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संसदीय दंगल: क्या इंडिया गठबंधन की 35 महिला सांसद बनेंगी गेमचेंजर? कुछ देर में महिला आरक्षण बिल पर वोटिंग

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क्‍या इंडिया गठबंधन की 35 महिला सांसद बनेंगी गेमचेंजर? कुछ देर में वोटिंग

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महिला आरक्षण विधेयक पर आज शाम होने वाली वोटिंग संसदीय गणित की अग्निपरीक्षा है. इसे पास कराने के लिए दो तिहाई यानी 362 वोटों की जरूरत है जबकि एनडीए के पास 293 सीटें हैं. इंडिया गठबंधन की 35 महिला सांसदों का समर्थन मिलने पर भी यह आंकड़ा 328 ही पहुंचता है. ऐसे में बिल का भविष्य सदन की मौजूदगी पर निर्भर है. यदि विपक्षी महिलाएं पक्ष में वोट करती हैं तो यह बिल को बड़ी नैतिक जीत दिलाएगा.

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महिला आरक्षण बिल पर आज वोटिंग होनी है.

लोकसभा के गलियारों में आज शाम एक ऐसी पटकथा लिखी जानी है जिसकी गूंज दशकों तक सुनाई देगी. यह केवल एक विधेयक पर मुहर नहीं बल्कि सत्ता और सियासत के बीच ‘शक्ति’ के संतुलन की परीक्षा है. घड़ी की सुइयां जैसे-जैसे वोटिंग के वक्त की ओर बढ़ रही हैं, संसद की दहलीज पर खड़ा गणित एक जटिल पहेली बनता जा रहा है. एक तरफ सरकार की साख और 293 सीटों का अभेद्य किला है, तो दूसरी तरफ इंडिया गठबंधन की वो 35 महिला सांसद जो इस समय लोकतंत्र के तराजू का सबसे संवेदनशील कांटा बनी हुई हैं. क्या ये 35 आवाजें अपनी पार्टी की सीमाओं को लांघकर इतिहास के पक्ष में खड़ी होंगी? या फिर आंकड़ों का यह खेल दो-तिहाई के जादुई घेरे के बाहर ही दम तोड़ देगा? आज तय होगा कि नारी शक्ति का यह वंदन हकीकत बनेगा या फिर सियासी आंकड़ों की भेंट चढ़ जाएगा.

इंडिया गठबंधन की महिला सांसद क्‍या हलिा सकती हैं गणित?

महिला आरक्षण विधेयक को पारित करने के लिए आवश्यक ‘दो-तिहाई बहुमत’ का गणित सदन की तत्कालीन उपस्थिति पर निर्भर करता है. यदि हम 543 सीटों के पूर्ण सदन को आधार मानें तो 362 का जादुई आंकड़ा अनिवार्य हो जाता है. वर्तमान समीकरण के अनुसार, एनडीए की 293 सीटों और इंडिया गठबंधन की 35 महिला सांसदों के मतों को मिला भी लिया जाए तो कुल संख्या 328 तक ही पहुंचती है जो कि पूर्ण सदन के दो-तिहाई आंकड़े (362) से 34 सीटें कम है.

महिला आरक्षण विधेयक: लोकसभा वोटिंग समीकरण (2026)

घटक / पार्टी गठबंधन कुल सीटें महिला सांसद प्रभावी वोट (पक्ष में)
सत्ता पक्ष (NDA) 293 ~31 293
इंडिया (I.N.D.I.A.) गठबंधन 233 35 35*
अन्य और निर्दलीय 17 08
कुल योग (NDA + विपक्षी महिलाएँ) 328
बहुमत लक्ष्य (2/3 बहुमत) 543 362

हालांकि, संसदीय प्रक्रिया में ‘उपस्थित और मतदान करने वाले’ सदस्यों का महत्व अधिक है. यदि वोटिंग के समय सदन में सदस्यों की संख्या कम रहती है तो दो-तिहाई का यह लक्ष्य भी नीचे आ जाएगा. उदाहरण के तौर पर यदि सदन में केवल 480 सदस्य मौजूद रहते हैं तो बिल पास कराने के लिए केवल 320 वोटों की आवश्यकता होगी. ऐसी स्थिति में, विपक्ष की 35 महिला सांसदों का समर्थन न केवल प्रतीकात्मक होगा, बल्कि वह सरकार के लिए ‘सेफ्टी वाल्व’ का काम करेगा और बिल की संवैधानिक वैधता को मजबूती प्रदान करेगा.

सवाल-जवाब
क्या केवल विपक्षी महिला सांसदों के समर्थन से बिल पास हो सकता है?

नहीं, केवल 35 महिला सांसदों के वोट से एनडीए बहुमत तक नहीं पहुँच पाएगा; इसके लिए विपक्ष के अन्य पुरुष सांसदों या अन्य छोटे दलों के समर्थन की भी आवश्यकता होगी.

‘दो-तिहाई बहुमत’ का निर्धारण कैसे होता है?

यह सदन की कुल क्षमता के बजाय वोटिंग के समय सदन में मौजूद और मतदान करने वाले सांसदों की संख्या के आधार पर तय किया जाता है.

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Sandeep Gupta

पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्‍त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्‍कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें



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