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बहराइच जिले के तुरेनी रज्जब गांव के किसान राणा चेतन सिंह ने वर्मी कम्पोस्ट बनाकर एक सफल मॉडल तैयार किया है. कभी खुद खाद के लिए भटकने वाले चेतन सिंह आज 45–60 दिनों में वर्मी कम्पोस्ट तैयार कर बहराइच समेत आसपास जिलों में सप्लाई कर रहे हैं. नर्सरी और गार्डनिंग में बढ़ती मांग के चलते यह कम लागत वाला जैविक खाद किसानों के लिए आय का अच्छा साधन बन रहा है.
बहराइच. खेती में बदलते वक्त के साथ-साथ वर्मी कंपोस्ट खाद ने एक अच्छी जगह बना ली है, जिससे पौधों की नर्सरी से लगाकर किचन गार्डन करने वाले आदि खेती के कामों में इस्तेमाल में लाया जाता है. बहुत सारी ऑनलाइन कंपनियां ऐसी है जो वर्मी कंपोस्ट खाद की बिक्री भी करती हैं. बहराइच जिले के रहने वाले एक किसान एक वक्त में जो खुद वर्मी कंपोस्ट खाद के लिए भटकते थे, फिर उन्होंने खुद वर्मी कंपोस्ट बनाने का काम शुरू कर दिया. अब बहराइच जिले समेत आसपास जिले में भी इसकी खूब मांग है.
वर्मी कंपोस्ट खाद बनाने वाले बहराइच जिले के तुरेनी रज्जब गांव में रहने वाले राणा चेतन सिंह वर्मी कम्पोस्ट बनाने को लेकर बताते हैं.
वर्मी कम्पोस्ट बनाना कोई जटिल प्रक्रिया नहीं है, इसके लिए किसानों के पास या जो वर्मी कम्पोस्ट बनाना चाहते हैं उनके पास गाय का गोबर होना चाहिए और फिर इसको इकट्ठा करके एक जगह दो से तीन दिन के लिए रख देना चाहिए. इन दो से तीन दिनों में ठंडा पानी ऊपर से डालना चाहिए जिससे गोबर में मौजूद मीथेन गैस और हीटिंग निकल जाए. इसके बाद इसका बेड बनाकर इसमें केंचुआ डाल दिए जाते हैं, जिससे केंचुआ मरते नहीं है और वह अच्छे से वर्मी कम्पोस्ट बनाकर तैयार कर देते हैं. जिसकी बनाने की प्रक्रिया में 45 से 60 दिन लगते हैं, इसके बाद पैकिंग कर बिक्री की जाती है.
बहराइच के किसान की वर्मी कम्पोस्ट खाद की अन्य जिलों में भी
बहराइच जिले में खास खाद को बनाने वाले इसके बारे में बताते हैं की इसकी डिमांड ज्यादातर नर्सरी पर पौधों को लगाने के लिए की जाती है. इसके अलावा गार्डनिंग में भी इसका उपयोग खूब किया जाता है, वर्मी कम्पोस्ट खाद बनाने के बाद इसमें एक प्रक्रिया और ऐड करते हैं वह प्रोसेस होता है जिसमे बड़े जाल के झंने में डालकर बारीक छनाई किया जाता है, जिससे नर्सरी करते समय ट्रे में आसानी से बीजों की बुवाई की जा सके और देखने में भी खूबसूरत लगे. इस तरह से वर्मी कम्पोस्ट बनाकर बड़ी आसानी से तैयार हो जाती है.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें


