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Summer Vegetable Care Tips: तीखी धूप और लू के थपेड़ों ने अब कद्दू वर्गीय फसलों पर भी असर दिखाना शुरू कर दिया है. लौकी, तोरई और कद्दू जैसी फसलें झुलसने लगी हैं, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है. कृषि एक्सपर्ट ने किसानों को फसलों को बचाने के लिए हल्की सिंचाई, मल्चिंग और पोटेशियम नाइट्रेट के छिड़काव करने की सलाह दी है.
भीषण गर्मी और तेज लू का असर अब खेतों में साफ दिखाई देने लगा है. खासकर कद्दू वर्गीय फसलें लौकी, तोरई और कद्दू गर्म हवाओं की चपेट में आकर झुलस रही हैं. कई जगहों पर पौधों की पत्तियां पीली होकर सूखने लगी हैं. कृषि एक्सपर्ट डॉ. पुनीत कुमार पाठक का कहना है कि समय रहते बचाव नहीं किया गया तो उत्पादन पर बड़ा असर पड़ सकता है. किसानों को तुरंत फसल सुरक्षा के उपाय करने चाहिए.

एक्सपर्ट के मुताबिक तेज धूप और लगातार बढ़ते तापमान से मिट्टी की नमी तेजी से खत्म हो रही है. इसका सीधा असर पौधों की ग्रोथ और फल बनने की प्रक्रिया पर पड़ रहा है. ऐसे मौसम में खेतों में हल्की और नियमित सिंचाई करना बेहद जरूरी है. किसान सिंचाई सुबह जल्दी या शाम के समय ही करें, ताकि पौधों को पर्याप्त नमी मिल सके.

कद्दू वर्गीय फसलों को लू से बचाने के लिए मल्चिंग को बेहद प्रभावी उपाय माना गया है. बचाव के लिए किसान लाइनों के बीच सूखी घास और पुआल बिछा दें. इससे मिट्टी की नमी लंबे समय तक बनी रहती है और जमीन का तापमान नियंत्रित रहता है. मल्चिंग से खरपतवार भी कम उगते हैं, जिससे पौधों को पर्याप्त पोषण मिल पाता है.
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दोपहर के समय सिंचाई करने से गर्म मिट्टी और तेज धूप के कारण पौधों को नुकसान हो सकता है. इसलिए सिंचाई का सही समय चुनना जरूरी है. खेतों में हल्की सिंचाई करने से पौधों की जड़ों को ठंडक मिलती है और लू का असर कम होता है. साथ ही मिट्टी में नमी बनी रहने से फसल की बढ़वार बेहतर होती है और पौधे सूखने से बच जाते हैं.

फसल पर पोटेशियम नाइट्रेट के छिड़काव करना भी मददगार होता है. 1% पोटेशियम नाइट्रेट का घोल बनाकर पौधों पर स्प्रे करने से फसल को गर्मी और सूखे से लड़ने की ताकत मिलती है. यह पौधों की कोशिकाओं को मजबूत करता है और फल गिरने की समस्या को भी कम करता है. इससे पौधे लंबे समय तक हरे-भरे बने रहते हैं और उत्पादन पर असर कम पड़ता है.

लगातार बढ़ती गर्मी के चलते किसानों को खेतों की नियमित निगरानी करनी चाहिए. एक्सपर्ट का कहना है कि अगर पत्तियों में मुरझाने या जलने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत उपचार करना चाहिए. खेत में नमी बनाए रखने के साथ-साथ पौधों पर आवश्यक पोषक तत्वों का छिड़काव भी जरूरी है. समय पर देखभाल से फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है.

एक्सपर्ट ने किसानों से अपील की है कि मौसम को देखते हुए फसलों की देखभाल में किसी तरह की लापरवाही न बरतें. नियमित सिंचाई, मल्चिंग और पोषक तत्वों के संतुलित उपयोग से गर्मी के असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है. अगर किसान वैज्ञानिक सलाह के अनुसार खेती करें तो भीषण गर्मी और लू के बावजूद कद्दू वर्गीय फसलों की अच्छी पैदावार हासिल की जा सकती है.

कई जिलों में किसान पहले से ही गर्मी की मार झेल रहे हैं. सब्जी उत्पादकों का कहना है कि तेज धूप के कारण फलों का आकार छोटा रह जा रहा है और पौधे जल्दी सूख रहे हैं. इससे उत्पादन घटने की आशंका बढ़ गई है. कृषि विभाग किसानों को जागरूक करते हुए लगातार सलाह जारी कर रहा है, ताकि समय रहते बचाव कर नुकसान को कम किया जा सके.


