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रिक्शा चालक के बेटे ने उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा में किया टॉप, 18वीं रैंक लाकर बताया कामयाबी पैसों की मोहताज नहीं

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हरिद्वार के ज्वालापुर निवासी अजीत सिंह ने आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद 10वीं बोर्ड परीक्षा में 500 में से 470 अंक हासिल कर प्रदेश में 18वां स्थान प्राप्त किया है. रिक्शा चालक के बेटे अजीत की यह सफलता मेहनत, लगन और मजबूत इरादों की मिसाल है. अब उनका सपना NDA के जरिए भारतीय सेना में अधिकारी बनकर देश की सेवा करना है.

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हरिद्वार: मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है. पंखों से कुछ नहीं होता, बल्कि हौसलों से उड़ान होती है. इस कहावत को जनपद हरिद्वार की उपनगरी ज्वालापुर के सीतापुर निवासी छात्र अजीत सिंह ने सच कर दिखाया है. 25 अप्रैल, शनिवार को उत्तराखंड बोर्ड का रिजल्ट जारी हुआ, जिसमें एक रिक्शा चालक के बेटे ने 10वीं कक्षा में अच्छे अंक लाकर प्रदेश में 18वां स्थान प्राप्त कर मेरिट सूची में अपना स्थान बनाया है. अजीत सिंह का सपना एक बड़ा अधिकारी बनकर देश की सेवा करना है.

मेहनत लाई रंग

हरिद्वार की उपनगरी ज्वालापुर के सीतापुर स्थित राष्ट्रीय इंटर कॉलेज के छात्र अजीत सिंह की यह सफलता इसलिए भी खास है, क्योंकि परिवार की स्थिति चुनौतीपूर्ण होने के बावजूद उन्होंने कड़ी मेहनत और लगन से पढ़ाई की और प्रदेश की मेरिट लिस्ट में अपना स्थान बनाया. अजीत सिंह ने 10वीं कक्षा में 500 में से 470 अंक हासिल कर 18वां स्थान प्राप्त किया है. उनके पिता जय सिंह पेशे से रिक्शा चालक हैं, जो परिवार का भरण-पोषण करने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं. आर्थिक स्थिति चुनौतीपूर्ण होने के बावजूद उनकी माता शशि देवी और दो बहनों दीप सिंह व भारती सिंह के सहयोग ने अजीत के हौसलों को कभी कम नहीं होने दिया.

सेना में शामिल होना चाहते हैं अजीत

अजीत सिंह एनडीए की तैयारी कर भारतीय सेना में एक बड़ा अधिकारी बनकर देश की सेवा करना चाहते हैं. वे उन लोगों के लिए एक उदाहरण हैं, जो अच्छी रैंक के लिए महंगी कोचिंग या बड़े शहरों पर निर्भर रहते हैं. अजीत ने साबित किया है कि पढ़ाई के लिए सुविधाएं नहीं, बल्कि साधना और समर्पण जरूरी होता है.

पूरे हरिद्वार के लिए गर्व का विषय

भारतीय सेना अनुशासन मांगती है, और अजीत सिंह ने कठिन व विपरीत परिस्थितियों में जो धैर्य और परिश्रम दिखाया है, वह एक अधिकारी बनने की पहली शर्त है. अजीत उन युवाओं के लिए उम्मीद हैं, जिनके माता-पिता मेहनत-मजदूरी कर परिवार चलाते हैं. शिक्षा ही वह माध्यम है, जिससे वे अपने परिवार को सम्मानजनक जीवन दे सकते हैं. अजीत सिंह की इस उपलब्धि पर उनके शिक्षक हरेंद्र चौधरी सहित पूरे विद्यालय परिवार ने उन्हें मिठाई खिलाकर बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की. एक रिक्शा चालक के बेटे की यह सफलता आज पूरे हरिद्वार के लिए गर्व का विषय है.

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Vivek Kumar

विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें



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