चेन्नई के समंदर किनारे उमड़ा जनसैलाब थलपति विजय के नारों से गूंजता आसमान और मंच पर राहुल गांधी की मौजूदगी. दक्षिण भारत की राजनीति में रविवार को एक नया सितारा मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज हुआ लेकिन चर्चा सिर्फ विजय के शपथ ग्रहण की नहीं बल्कि उस सुर की है जिसने प्रोटोकॉल बदल दिया. दशकों पुरानी परंपरा को तोड़ते हुए कार्यक्रम का आगा वंदे मातरम से हुआ. दिल्ली में मोदी कैबिनेट ने भी वंदे मातरम को राष्ट्रगान के बराबर दर्जा देकर इसे कानूनी कवच पहना दिया है. क्या ये सिर्फ एक गाना है, या बदलते भारत की नई सियासी हकीकत? क्या विजय प्रोटोकॉल में इस बदलाव के जरिए केंद्र सरकार को कोई मैसेज दे रहे हैं?
राज्य गीत तमिल थाई वाजथु के बजाय थलापति विजय का वंदे मातरम को चुनना भाजपा को दिए गए एक बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है. विजय और शुभेंदु अधिकारी दोनों ही अपनी-अपनी सीमाओं में नए युग की शुरुआत कर रहे हैं. जहां विजय ने वंदे मातरम के जरिए राष्ट्रवाद के साथ चलने का संकेत दिया है, वहीं केंद्र सरकार ने इस गीत को कानूनी कवच देकर इसे राष्ट्रीय अस्मिता का अनिवार्य हिस्सा बना दिया है. तमिलनाडु की राजनीति में अब तक राज्य गीत को प्राथमिकता दी जाती थी लेकिन विजय ने गृह मंत्रालय के निर्देशों का पालन करते हुए वंदे मातरम से कार्यक्रम शुरू किया. मंच पर उनके साथ विपक्ष के नेता राहुल गांधी की मौजूदगी ने इस घटनाक्रम को और भी दिलचस्प बना दिया क्योंकि कांग्रेस अक्सर वंदे मातरम के मुद्दे पर केंद्र की आलोचना करती रही है.
विजय की प्रैगमैटिक पॉलिटिक्स और केंद्र की जरूरत
1. राजकोषीय स्वायत्तता और केंद्रीय टैक्स में हिस्सा: तमिलनाडु देश की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. विजय अच्छी तरह जानते हैं कि राज्य की कल्याणकारी योजनाओं को चलाने के लिए केंद्रीय करों के ट्रांसफर और समय पर GST मुआवजे की आवश्यकता होती है. वंदे मातरम के जरिए केंद्र के निर्देशों का पालन करना वित्तीय संबंधों में टकराव को कम करने और केंद्र से बेहतर बजट आवंटन सुनिश्चित करने की एक रणनीतिक शुरुआत हो सकती है.
2. इंफ्रास्ट्रक्चर और मेगा प्रोजेक्ट्स की मंजूरी: चेन्नई मेट्रो का विस्तार हो, डिफेंस कॉरिडोर का विकास या फिर नए एक्सप्रेसवे। इन सभी बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए केंद्र सरकार की फंडिंग और पर्यावरण/तकनीकी मंजूरी अनिवार्य है. विजय की सरकार को केंद्र के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखने की जरूरत है ताकि राज्य के विकास कार्य नौकरशाही और राजनीतिक खींचतान में न फंसें.
3. निवेश और मेक इन इंडिया का एकीकरण: तमिलनाडु को एशिया का डेट्रायट कहा जाता है. राज्य में एप्पल (Foxconn) और टेस्ला जैसे वैश्विक दिग्गजों के निवेश को आकर्षित करने के लिए केंद्र की व्यापारिक नीतियों और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम का लाभ उठाना जरूरी है. विजय का केंद्र के प्रति नरम रुख अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को एक स्थिर और सहयोगपूर्ण सरकार का भरोसा दिलाता है.
4. भाषाई और क्षेत्रीय पहचान बनाम राष्ट्रीय मुख्यधारा: द्रविड़ राजनीति अक्सर भाषाई गौरव पर टिकी होती है जो कभी-कभी केंद्र के साथ टकराव पैदा करती है. विजय ने शपथ ग्रहण की शुरुआत वंदे मातरम से करके यह संदेश दिया है कि वे तमिल गौरव को भारतीय पहचान के विरोध में खड़ा नहीं करना चाहते. यह संतुलन उन्हें केंद्र के साथ नीतिगत संवाद में अधिक वजन देगा.
वंदे मातरम का अपमान अब अपराध
प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने राष्ट्रीय सम्मान के अपमान का निवारण अधिनियम में संशोधन को मंजूरी दी है.
· समान दर्जा: अब वंदे मातरम (राष्ट्रीय गीत) का अपमान करने पर वही सजा मिलेगी जो राष्ट्रगान के अपमान पर मिलती है.
· दंडात्मक प्रावधान: नियमों का उल्लंघन करने पर जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं.
· 150वीं वर्षगांठ: यह कदम वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में उठाया गया है.
सवाल-जवाब
वंदे मातरम को लेकर नया कानून क्या कहता है?
कैबिनेट के नए प्रस्ताव के अनुसार वंदे मातरम को जन गण मन के बराबर कानूनी सुरक्षा दी जाएगी. इसका अपमान करना अब एक संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) होगा.
विजय के शपथ ग्रहण में वंदे मातरम बजाना क्यों चर्चा में है?
तमिलनाडु में आमतौर पर तमिल थाई वाजथु से कार्यक्रमों की शुरुआत होती है. विजय द्वारा वंदे मातरम को प्राथमिकता देना उनकी राजनीति में एक बड़े वैचारिक बदलाव और केंद्र के निर्देशों के प्रति सम्मान को दर्शाता है.
सुवेंदु अधिकारी के शपथ ग्रहण में क्या खास था?
यह बंगाल में पहली भाजपा सरकार का आधिकारिक आगाज था. सुवेंदु का सीएम बनना बंगाल की राजनीति में दशकों पुराने वामपंथी और टीएमसी के वर्चस्व के अंत का प्रतीक माना जा रहा है.


