2 C
Munich

न्याय में देरी के लिए कौन जिम्मेदार? ‘जजों पर पेंडिंग केस का ठीकरा फोड़ना गलत, हर दिन सुने जाते हैं 500 केस’

Must read


होमताजा खबरदेश

न्याय में देरी के लिए कौन जिम्मेदार? ‘जजों पर पेंडिंग केस का ठीकरा फोड़ना गलत’

Last Updated:

जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने कहा कि जज पहले से ही हर दिन बहुत भारी संख्या में केस सुनते हैं. निचली अदालत में हर जज के पास रोज 400 से 500 केस की भारी लिस्ट होती है. हाईकोर्ट में तो पेंडिंग केस की यह भारी संख्या और भी ज्यादा है. जजों के लिए तय घंटों तक अपनी अदालत में बैठना बहुत ज्यादा अनिवार्य है. जज अपने सामने लगे सभी मामलों की सुनवाई करने के लिए पूरी तरह बंधे हैं.

ख़बरें फटाफट

Zoom

जस्टिस अमानुल्लाह ने कहा कि मामलों के लंबित रहने के लिए केवल जज को दोष देना गलत. (एएनआई)

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने शनिवार को कहा कि भारत में लंबित मामलों की बढ़ती संख्या के लिए केवल न्यायाधीशों को ही जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है. उन्होंने कहा कि न्याय में देरी अक्सर वकीलों की बहस और कानूनी प्रक्रिया के तरीके से प्रभावित होती है. जस्टिस अमानुल्लाह ने कहा, “न्यायाधीश और मामले के निपटारे की दर के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है. यह वकीलों पर निर्भर करता है कि वे कितनी देर तक बहस करना चाहते हैं.”

उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था में देरी के लिए वकीलों और कानूनी पेशे से जुड़े लोगों को भी आत्ममंथन करना चाहिए. उन्होंने कहा कि लंबी-लंबी बहसें करना और बार-बार तारीख लेना जैसी आदतें मामलों के निपटारे में देरी का कारण बनती हैं, इसलिए इन पर विचार कर सुधार करना जरूरी है. ‘वैश्वीकरण के युग में मध्यस्थता’ विषय पर आईसीए के पांचवें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में जस्टिस अमानुल्लाह ने कहा कि न्यायाधीश पहले से ही प्रतिदिन बहुत बड़ी संख्या में मामलों की सुनवाई करते हैं.

उन्होंने कहा, “निचली अदालत के स्तर पर, किसी भी न्यायाधीश के पास प्रतिदिन 400-500 से कम मामलों की सूची नहीं होती है. उच्च न्यायालयों में यह संख्या और भी अधिक है.” उन्होंने कहा कि हालांकि न्यायाधीशों को तय घंटों के लिए अदालत में बैठना और उनके सामने सूचीबद्ध मामलों की सुनवाई करना अनिवार्य है, लेकिन वे वकीलों द्वारा की गई बहस के समय को हमेशा कम नहीं कर सकते. जस्टिस अमानुल्लाह ने कहा कि हालांकि न्यायाधीश कभी-कभी वकीलों को अपनी दलीलों को दोहराने से रोक सकते हैं, लेकिन वे उन्हें अपना मामला पूरी तरह से प्रस्तुत करने की अनुमति देने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

About the Author

authorimg

Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें



Source link

- Advertisement -spot_img

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img

Latest article