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Jaipur Street Food: जयपुर अपनी शाही विरासत और महलों के लिए ही नहीं, बल्कि अपने अनोखे स्ट्रीट फूड कल्चर के लिए भी पूरी दुनिया में मशहूर है. गुलाबी नगरी में खाने के कुछ ऐसे ठिकाने हैं, जिन्होंने न केवल अपने स्वाद से बल्कि अपने ‘अजब-गजब’ नामों से लोगों का ध्यान खींचा है. ‘ठग्गू के समोसे’ से लेकर ‘दोस्त-दुश्मन कचौरी वाला’ और ‘अचानक लस्सीवाला’ जैसे नाम किसी को भी सोचने पर मजबूर कर सकते हैं. यह जयपुर की अनूठी मार्केटिंग शैली है, जहां दुकानदार अपने हुनर को एक मजेदार नाम देते हैं. हालांकि, ये नाम सिर्फ ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए नहीं हैं; इनके पीछे का स्वाद दशकों पुरानी परंपरा और क्वालिटी पर टिका है. इन अजीब नामों के पीछे छिपी हुई सादगी और स्वाद का जादू ही है जो पर्यटकों और स्थानीय लोगों को बार-बार यहां खींच लाता है.
जयपुर में लोग सबसे ज्यादा नाश्ते के रूप में सुबह-शाम कचौरी, समोसे, मिर्ची बड़ा इस प्रकार के फूड को हर मौसम पंसद करते हैं. खासतौर पर समोसे जिसके स्वाद को लोग सबसे ज्यादा पंसद करते हैं, ऐसे ही जयपुर के तीन युवा दोस्तों ने स्टार्टअप के रूप में ठग्गू समोसे की शुरुआत की जो आज ब्रांड बन गया हैं, ठग्गू समोसे पर एक नहीं दो नहीं बल्कि 14 प्रकार के समोसे का स्वाद लोगों को मिलता हैं. इसलिए लोग सबसे ज्यादा ठग्गू के समोसे और इसके यूनिक नाम को पंसद करते हैं.

जयपुर अपने स्वादिष्ट जायके के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं जहां की छोटी-छोटी गलियों से लेकर बड़ी-बड़ी दुकानों तक लोगों को वर्षों पुराने जायके का स्वाद मिलता हैं. स्वाद के साथ ही जयपुर में फूड ब्रांड अपने अजब-गजब नाम के लिए भी खूब फेमस हैं, जैसे ठग्गू के समोसे, अचानक लस्सीवाला, दोस्त करौरी वाल, दुश्मन कचौरी वाला, लोटा राम समोसा, चाय की दुकान जैसे फेमस नाम हैं नाम के साथ की कुछ ऐसे फूड्स की चैन भी हैं, जो एक ही नाम से जयपुर के अलग-अलग इलाकों में प्रसिद्ध हैं, जैसै शंकर नमकीन और समोसा जहां स्वाद के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी रहती हैं. इन सभी फेमस दुकानें के स्वाद और नाम की कहानियां बेहद रौचक है.

दुश्मन कचौड़ी वाला’ और उसी के पास ‘दोस्त कचौड़ी वाला’ की कहानी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है, क्योंकि दुश्मन कचौरी वाला की लोकप्रियता को देखकर दोस्त कचौरी वाला नाम उभरकर सामने आया, दुकान के ऑनर का कहना हैं कि जहां दुश्मनी हो, वहां दोस्ती भी पनपती है. ऐसे ही हमने ‘दुश्मन’ दुकान के ठीक पास दोस्त की दुकान का नाम पहले कुछ ओर हुआ करता था लेकिन लेकिन जब बगल में ‘दुश्मन’ नाम की दुकान आई, तो लगा… जब ये दुश्मनी फैला सकता है, तो हम दोस्ती क्यों नहीं, बस इसी सोच के साथ उन्होंने अपनी दुकान का नाम दोस्त कचौरी वाला रख दिया. अब दोनों ही दुकानें अपने बेहतरीन स्वाद और नाम के लिए जयपुर में फेमस हैं.
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जयपुर में चाय के स्वाद की खूब फेमस दुकानें हैं जिनमें गुलाब जी की चाय, साहू की चाय लेकर कुछ ऐसे खास रेस्तरां और केफै हैं जो अपने नाम और चाय के अलग-अलग फ्लेवर के लिए प्रसिद्ध हैं. ऐसे ही जयपुर के JLN मार्गं पर स्थित टी-पोस्ट कैफे जो अपनी 16 प्रकार की खास चाय के लिए सबसे मशहूर हैं, जहां सुबह शाम चाय के शोकिन लोगों की जमकर भीड़ उमड़ती हैं. टी पोस्ट कैफे को लोग ‘अपनी चाय की दुकान’ के नाम से भी जानते हैं, जिसकी शुरुआत अहमदाबाद के दर्शन दर्शानी और समीर दर्शानी ने एक स्टार्टअप के रूप में कि थी,टी पोस्ट कैफे का पहला आउटलेट गुजरात के राजकोट से शुरू किया था और अब देशभर में टी पोस्ट कैफे के 270 आउटलेट्स हैं, जिसमें जयपुर में खासतौर पर 2 आउटलेट्स हैं, जहां लोग 16 प्रकार की चाय स्वाद लेने दूर-दूर से पहुंचते हैं.

