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चीफ जस्टिस की बेंच ने याचिका की सरेआम धज्जियां उड़ा दीं. कोर्ट ने इसे सिर्फ अखबार की न्यूज पर आधारित एक ‘पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन’ करार दिया. शुरुआत में 50 हजार का जुर्माना लगा था जिसे बाद में बढ़ाकर 1 लाख कर दिया गया. इस फैसले से फर्जी पीआईएल दाखिल करने वालों में भारी हड़कंप मच गया है.
कर्नाटक हाईकोर्ट ने हिंदी भाषा से जुड़ी याचिका खारिज कर दी. (फाइल फोटो)
बेंगलुरु. कर्नाटक हाईकोर्ट की बेंच ने राज्य सरकार और हिंदी बहिष्कार विवाद से जुड़ी जनहित याचिका को खारिज कर दिया है. साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ताओं पर 1 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है. यह पीआईएल कर्नाटक शिक्षा मंत्री मधु बंगारप्पा के उस बयान के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें कहा गया था कि कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा के विषयों के अंक मूल्यांकन में नहीं जोड़े जाएंगे, जिसमें हिंदी भी शामिल है.
यह याचिका बेंगलुरु के रहने वाले एच.एन. चंदना और एस. वेंकटेश ने दायर की थी. याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार का यह अचानक लिया गया फैसला कर्नाटक के लाखों छात्रों के बीच अनिश्चितता पैदा कर रहा है. यह निर्णय संविधान तहत दिए गए समानता और शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन करता है. याचिकाकर्ता चंदना की ओर से पेश वकील ने अदालत में दलील दी कि शिक्षा मंत्री के बयान से यह संकेत मिला कि हिंदी को हटाया जा रहा है, जो सही नहीं हो सकता.
मुख्य न्यायाधीश विभु बखरू की अध्यक्षता वाली बेंच ने याचिका की आलोचना करते हुए कहा कि यह मामला किसी स्पष्ट सरकारी आदेश पर नहीं, बल्कि विवादित मुद्दों और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह मामला केवल एक अखबार में छपी कुछ पंक्तियों के आधार पर दायर किया गया है, न कि किसी आधिकारिक घोषणा पर. अदालत ने कहा कि वास्तव में ऐसा कोई आदेश नहीं है जिसमें हिंदी को हटाने की बात कही गई हो. कोर्ट ने इस याचिका को ‘पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन’ बताया, न कि वास्तविक जनहित याचिका. शुरुआत में अदालत ने याचिकाकर्ता पर 50,000 रुपए का जुर्माना लगाया था, लेकिन बाद में दलीलें सुनने के बाद बेंच ने इसे बढ़ाकर 1 लाख रुपए कर दिया.
हालांकि कन्नड़ समर्थक संगठनों ने एसएसएलसी परीक्षा में तीसरी भाषा के लिए अंकों की जगह ग्रेड देने के फैसले का स्वागत किया, लेकिन इसका कुछ राजनीतिक दलों, जिनमें भाजपा के कुछ नेता भी शामिल हैं, ने विरोध किया. इस विवाद के बीच राज्यपाल थावर चंद गहलोत ने हस्तक्षेप करते हुए मुख्य सचिव शालिनी रजनीश को पत्र लिखकर सरकार से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा. वहीं, कर्नाटक विधान परिषद के सभापति बसवराज होरट्टी ने भी हिंदी के महत्व को रेखांकित करते हुए सरकार को पत्र लिखा है.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें


