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यूपी में टलेगा पंचायत चुनाव! बढ़ेगा ग्राम प्रधानों, जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल, शासन को भेजा गया प्रस्ताव

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UP Panchayat Chunav: यूपी में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों का टालना तय माना जा रहा है. मौजूदा ग्राम प्रधानों, ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल 26 मई को पूरा हो रहा है. लेकिन ओबीसी आरक्षण को लेकर पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन नहीं हो सका है. लिहाजा, पंचती राज विभाग ने शासन को मौजूदा ग्राम प्रधानों, ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा है.

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यूपी में ग्राम प्रदाहनों का बढ़ सकता है कार्यकाल

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अब समय पर नहीं होंगे. इसके संकेत पंचायती राज विभाग ने दे दिए हैं. विभाग की तरफ से शासन को एक प्रस्ताव भेजा गया है, जिसमें ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल बढ़ाने की बात कही गई. बता दें कि प्रदेश में 2021 में चुने गए पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है. चुनाव आयोग की तैयारियां अभी पूरी नहीं हुई हैं, इसलिए सरकार प्रशासक समिति गठित कर वर्तमान प्रधानों और अध्यक्षों को ही अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपने का विचार कर रही है.

गौरतलब है कि पंचायत चुनावों में इस बार ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए पहली बार समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ट्रिपल टेस्ट फॉर्मूला अपनाया जाएगा. आयोग का कार्यकाल छह महीने का होगा और इसके अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति मई के अंत या जून के पहले सप्ताह में होने की संभावना है.

विधानसभा चुनाव के बाद हो सकते हैं चुनाव

आयोग पिछड़ा वर्ग की सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ापन का आंकलन करेगा, सर्वेक्षण करेगा और फिर आरक्षण का प्रतिशत तय करेगा. इससे पहले 2021 के पंचायत चुनाव में रैपिड सर्वे के आधार पर आरक्षण तय किया गया था. दूसरी तरफ राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव के बाद ही कराए जा सकते हैं. क्योंकि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट तैयार होने में समय लगेगा, जिसके बाद आरक्षण रोस्टर अंतिम रूप ले सकेगा.

मामला कोर्ट में भी

दूसरी तरफ राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची प्रकाशन की तारीख को पांचवीं बार बढ़ाकर 10 जून 2026 कर दिया है. उधर, जातीय जनगणना का कार्य भी शुरू हो गया है. ऐसे में कहा जा रहा है कि तय समय पर चुनाव होना मुश्किल है. वहीं, जो उम्मीदवार प्रधानी और अन्य पदों की तैयारी में जुटे थे, उन्हें इस देरी से झटका लगा है. मामला अभी न्यायालय में भी विचाराधीन है और अंतिम फैसला अदालत के निर्देशों के अनुसार ही लिया जाएगा.

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Amit Tiwariवरिष्ठ संवाददाता

अमित तिवारी, News18 Hindi के डिजिटल विंग में प्रिंसिपल कॉरेस्पॉन्डेंट हैं. वर्तमान में अमित उत्तर प्रदेश की राजनीति, सामाजिक मुद्दों, ब्यूरोक्रेसी, क्राइम, ब्रेकिंग न्यूज और रिसर्च बेस्ड कवरेज कर रहे हैं. अख़बार…और पढ़ें



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