जयपुर के रामगढ़ मोड़ पर ही दोस्त कचौरी वाला और दुश्मन कचौरी वाला के पास ही स्थित अचानक लस्सीवाला भी अपनी लस्सी के बेहतरीन स्वाद और नाम के लिए खूब फेमस हैं. अचानक लस्सीवाला वाले के नाम और लस्सी के स्वाद की कहानी बेहद खास हैं, क्योंकि अचानक लस्सीवाला को दो बुजुर्ग दंपति चलाते हैं जिनका कहना हैं कि पिछले 40 सालों से चारदीवारी बाजार में एक लस्सी की दुकान पर नौकरी करते थे, वहीं काम करते समय उन्होंने लोगों के मुंह से सुना और उन्हें इस नाम का आइडिया आया हैं और कुछ सालों बाद उन्होंने यहां अचानक लस्सी वाला के नाम से किराए पर दुकान शुरू की जिसके बाद इस यूनिक नाम को सड़क से चलते-फिरते ही पढ़कर लोग यहां लस्सी का स्वाद लेने के लिए पहुंच जाते हैं, अचानक लस्सीवाला वाला की इस दुकान पर मावा मलाई लस्सी बनती हैं जिससे लोग खूब पंसद करते हैं.

ठग्गू के समोसे का स्वाद और नाम दोनों ही लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हैं, ठग्गू समोसा की शुरुआत 2015 में जयपुर के तीन दोस्त मुकेश गोल्या, पावस नागपाल और विकी ने की थी, तीनों दोस्तों ने MBA किया और फिर लाखों की पैकेज की नौकरी छोड़कर उन्होंने ठग्गू समोसे के स्टार्टअप की शुरुआत की जिसमें उन्होंने राजस्थानी समोसे में चाइनीज, इटैलियन और मैक्सिकन टेस्ट का जायका लोगों के लिए तैयार किया जिसे लोगों ने खूब पंसद किया और ऐसे ही ठग्गू के समोसे फेमस हो गए. अलग-अलग समोसे का स्वाद और यूनिक नाम ही आज जयपुर में ठग्गू समोसा की खास पहचान हैं.

समोसे-कचौरी के स्वाद को लिए जयपुर में हजारों दुकानें हैं, लेकिन कुछ खास ऐसी दुकानें हैं. जिनका नाम सुनकर ही लोग चौंक जाते हैं ऐसे ही जयपुर के जलमहल के पास स्थित रामगढ़ चौराहा जहां स्थित दोस्त कचौरी वाला और दुश्मन कचौरी वाला के नाम से दो अलग-अलग दुकानें जो अपने स्वाद और नाम दोनों के लिए ख़ूब फेमस हैं. लोग इनके कचौरी समोसे से ज्यादा इनके जबरदस्त नाम को सबसे ज्यादा पंसद करते हैं. चलते सड़क पर लोग यहां दो दुकानों के नामों को देखकर लोग पहले चौंकते हैं, फिर मुस्कुराते हैं और आखिर में गरमा-गरम कचौड़ी समोसे का स्वाद लेने पहुंच जाते हैं. दुश्मन कचौरी वाला नाम की इस दुकान के यूनिक नाम के किस्से की कहानी भी बेहद रौचक हैं. इस दुकान पर वर्षों पहले एक चाय की टपरी हुआ करती थी. बाद में दुकान के ऑनर ने यहां कचौरी समोसे का जायका शुरू किया और जब नाम रखने का आइडिया बॉलीवुड के मशहूर गाने “दुश्मन ना करे दोस्त ने वो काम किया है. इसी गाने से दुकान का नाम तय हो गया और फिर’दुश्मन कचौड़ी वाला’ के नाम से फेमस हो गई.

जयपुर में समोसे की सैकड़ों दुकानें हैं. जिनमें खूंटेटा का समोसा, संपत का समोसा, सम्राट का समोसा, रावत का समोसा, ब्रजवासी का समोसे, ठग्गू का समोसे, शंकर समोसा जहां समोसे का स्वाद लेने के लिए सुबह से शाम तक लोगों की भीड़ उमड़ी रहती हैं, लेकिन कुछ दुकानें ऐसी है जो अपने लोकल नाम और लोकल स्वाद के लिए प्रसिद्ध हैं. ऐसे ही जयपुर में कचौरी मसोसा के स्वाद के साथ ही अपने यूनिक नाम की दुकानों के चलते वह खूब फेमस हैं. जयपुर की विधानसभा के पास स्थित ऐसे ही लोटाराम का समोसा जो अपने बेहतरीन समोसे, कचौरी, मिर्च बड़ा, ब्रेड पकोड़ा और लस्सी के लिए जयपुर में खूब फेमस हैं. स्वाद के साथ ही लोगों को लोटाराम का नाम भी खूब पंसद आता हैं, इसलिए यहां लोगों की सुबह से शाम तक कचौरी समोसे का स्वाद लेने के लिए भीड़ लगी रहती हैं. मसोसा कचौरी की हर दुकान अपने खास स्वाद के लिए फेमस हैं ऐसे ही लोटाराम भी अपने खास समोसे के लिए सबसे ज्यादा प्रसिद्ध हैं जिसका स्वाद सबसे लाजवाब रहता हैं.


