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Superteck Project : क्या आपने भी सुपरटेक के प्रोजेक्ट में पैसे लगाए हैं तो जल्द ही राहत भरा फैसला आ सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर मामले पर नजर डाली है और कंपनी के शेष 14 प्रोजेक्ट को पूरा करने को लेकर एनसीएलएटी को जल्द फैसला करने का आदेश दिया है.
सुपरटेक के 14 प्रोजेक्ट में आज भी लोगों का पैसा फंसा हुआ है.
नई दिल्ली. दिल्ली-एनसीआर सहित देश के तमाम शहरों में आवासीय परियोजनाएं चलाने वाली रियल एस्टेट कंपनी सुपरटेक पर एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट ने निगाह डाली है. शीर्ष अदालत ने कहा है कि सुपरटेक में घर खरीदने वालों को राहत दिलाने के लिए कंपनी के सभी अधूरे प्रोजेक्ट के एकीकरण पर एनसीएलएटी को जल्द फैसला लेना चाहिए. कर्ज में डूबी सुपरटेक में हजारों घर खरीदारों ने अपना पैसा लगाया और लंबे समय से इसके प्रोजेक्ट पूरे होने के इंतजार में हैं.
उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) से कहा कि कर्ज में डूबी रियल एस्टेट कंपनी सुपरटेक लिमिटेड की शेष 14 आवासीय परियोजनाओं के एकीकरण पर शीघ्र निर्णय लिया जाए. इसके बाद अदालत की निगरानी में उनका निर्माण पूरा कर घर खरीदारों की समस्याओं का समाधान किया जा सके. इससे पहले सुपरटेक की 16 अन्य परियोजनाओं को सरकारी कंपनी एनबीसीसी को सौंपकर उसका निर्माण पूरा कराया जा रहा है.
कहां हैं सुपरटेक की फंसी परियोजनाएं
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने लंबित परियोजनाओं को लेकर घर खरीदारों की आशंकाओं पर संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण से मामले की जल्द सुनवाई करने और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण एवं किसानों जैसे सभी पक्षों को सुनने को कहा है. शीर्ष अदालत ने संकेत दिया कि सुपरटेक की शेष परियोजनाओं को भी अदालती निगरानी के तहत किसी अन्य एजेंसी को सौंपने पर निर्णय लिया जा सकता है.
कंपनी के 16 प्रोजेक्ट पर चल रहा काम
इससे पहले अदालत 16 परियोजनाओं को पूरा करने का जिम्मा सरकारी निर्माण कंपनी एनबीसीसी को देने के एनसीएलएटी के आदेश को बरकरार रख चुकी है. न्यायालय ने यह भी कहा कि सुपरटेक के दिवाला समाधान पेशेवर (आईआरपी) के खिलाफ कथित अनियमितताओं के कारण उसे निलंबित कर दिया गया है, लिहाजा न्यायिक हस्तक्षेप जरूरी हो गया है. एनसीएलएटी 24 अप्रैल को इस मामले की सुनवाई कर सकता है.
कितने मकान बना रही एनबीसीसी
इससे पहले 12 दिसंबर, 2024 के आदेश में अपीलीय न्यायाधिकरण ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा और कर्नाटक में स्थित 16 परियोजनाओं (करीब 49,748 आवास) को पूरा करने का जिम्मा एनबीसीसी को सौंपा था. इन परियोजनाओं में करीब 27,000 खरीदार अपने घरों का इंतजार कर रहे हैं. सुपरटेक ने 2010-12 के दौरान लगभग 51,000 घरों की बुकिंग की थी, लेकिन वित्तीय संकट के चलते साल 2021 में दिवाला प्रक्रिया शुरू होने के बाद कई परियोजनाएं अधर में लटक गईं. कंपनी ने बैंक से लिए कर्ज का गलत इस्तेमाल किया और लोन को डिफॉल्ट करने पर दिवाला प्रक्रिया में चली गई.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें


