में चेतन शर्मा की आखिरी गेंद पर लगाया गया वह छक्का भी शामिल है, जिसने पाकिस्तान को जीत दिलाई थी. उन्होंने भारत के खिलाफ टेस्ट और वनडे मैचों में हजारों रन बनाए और हमेशा पाकिस्तानी टीम की रीढ़ बने रहे. लेकिन मियांदाद सिर्फ अपने खेल के लिए नहीं, बल्कि मैदान पर जरूरत से ज्यादा आक्रामकता और भारतीय खिलाड़ियों को मानसिक रूप से परेशान करने की अपनी हरकतों के लिए जाने जाते थे. वह अक्सर भारतीय फील्डर्स और गेंदबाजों पर फब्तियां कसते थे. 1992 के वर्ल्ड कप का वह नजारा कोई नहीं भूल सकता, जब मियांदाद ने भारतीय विकेटकीपर किरण मोरे की अपील से चिढ़कर मैदान पर सरेआम मेंढक की तरह कूदना शुरू कर दिया था. उनकी इस बचकानी और अपमानजनक हरकत ने भारतीय फैंस को बेहद नाराज किया.

एंड्रयू फ्लिंटॉफ का लॉर्ड्स के मैदान पर बदतमीजी की हद पार करना
इंग्लैंड के पूर्व स्टार ऑलराउंडर एंड्रयू फ्लिंटॉफ अपने समय के सबसे खतरनाक क्रिकेटर्स में से एक थे. बल्ले और गेंद दोनों से मैच पलटने की ताकत रखने वाले फ्लिंटॉफ ने भारत के खिलाफ कई बार बेहतरीन प्रदर्शन किया. लेकिन साल 2002 में भारत दौरे पर आई इंग्लैंड की टीम के इस खिलाड़ी ने मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में एक ऐसी हरकत की, जिसने भारतीय फैंस के गुस्से को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया.एक रोमांचक वनडे मैच में भारत को हराने के बाद फ्लिंटॉफ ने अपनी तमीज की सीमाएं लांघते हुए मैदान पर ही अपनी टी-शर्ट उतार दी और हवा में लहराते हुए दौड़ने लगे. भारतीय दर्शकों के सामने किया गया यह प्रदर्शन बेहद अपमानजनक था, जिसका मलाल हर भारतीय फैन को था.

गांगुली का ऐतिहासिक बदला और युवराज के 6 छक्के
फ्लिंटॉफ की उस बदतमीजी का हिसाब भारतीय टीम ने बहुत जल्द और बेहद करारे तरीके से चुकता किया. साल 2002 के लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर जब भारत ने नेटवेस्ट ट्रॉफी के फाइनल में इंग्लैंड को धूल चटाई, तो कप्तान सौरव गांगुली ने लॉर्ड्स की बालकनी में खड़े होकर अपनी टी-शर्ट उतारी और उसे हवा में लहराकर फ्लिंटॉफ को उन्हीं की भाषा में जवाब दिया. बात यहीं खत्म नहीं हुई. 2007 के टी-20 वर्ल्ड कप में फ्लिंटॉफ ने एक बार फिर भारतीय ऑलराउंडर युवराज सिंह को मैदान पर अपशब्द कहे और उन्हें उकसाने की कोशिश की. युवराज का गुस्सा भड़क उठा और उन्होंने इसका खामियाजा इंग्लैंड के गेंदबाज स्टुअर्ट ब्रॉड को भुगतने पर मजबूर किया, जब युवराज ने अगले ही ओवर में छह गेंदों पर छह गगनचुंबी छक्के जड़कर इतिहास रच दिया. फ्लिंटॉफ की इन हरकतों ने उन्हें भारतीय फैंस का परमानेंट विलेन बना दिया.

मुशफिकुर रहीम का नागिन डांस और भारत की हार पर सरेआम जश्न
बांग्लादेश के विकेटकीपर बल्लेबाज मुश्फिकुर रहीम इस सूची में सबसे युवा लेकिन भारतीय फैंस के बीच सबसे ज्यादा नफरत बटोरने वाले खिलाड़ी हैं. रहीम ने साल 2007 के वनडे वर्ल्ड कप में भारत के खिलाफ नाबाद 56 रनों की एक बेहद महत्वपूर्ण पारी खेली थी, जिसने भारतीय टीम को टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता दिखा दिया था.उस हार का जख्म भारतीय फैंस के दिलों में था ही, लेकिन रहीम का ऑन-फील्ड व्यवहार और मैच जीतने के बाद बेहद बचकाना ‘नागिन डांस’ करना भारतीय प्रशंसकों को कभी रास नहीं आया. वह अक्सर मैदान पर खेल भावना को भूलकर अंपायरों से बहस करते और भारतीय खिलाड़ियों के सामने जरूरत से ज्यादा आक्रामकता दिखाते नजर आते थे.



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