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यूरिया-DAP के झंझट से चाहिए मुक्ति? खाली पड़े खेतों में बिखेर दें ये बीज, सोना उगलेगी जमीन

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यूरिया-DAP के झंझट से चाहिए मुक्ति? खाली पड़े खेतों में बिखेर दें ये बीज

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Dhaincha Farming : रासायनिक उर्वरक भले ही तुरंत प्रभाव से फसल उत्पादन में वृद्धि करें, लेकिन अब साफ होता जा रहा है कि यह खेतों की मृदा के साथ स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक हैं. लोकल 18 से रायबरेली के राजकीय कृषि केंद्र शिवगढ़ के प्रभारी शिवशंकर वर्मा बताते हैं कि हमें अपने खेतों में हरित खाद के रूप में ढैंचा के बीज का प्रयोग करना चाहिए. इसमें भरपूर मात्रा में कार्बनिक पदार्थ पाए जाते हैं, जो खेत की मिट्टी के लिए बेहद उपयोगी हैं. ढैंचा में 20 से 25 दिनों के बाद गांठें बननी शुरू हो जाती हैं. इससे नाइट्रोजन का स्थिरीकरण होता है.

रायबरेली. अपने खेतों से फसलों की पैदावार की बढ़ोतरी के लिए किसान कई तरह के रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग करते हैं. यह रासायनिक उर्वरक भले ही तुरंत प्रभाव से फसल उत्पादन में वृद्धि करते हों, लेकिन यह खेतों की मृदा के साथ स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक हैं. किसान भाई अपने खेतों में हरित खाद का प्रयोग करके अपनी फसल की पैदावार को बढ़ाने के साथ ही खेतों की उर्वरा शक्ति को भी बढ़ा सकते हैं. इसके लिए ढैंचा की बुआई करनी होगी. इसमें भरपूर मात्रा में कार्बनिक पदार्थ पाए जाते हैं, जो खेतों की मृदा के लिए बेहद फायदेमंद हैं. इससे फसल उत्पादन में बढ़ोतरी होने के साथ मृदा की उर्वरा शक्ति भी बढ़ती है.

जैविक खाद

लोकल 18 से रायबरेली के राजकीय कृषि केंद्र शिवगढ़ के प्रभारी शिवशंकर वर्मा बताते हैं कि लोग अपनी खेतों में फसल से अधिक उत्पादन के लिए रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग करते हैं, लेकिन यह बहुत ही हानिकारक है. इसीलिए हमें अपने खेतों में हरित खाद के रूप में ढैंचा के बीज का प्रयोग करना चाहिए. क्योंकि इसमें भरपूर मात्रा में कार्बनिक पदार्थ पाए जाते हैं, जो हमारे खेत की मिट्टी के लिए बेहद उपयोगी होते हैं.

कब से कब तक

ढैंचा बीज की बुवाई रबी की फसल की कटाई के बाद अप्रैल के अंतिम और मई के प्रथम सप्ताह तक कर देनी चाहिए. रबी की कटाई के बाद खेत खाली पड़े रहते हैं. किसान आगामी फसल के लिए मानसून का इंतजार करते हैं, इसीलिए यह ढैंचा की बुआई का सबसे उपयुक्त समय होता है. ढैंचा के फसल में 20 से 25 दिनों के बाद पौधे में गांठें बननी शुरू हो जाती हैं. इससे नाइट्रोजन का स्थिरीकरण होता है. 45 दिन की अवस्था होने पर इसकी जड़ों में गांठों की संख्या अधिकतम हो जाती है. इसके बाद खेत की जुताई करके मिट्टी में मिला देना चाहिए. ऐसा करने से यह रबी व खरीफ दोनों फसलों के लिए हरी खाद के रूप में काम करती है. इसका बीज बाजार में 130 से 160 रुपए प्रति किलो और राजकीय कृषि केंद्र 155 रुपए प्रति किलो की दर पर मिल जाएगा. राज राजकीय कृषि केंद्र से यह बीज लेने पर 50% तक का अनुदान भी मिलेगा.

कैसे करें बुआई 

शिव शंकर वर्मा बताते हैं कि किसान ढैंचा के बीज की बुआई 12 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से करें. बुवाई के 45 दिन बाद खेत की जुताई करके मिट्टी में मिला दें. इससे इसमें मौजूद जीवांश पदार्थ मृदा में मिल जाएंगे. इसमें भरपूर मात्रा में नाइट्रोजन पाया जाता है, जो हमारे खेतों की मृदा के जल धारण की क्षमता को बढ़ाने के साथ ही मिट्टी की उर्वरा शक्ति को में भी बढ़ोतरी करता है. फसलों की पैदावार बढ़ती है.

About the Author

Priyanshu Gupta

प्रियांशु गुप्‍ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें



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