महिला आरक्षण बिल और परिसीमन के मुद्दे पर मोदी सरकार को संसद में घेरने की रणनीति बना रहे ‘INDIA’ गठबंधन की बैठक में बुधवार को उस वक्त एक अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई, जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के रुख ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को असहज कर दिया. संसद के विशेष सत्र को लेकर बुलाई गई इस अहम बैठक में टीएमसी के स्टैंड से एक बार फिर विपक्षी एकजुटता पर सवाल खड़े होने लगे, जिसके बाद शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे को डैमेज कंट्रोल के लिए बीच-बचाव करना पड़ा.
बैठक में विपक्ष के तमाम दिग्गज नेता मौजूद थे. ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी की तरफ से प्रतिनिधि के तौर पर नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसद सागरिका घोष शामिल हुई थीं. जब संसद के विशेष सत्र में सभी सांसदों की मौजूदगी और वोटिंग को लेकर चर्चा चल रही थी, तब सागरिका घोष ने एक ऐसी बात कह दी जिसने बैठक का माहौल गर्म कर दिया.
सागरिका घोष ने साफ शब्दों में कहा कि चूंकि पश्चिम बंगाल में इस वक्त चुनाव की सरगर्मियां तेज हैं और पार्टी के नेता वहां व्यस्त हैं, इसलिए संसद की कार्यवाही में हिस्सा लेने के लिए सभी टीएमसी सांसदों का दिल्ली आ पाना संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि सत्र के दौरान टीएमसी के सिर्फ 5 या 7 सांसद ही मौजूद रह पाएंगे.
राहुल गांधी हुए असहज, दी कड़ी प्रतिक्रिया
टीएमसी प्रतिनिधि का यह रुख राहुल गांधी को रास नहीं आया. वे इस बात से खासे असहज दिखे. राहुल गांधी ने तुरंत इस पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दर्ज कराते हुए टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि अगर ऐसे अहम मौके पर सभी विपक्षी दलों के सांसद अपनी पूरी ताकत के साथ सदन में मौजूद नहीं रहेंगे, तो यह एक तरह से सीधे तौर पर बीजेपी और एनडीए सरकार को फायदा पहुंचाने वाली बात होगी.
राहुल की चिंता बिल्कुल जायज थी, क्योंकि महिला आरक्षण जैसे संविधान संशोधन बिल को रोकने के लिए विपक्ष के एक-एक वोट की कीमत है. अगर टीएमसी के 20-22 सांसद सदन से गैरहाजिर रहते हैं, तो सदन में उपस्थित सदस्यों की कुल संख्या घट जाएगी, जिससे मोदी सरकार के लिए दो-तिहाई (2/3) बहुमत का जादुई आंकड़ा हासिल करना बेहद आसान हो जाएगा.
टीआर बालू ने दिया करारा जवाब
राहुल गांधी की बात का समर्थन करते हुए डीएमके (DMK) के वरिष्ठ नेता टी.आर. बालू ने टीएमसी के तर्क को खारिज कर दिया. बालू ने सागरिका घोष को टोकते हुए कहा, “चुनाव तो हमारे प्रदेश (तमिलनाडु) में भी हैं और वहां भी राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्म है, लेकिन इसके बावजूद हम अपने सभी सांसदों के साथ संसद की कार्यवाही में हिस्सा लेने आ रहे हैं.”
बालू के इस कड़े रुख के बाद बैठक में मौजूद कई अन्य विपक्षी नेताओं ने भी सुर में सुर मिलाया. सभी नेताओं ने एकमत होकर कहा कि इस विशेष सत्र की गंभीरता को देखते हुए सभी दलों को अपने सांसदों के लिए व्हिप (Whip) जारी करना चाहिए और उनकी शत-प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य करनी चाहिए.
उद्धव ठाकरे ने यूं संभाला मोर्चा
बैठक में जब टीएमसी और बाकी दलों के बीच तनातनी बढ़ती दिखी, तो ऑनलाइन (वर्चुअली) जुड़े शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने एक अनुभवी राजनेता की तरह मोर्चा संभाला. उन्होंने स्थिति को शांत करते हुए मध्यस्थता की पेशकश की. उद्धव ठाकरे ने कहा, “आप लोग चिंता मत कीजिए, मैं खुद ममता दीदी से बात करूंगा और उन्हें मनाऊंगा ताकि टीएमसी के सभी सांसद वोटिंग के दिन दिल्ली आएं और सदन में उपस्थित रहें.
उद्धव ठाकरे के इस आश्वासन के बाद बैठक में फिलहाल मामला शांत हो गया, लेकिन इस वाकये ने साफ कर दिया है कि INDIA गठबंधन के लिए संसद के फ्लोर पर अपनी पूरी ताकत (करीब 230-240 सांसद) को एक साथ खड़ा रखना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है. अब सबकी नजरें ममता बनर्जी पर टिकी हैं कि क्या वह उद्धव ठाकरे की बात मानकर अपने सभी सांसदों को बंगाल के चुनावी रण से निकालकर दिल्ली के सियासी संग्राम में भेजेंगी, या फिर उनकी गैरहाजिरी मोदी सरकार के लिए बिल पास कराने का रेड कार्पेट बिछा देगी!


