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Munger false POCSO case: बिहार के मुंगेर से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने न केवल न्यायिक प्रक्रिया, बल्कि संवेदनशील कानूनों के इस्तेमाल पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. बालिग होते ही एक युवती ने दावा किया है कि उसे नाबालिग रहते हुए झूठे पॉक्सो केस में ‘पीड़िता’ बनाया गया और अब वह राष्ट्रपति तक गुहार लगाकर सच्चाई सामने लाना चाहती है.
मुंगेर में पॉक्सो के दुरुपयोग का सनसनीखेज मामला, युवती ने पुलिस पर अवैध हिरासत और झूठा बयान दिलाने का आरोप
मुंगेर. बालिग होते ही मुंगेर की एक युवती ने खुद को झूठे पॉक्सो केस में फंसाने का सनसनीखेज आरोप लगाते हुए सीधे राष्ट्रपति से न्याय की गुहार लगाई है. धरहरा थाना क्षेत्र की युवती मौसमी सिंह ने राष्ट्रपति, राज्यपाल और पटना हाईकोर्ट को पत्र लिखकर दावा किया है कि जब वह नाबालिग थी तो उसे साजिश के तहत ‘कथित पीड़िता’ बनाया गया, जबकि उसके साथ कोई घटना हुई ही नहीं थी. युवती ने इस पूरे खेल के पीछे अपने ही परिवार और कुछ करीबी लोगों की भूमिका बताते हुए कहा है कि यह सब सिर्फ सरकार से मिलने वाले 4 लाख रुपये के मुआवजे के लिए किया गया.
मुआवजे के लिए परिवार पर साजिश का आरोप
मौसमी कुमारी उर्फ मौसमी सिंह ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि उसके माता-पिता और कुछ करीबियों ने मिलकर उसे एक ‘मोहरा’ बनाते हुए झूठा केस रचा. उसका कहना है कि इस साजिश का मकसद सरकार से मिलने वाले 4 लाख रुपये मुआवजा प्राप्त करना था. युवती ने इस रकम को ‘खून का पैसा’ बताते हुए इसे सरकार को लौटाने की इच्छा जताई है.
उम्रकैद काट रहा आरोपी निर्दोष, दबाव में दी थी झूठी गवाही
बता दें कि इस केस में आरोपी बनाए गए रवि कुमार को अदालत द्वारा उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है. हालांकि युवती का कहना है कि वह पूरी तरह निर्दोष है. उसके मुताबिक, नाबालिग होने के दौरान उसने पुलिस के दबाव और परिवार के डर से अदालत में झूठी गवाही दी थी. अब बालिग होने के बाद वह सच सामने लाना चाहती है ताकि निर्दोष व्यक्ति को न्याय मिल सके.
पुलिस पर अवैध हिरासत और प्रताड़ना के गंभीर आरोप
मौसमी सिंह ने धरहरा और जमालपुर थाने के तत्कालीन पुलिस अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं. उसका कहना है कि उसे करीब 30 घंटे तक अवैध हिरासत में रखकर मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया और डराकर सीआरपीसी 164 के तहत झूठा बयान दिलवाया गया. युवती ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए SIT गठन की मांग की है. साथ ही 7 सितंबर 2022 के जमालपुर थाना के सीसीटीवी फुटेज की जांच कराने की बात कही है, ताकि सच्चाई सामने आ सके.
गलत चार्जशीट पर कार्रवाई की मांग, मुआवजा लौटाने को तैयार
युवती ने गलत चार्जशीट दाखिल करने वाले और जांच में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग भी की है. उसने सरकार से अपने परिवार को मिले 4 लाख रुपये लौटाने और निर्दोष व्यक्ति को रिहा करने की अपील की है. अपने पत्र में उसने बताया कि 1 अप्रैल 2026 को बालिग होने के बाद उसने यह कदम उठाया, ताकि वह बिना दबाव अपनी बात रख सके. फिलहाल यह मामला पटना हाईकोर्ट में विचाराधीन है.
संवेदनशील कानून के दुरुपयोग पर सवाल
बहरहाल, यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की आजादी का नहीं, बल्कि कानून के दुरुपयोग की गंभीर आशंका को भी उजागर करता है. अब देखने वाली बात होगी कि इस पूरे प्रकरण पर राष्ट्रपति भवन और राजभवन क्या संज्ञान लेते हैं और जांच में क्या सच्चाई सामने आती है.
वकील ने क्या कहा?
इस मामले में मुंगेर सिविल कोर्ट के अधिवक्ता ओम प्रकाश ने बताया कि पीड़िता के द्वारा जिला स्तर सहित राष्ट्रपति, राज्यपाल, पटना हाईकोर्ट और पुलिस मुख्यालय तक पत्र भेजा गया है, जिसमें घटना से जुड़ी सभी बातों का उल्लेख है. पत्र में यह भी लिखा है कि जिस लड़के को इस पूरे प्रकरण में फंसाया गया, उसे वह जानती तक नहीं है और वह निर्दोष है, जिसे न्याय मिलना चाहिए.
राष्ट्रपति और राज्यपाल से न्याय की उम्मीद
ओम प्रकाश ने कहा कि युवती सरकार से मिले 4 लाख रुपये मुआवजा भी वापस करना चाहती है. उनके अनुसार यह मामला दर्शाता है कि पॉक्सो एक्ट का किस प्रकार दुरुपयोग हो सकता है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति और राज्यपाल के हाथ में है कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है. इस केस की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और हकीकत क्या है, यह सबके सामने आना चाहिए.
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