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Saharanpur clay pot I सहारनपुर के मटकें

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भीषण गर्मी के बीच सहारनपुर के मिट्टी के मटके लोगों को नेचुरल ठंडक दे रहे हैं. खास मिट्टी से बने ये घड़े न सिर्फ पानी को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखते हैं, बल्कि सेहत के लिए भी फायदेमंद माने जाते हैं. यही वजह है कि हरियाणा, पंजाब, दिल्ली समेत कई राज्यों में इनकी मांग तेजी से बढ़ रही है, जिसे पूरा करना कारीगरों के लिए चुनौती बन गया है.

सहारनपुर. गर्मी अपने सितम पर चल रही है और गर्मी से राहत पाने के लिए लोग ठंडी चीजों का सेवन कर रहे हैं. लेकिन सहारनपुर का मिट्टी से बना मटका कई प्रदेशों के घरों में पानी को नेचुरल तरीके से ठंडा कर रहा है. सहारनपुर में मिट्टी से बने मटका का कारोबार कई प्रदेशों तक फैला है. यहां पर बनने वाली मिट्टी के मटके की डिमांड, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल, उत्तराखंड, दिल्ली, राजस्थान तक हैं. गर्मी में डिमांड इतनी बढ़ जाती है कि उसको पूरा नहीं किया जा सकता है. सहारनपुर में विभिन्न स्थानों पर यह मटका खूब बिकता है. इस मटके को कई तरह के आकार दिए गए हैं जिसमें कैंपर का आकार, गोल आकार और उनमें टंकी लगाई गई है. जबकि मिट्टी के मटके से ठंडा हुआ पानी पीने के कई तरह के फायदे हैं. मिट्टी की छिद्रयुक्त प्रकृति के कारण वाष्पीकरण होता है, जिससे पानी स्वाभाविक रूप से ठंडा रहता है.

यह शरीर को अचानक तापमान के झटके से बचाता है, जो अक्सर फ्रिज का बहुत ठंडा पानी पीने से लगता है. मिट्टी के मटके का पानी पीने से एसिडिटी और पेट की समस्या से भी बेहद राहत मिलती है. हमारे बड़े बुजुर्ग पहले फ्रिज नहीं होने पर इन्हीं मट्टी के मटके से पानी को ठंड कर इस्तेमाल किया करते थे, लेकिन आज भी इस मटके का क्रेज कम नहीं हुआ और आज भी लोग गर्मी के मौसम में इस मटके को ढूंढने के लिए सहारनपुर की ओर रुख करते हैं. यही कारण है कि सहारनपुर में तैयार होने वाले इन मटको की डिमांड गर्मी में इतनी बढ़ जाती है कि उसको पूरा नहीं किया जा सकता. जबकि मटके बेचने वाले लोगों का कहना है कि गर्मी के सीजन के लिए 6 महीने पहले ही इन मटको को बनाना शुरू कर दिया जाता है. सहारनपुर का मटका इसलिए भी खास हो जाता है क्योंकि सहारनपुर की मिट्टी बेहद ही खुशबूदार और चिकनी होती है.

शुरू से ही घर में हो रहा मिट्टी के घड़ों का पानी में इस्तेमाल
जबकि मटका खरीदने आए सन्नी ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि मिट्टी का घड़ा शुरू से ही इस्तेमाल कर रहे हैं और प्रत्येक वर्ष यहीं से ही मिट्टी का घड़ा खरीद कर लेकर जाते हैं. हमसे पहले हमारे बाबा जी भी यही से मिट्टी का घड़ा लेकर जाते थे. ऐसा नहीं है कि घर में फ्रिज नहीं है घर में फ्रिज है लेकिन गर्मियों में हमेशा से हमने मटके का ही पानी पिया है, जबकि फ्रिज के पानी का वह टेस्ट नहीं आता जो की मटके के पानी का आता है और यह नुकसान भी नहीं देता. मटके के पानी के बहुत फायदे हमारे बड़े हमको बता कर के गए और उसी नीति पर आज हम भी चल रहे हैं. जबकि मिट्टी के मटके में फ्रिज से भी ज्यादा ठंडा पानी हो जाता है और हम लोगों को शुरू से ही मिट्टी के मटके के पानी की आदत हो रखी है. जबकि एक घड़े की कीमत मात्र ₹300 है. हमारे घर में सभी परिवार में मिट्टी के घड़े का इस्तेमाल होता है जबकि हम लोग अन्य लोगों को भी मिट्टी के घड़े का इस्तेमाल करने की ही सलाह देते हैं.

गर्मियों के लिए मटके की डिमांड के सर्दियों में ही आने लगते हैं ऑर्डर
मटका बेचने और बनाने वाले प्रदीप कुमार प्रजापति ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि गर्मियों में इसकी डिमांड बहुत ज्यादा हो जाती है. सर्दियों में इसका ऑर्डर आना शुरू हो जाता है और गर्मियों में हम लोग इसकी सप्लाई भी करते हैं. जबकि गर्मियों में इसकी इतनी डिमांड रहती है कि 2 से 3 गाड़ियां यानी की महीने में डेढ़ से 2000 मिट्टी के घड़े आसानी से बिक जाते हैं. जबकि मिट्टी जब किसी भी बर्तन में आप अपनी रखकर इस्तेमाल करते हैं वह फायदा ही देता है और डॉक्टर लोग भी इस तरह के पानी को पीने की सलाह देते हैं. इस काम को करते हुए मुझको 18 साल हो चुके हैं जबकि हमारे बड़े बुजुर्ग भी इसी काम को करते चले आ रहे हैं. यह हाईवे हरियाणा, पंजाब और जम्मू तक जाता है और अन्य प्रदेश में जाने वाले लोग हम लोगों से मिट्टी के इस घड़े को खरीद कर लेकर जाते हैं.

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Monali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें



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