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ईरान को पूरी तरह मिटाना अमेरिका के लिए दूर की कौड़ी साबित हुआ. खाड़ी देशो में अमेरिका की पावर कम हुई है. कोई भी देश अब अमेरिका पर भरोसा नहीं कर रहा है. सऊदी अरब और पाकिस्तान का गठजोड़ भारत के लिए खतरनाक है. इस भारी मोर्चे को काटने के लिए भारत को बड़े दोस्त चाहिए. यूएई ऐसे में भारत के लिए विकल्प बन गया है.
अबू धाबी में संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद के साथ पीएम मोदी.
अमेरिका, इजरायल के साथ ईरान के बीच तनाव शुरू हो चुका था और इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 25-26 फरवरी 2026 को इजरायल दौरा होता है. ये कोई साधारण दौरा नहीं था क्योंकि इसके कई मायने निकाले जा सकते लेकिन पीएम मोदी इस तरह के रिस्क लेने से कभी पीछे नहीं हटते, वो भी तब जब मामला भारत के हितों से जुड़ा हो. पीएम मोदी इधर भारत आते हैं और इसके 48 घंटे के अंदर यानी 28 फरवरी 2026 को इजरायल और अमेरिका ईरान पर जोरदार हमला कर देते हैं. इसके बाद पश्चिम एशिया में तनाव को वो दौर शुरू होता है जिसका स्थायी समाधान फिलहाल तो नहीं दिखता है. बेशक युद्ध रुक भी जाए, लेकिन पश्चिम एशिया की ये आग अंदर ही अंदर जलता रहेगा और इसकी तपिश से पूरी दुनिया में फैलती रहेगी.
इस युद्ध से एक बात तो साफ हो गया कि ईरान को पूरी तरह मिटाना अमेरिका-इजरायल के लिए दूर की कौड़ी साबित हुई और साथ ही कई खाड़ी देशों में अमेरिका की जो सुरक्षा की छतरी थी उसमें कई छेद हो चुके हैं. मतलब साफ है कि इन देशों की सुरक्षा की गारंटी अब अमेरिका भी नहीं दे सकता… जाहिर तौर पर खाड़ी के ज्यादातर देश और खासकर संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई, सऊदी अरब जैसे अमीर देशों के लिए लिए सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है. हालांकि, सऊदी अरब पहले से ही अमेरिका के साथ रहा है और अब वो पाकिस्तान के करीब भी चला गया. ये ऐसा समीकरण है जो आने वाले समय में भारत के लिए मुसीबत का सबब बन सकता है. यानी खाड़ी में भारत को एक ऐसा सहयोगी चाहिए जो अमेरिका, सऊदी और पाकिस्तान के मोर्चे का काट के तौर पर काम आए. इस काम के लिए यूएई से बेहतर विकल्प भारत के लिए हो नहीं सकता.
यूएई के साथ इजरायल के भी करीब आया भारत
यूएई वो देश है जो इस युद्ध में ईरान के सबसे ज्यादा निशाने पर रहा. दुबई जैसे दुनिया के सबसे सुरक्षित शहर में भी इतने हमले हुए कि इससे यूएई हिल गया. यूएई का सऊदी से पहले ही तनाव चल रहा है, ऐसे में असुरक्षा की भावना यूएई में आ गई. इजरायल भी दूर से ये सब देख रहा था और यूएई को सुरक्षा देने के लिए आगे आया. उधर, भारत के साथ यूएई के संबंध पहले से बेहतर रहे हैं. तो देखते ही देखते यूएई भारत के साथ इजरायल के भी काफी करीब आ गया. ये समीकरण भारत के लिए सोने पे सुहागा की तरह है.
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से पूरी दुनिया ऊर्जा संकट से जूझ रहा है. भारत जो अपनी जरूरत के करीब 90 फीसदी पेट्रोलियम आयात करता है. ऐसे में यूएई से संबंध प्रगाढ़ होने का दूरगामी फायदा तो होगा ही. इस बीच यूएई ओपेक (OPEC) जो पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन है, से बाहर हो जाता है. ओपेक दुनिया का सबसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों का संगठन है जो वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों और आपूर्ति को नियंत्रित करता है.
भारत-यूएई का रिश्ता नई ऊंचाइयों पर
यूएई का ये फैसला भी भारत के लिए फायदेमंद रहा क्योंकि अब यूएई अपने पेट्रोलियम उत्पादों को अपने हिसाब से बेचने के लिए आजाद है. यानी भारत के ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा अब यूएई से मिल सकता है. यूएई भी खाने पीने के सामान के अलावा भारत से रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद भारत से आयात करता है. हाल के दिनों में भारत के साथ परमाणु समझौता किया जिससे वो अपने बिजली उत्पादन की क्षमता बढ़ाएगा. यूएई के साथ संबंधों में नया आयाम देने के लिए तनाव के बीच ही पीएम मोदी यूएई का दौरा करके पूरी दुनिया को बता दिया कि भारत अपने हिसाब से आगे बढ़ेगा. इजरायल और यूएई के बीच अब्राहम समझौते के बाद क्षेत्रीय राजनीति में जो नई संभावनाएं बनी हैं उससे भारत एक नया आकार दे सकता है.
पश्चिम एशिया में बढ़ रही भारत की भूमिका
भारत-इजरायल-यूएई के बीच बनते इस मजबूत गठजोड़ को अमेरिका-सऊदी अरब-पाकिस्तान के मजबूत समीकरण के संतुलन के तौर पर देखा जा रहा है. दशकों से पश्चिम एशिया में शक्ति का केंद्र तेल, सुरक्षा और अमेरिकी सैन्य प्रभाव के इर्द-गिर्द घूमता रहा लेकिन अब बदलते हालात में भरोसेमंद साझेदारियां नई प्राथमिकताएं बन चुकी हैं. इसी की नई कड़ी है भारत-इजरायल-यूएई की साझेदारी, जिसका असर वैश्विक समीकरण पर पड़ना लाजिमी है. पीएम मोदी की विदेश नीति ने से भारत पश्चिम एशिया में एक भरोसेमंद और संतुलित शक्ति के रूप में देखा जा रहा है. ऐसा हो भी क्यों ना भारत एक ही समय में ईरान-यूएई, इजरायल-ईरान के बीच चल रही कट्टर दुश्मनी के बीच इन सबके लिए भरोसे का साथी है और यही बात भारत को दुनिया के किसी भी देश से अलग दिखाती है.
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लेखक नेटवर्क 18 समूह में एक्ज़ीक्यूटिव एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट मास कम्युनिकेशन. स्टार न्यूज़, आजतक, ज़ी न्यूज़, रिपब्लिक भारत में डेढ़ दशक से ज़्यादा का अनुभव. भारतीय राजनीति …और पढ़ें


