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फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 908 विकेट लेने वाले फॉस्टर का पूरा करियर चोटों की छाया में रहा उनके घुटनों की नौ बार सर्जरी हुई उनके शरीर में इतनी धातु की प्लेटें लग गई थीं कि एक बार एयरपोर्ट का मेटल डिटेक्टर बज उठा इसीलिए उन्हें “मेटलिक फास्ट बॉलर” भी कहा गया. मात्र 31 वर्ष की आयु में उन्हें संन्यास लेना पड़ा.
9 ऑपरेशन के साथ इंग्लैंड के लिए 21 टेस्ट खेले नील फॉस्टर, बनाए कई रिकॉर्ड
नई दिल्ली. क्रिकेट के इतिहास में कुछ गेंदबाज़ होते हैं जो आँकड़ों से बड़े होते हैं जिनकी असली कहानी नंबरों में नहीं, बल्कि उन पलों में छुपी होती है जब उन्होंने दिग्गजों को धूल चटाई. इंग्लैंड के नील फॉस्टर ऐसे ही एक गेंदबाज़ थे. घुटनों में नौ ऑपरेशन, शरीर में लोहे की प्लेटें, और फिर भी गेंद हाथ में आते ही वो एक अलग ही इंसान बन जाते थे खतरनाक, धारदार और अपनी स्विंग से बल्लेबाज़ों को बेबस करने वाले. यह कहानी उस गेंदबाज़ की है जिसे क्रिकेट की दुनिया ने उतना याद नहीं रखा जितना वो हक़दार था.
नील एलन फॉस्टर का जन्म 6 मई 1962 को कोलचेस्टर, एसेक्स में हुआ उन्होंने 1983 से 1993 के बीच इंग्लैंड के लिए 29 टेस्ट और 48 वनडे मैच खेले. 6 फुट 4 इंच के इस दाएँ हाथ के तेज़-मध्यम गेंदबाज़ को साथी खिलाड़ी “फ़ॉज़ी” के नाम से पुकारते थे. एसेक्स के साथ अपने घरेलू करियर में फॉस्टर ने टीम को काउंटी चैंपियनशिप में पाँच बार 1983, 1984, 1986, 1991 और 1992 में जीत दिलाई. उनकी टीम में ग्राहम गूच, कीथ फ्लेचर, जॉन लीवर और बाद में नासिर हुसैन जैसे दिग्गज शामिल थे.
स्विंग के किंग थे फॉस्टर
फॉस्टर की निरंतर और घातक स्विंग गेंदबाज़ी ही उनकी सबसे बड़ी ताकत थी. वो आउट-स्विंग और इन-स्विंग दोनों में समान रूप से माहिर थे. गेंद को दोनों दिशाओं में मोड़ने की यह क्षमता ही उन्हें बाकी गेंदबाज़ों से अलग बनाती थी. इंग्लिश परिस्थितियों में तो वो घातक थे ही, लेकिन उनकी असली परीक्षा एशिया के सपाट विकेटों पर हुई और वो वहाँ भी खरे उतरे भारत और पाकिस्तान में 6 टेस्ट में उन्होंने महज 22.96 की औसत से 27 विकेट लिए जो किसी भी इंग्लिश तेज़ गेंदबाज़ के लिए उस दौर में बेहतरीन उपलब्धि थी.
वो अनोखा रिकॉर्ड — विव और मियाँदाद, दोनों शून्य पर आउट
क्रिकेट इतिहास में फॉस्टर एकमात्र ऐसे गेंदबाज़ हैं जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में विव रिचर्ड्स और जावेद मियाँदाद दोनों को शून्य पर आउट किया. विव रिचर्ड्स, जिनकी बल्लेबाज़ी देखकर गेंदबाज़ थर्राते थे, और मियाँदाद, जो मुश्किल से मुश्किल हालात में रन बनाने के लिए मशहूर थे दोनों को बिना खाता खोले पवेलियन भेजना फॉस्टर की गेंदबाज़ी की धार का सबसे बड़ा प्रमाण है. मियाँदाद को उन्होंने लीड्स में 1987 में उसी मैच में शून्य पर आउट किया जब उन्होंने 8/107 के अपने सर्वश्रेष्ठ टेस्ट आँकड़े दर्ज किए.
भारत के खिलाफ चेन्नई में इतिहास रचा
फॉस्टर का सबसे यादगार और ऐतिहासिक प्रदर्शन 1984-85 में भारत के खिलाफ चेन्नई (तब मद्रास) के चेपक मैदान पर आया. फॉस्टर उस मैच में चोटों की वजह से सीरीज़ में पहली बार खेल रहे थे पॉल एलॉट और रिचर्ड एलिसन की चोट ने उनके लिए रास्ता खोला था. सुनील गावस्कर ने फॉस्टर के पहले ओवर में ही 10 रन ठोक दिए भारतीय टीम आक्रामक मूड में थी लेकिन फॉस्टर ने अपनी लय पकड़ी और गावस्कर को बोल्ड कर दिया. इसके बाद मोहिंदर अमरनाथ को आउट-स्विंगर पर और रवि शास्त्री को कैच आउट कराया. पहली पारी में 6/104 के आँकड़े के साथ फॉस्टर ने भारत को 272 पर समेट दिया. इंग्लैंड ने 380 रनों की विशाल बढ़त हासिल की. दूसरी पारी में फॉस्टर ने 3/5 का तूफानी स्पेल डाला और भारत को 22/3 पर धकेल दिया. पूरे मैच में 11 विकेट लेकर फॉस्टर ने इंग्लैंड को वो सीरीज़ जिता दी जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी.
चोटों ने तोड़ा एक महान करियर
फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 908 विकेट लेने वाले फॉस्टर का पूरा करियर चोटों की छाया में रहा उनके घुटनों की नौ बार सर्जरी हुई उनके शरीर में इतनी धातु की प्लेटें लग गई थीं कि एक बार एयरपोर्ट का मेटल डिटेक्टर बज उठा इसीलिए उन्हें “मेटलिक फास्ट बॉलर” भी कहा गया. मात्र 31 वर्ष की आयु में उन्हें संन्यास लेना पड़ा. 29 टेस्ट में 88 विकेट यह आँकड़ा उस प्रतिभा का केवल एक अधूरा चित्र है अगर फिटनेस ने साथ दिया होता, तो नील फॉस्टर का नाम इंग्लैंड के महानतम तेज़ गेंदबाज़ों में सबसे ऊपर होता. पर क्रिकेट की यही त्रासदी है कुछ सितारे पूरी तरह चमकने से पहले ही बुझ जाते हैं नील फॉस्टर उन्हीं में से एक थे अधूरे करियर में भी मुकम्मल गेंदबाज़.
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मैं, राजीव मिश्रा, वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स कंटेंट की योजना, संपादकीय रणनीति और एंकरिंग की जिम्मेदारी निभाता हूँ. खेल पत्रका…और पढ़ें


