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Allahabad High Court News:इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा कि बलिगोनब के बीच लंबे समय तक आपसी सहमति से बना फिजिकल रिलेशन को रेप नहीं कहा जा सकता. इसी टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने याची की सशर्त अग्रिम जमानत दे दी.
इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला
प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि दो बालिगों के बीच सहमति से लंबे समय तक चलने वाला शारीरिक संबंध बलात्कार नहीं कहा जा सकता। हाईकोर्ट ने बलात्कार केस में एक आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका मंजूर करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने आरोपी को सशर्त अग्रिम जमानत देते हुए कहा कि वो पुलिस जांच में सहयोग करेगा।
जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला की सिंगल बेंच ने यह आदेश दिया। आरोपी याचिकाकर्ता ने आजमगढ़ के सिधारी थाने में एफआईआर दर्ज होने के बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी. कोर्ट में याची के वकील ने कहा कि याची को इस मामले में झूठा फंसाया गया है. पीड़ित जो एक विधवा है और उसका 15 साल का बेटा है. उसने BNSS की धारा 173(4) के तहत एक अर्जी के आधार पर याची के खिलाफ झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई है.
सभी तथ्यों और दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद कोर्ट ने माना कि दोनों पक्ष बालिग हैं और उनके बीच लंबे समय से सहमति से शारीरिक संबंध चल रहे थे. कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा, “दो वयस्कों के बीच आपसी सहमति से लंबे समय तक चलने वाले शारीरिक संबंध को बलात्कार नहीं माना जा सकता.” अग्रिम जमानत मंजूर करते हुए कोर्ट ने आरोपी पर शर्त लगाई कि वह पुलिस जांच में पूर्ण सहयोग करेगा.
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अमित तिवारी, News18 Hindi के डिजिटल विंग में प्रिंसिपल कॉरेस्पॉन्डेंट हैं. वर्तमान में अमित उत्तर प्रदेश की राजनीति, सामाजिक मुद्दों, ब्यूरोक्रेसी, क्राइम, ब्रेकिंग न्यूज और रिसर्च बेस्ड कवरेज कर रहे हैं. अख़बार…और पढ़ें


