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India Solar Energy Capacity: ईरान जंग के चलते दुनिया एनर्जी क्राइसिस के दौर से गुजर रही है. होर्मुज स्ट्रेट के बाधित होने की वजह से क्रूड ऑयल और गैस की आपूर्ति बुरी तरह से प्रभावित हुई है. इससे कई देशों में इमर्जेंसी जैसे हालात पैदा हो गए हैं. वहीं, एनर्जी के सबसे बड़े सोर्स तेल और गैस की कीमतों भी भारी उछाल आया है. इससे देशों का बजट भी गड़बड़ा गया है. दुनिया के तमाम देश अब तेल और गैस का विकल्प ढूंढ़ने लगे हैं. पिछले कुछ दिनों में भारत ने इस दिशा में दो बड़ी सफलताएं हासिल की हैं. एक न्यूक्लियर और दूसरी तरफ सोलर एनर्जी के सेक्टर में बड़ी उपलब्धि हासिल की गई है.
India Solar Energy Capacity: ईरान जंग और होर्मुज संकट के चलते एनर्जी के कन्वेंशनल सोर्स की सप्लाई में बाधा आई है. इस वजह से तेल और गैस की सप्लाई बाधित हुई है. ऐसे में दुनिया के तमाम देशों की इकोनॉमी प्रभावित हुई हैं, लिहाजा अब ऊर्जा के पारंपरिक स्रोत के अलावा अन्य विकल्पों पर तेजी से काम शुरू कर दिया गया है. भारत भी इसमें पीछे नहीं रहना चाहता है. सरकार की तरफ से लंबे समय से रिन्यूवेबल और सस्टेनेबल एनर्जी सेगमेंट में इन्वेस्ट किया जा रहा है. अब इसके परिणाम सामने आने लगे हैं. एक तरफ कलपक्कम में न्यूक्लियर फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBR) को डेवलप करने में बड़ी सफलता मिली है. इससे परमाणु ऊर्जा का उत्पादन बेहद आसान और तेजी से हो सकेगा. दूसरी तरफ, सोलर एनर्जी के सेगमेंट में भी भारत ने ऐतिहासिक छलांग लगाई है. भारत ने सौर ऊर्जा से एक साल में अभी तक सबसे ज्यादा 45 गीगावाट एनर्जी का प्रोडक्शन किया है. यह एक साल में सबसे ज्यादा है. एनर्जी क्राइसिस के इस माहौल में यह सफलता किसी वरदान से कम नहीं है. (फोटो: Reuters)

भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में सौर ऊर्जा क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए करीब 45 गीगावाट (GW) की रिकॉर्ड वार्षिक सौर क्षमता जोड़ी है. यह देश के ऊर्जा क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी वार्षिक बढ़ोतरी है, जो भारत के स्वच्छ ऊर्जा और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से बढ़ते कदम को दर्शाती है. प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से इस उपलब्धि को रेखांकित करते हुए केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी के बयान का हवाला दिया. केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि यह उपलब्धि भारत की ऊर्जा सुरक्षा, सतत विकास और ‘विकसित भारत’ के विजन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है. उन्होंने बताया कि राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र इस वृद्धि के प्रमुख चालक रहे हैं, जिन्होंने देश को स्वच्छ और हरित ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है (फोटो: Reuters)

मार्च 2026 में ही देश ने 6.65 गीगावाट सौर क्षमता जोड़ी, जो किसी एक महीने में अब तक की सबसे अधिक स्थापना है. इस दौरान राजस्थान, गुजरात और तमिलनाडु शीर्ष योगदानकर्ता राज्यों के रूप में उभरे. यह रुझान दर्शाता है कि राज्य स्तर पर भी नवीकरणीय ऊर्जा को लेकर प्रतिस्पर्धा और निवेश तेजी से बढ़ रहा है. भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर भी अपनी स्थिति मजबूत की है. ‘Renewable Energy Statistics 2026’ के अनुसार, भारत ने ब्राज़ील को पीछे छोड़ते हुए स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के मामले में दुनिया में तीसरा स्थान हासिल कर लिया है. यह उपलब्धि देश के बढ़ते हरित ऊर्जा निवेश और नीति-निर्माण की सफलता को दर्शाती है. (फोटो: Reuters)
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वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत का कुल बिजली उत्पादन 1,845.921 अरब यूनिट (BU) तक पहुंच गया, जिसमें गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों (Non Fossil Fuel Source) की हिस्सेदारी बढ़कर 29.2 प्रतिशत (538.97 BU) हो गई. उल्लेखनीय है कि जून 2025 में भारत ने अपनी कुल स्थापित विद्युत क्षमता का 50 प्रतिशत गैर-जीवाश्म स्रोतों से हासिल करने का लक्ष्य भी प्राप्त कर लिया, जो कि पेरिस समझौते के तहत निर्धारित 2030 के लक्ष्य से पांच साल पहले है. (फोटो: Reuters)

सरकार 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली क्षमता हासिल करने के लक्ष्य की दिशा में काम कर रही है. इस दिशा में ‘राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन’ (NGHM) एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके लिए 19,744 करोड़ रुपये का प्रारंभिक बजट निर्धारित किया गया है. इस मिशन का उद्देश्य 2030 तक प्रति वर्ष कम से कम 5 मिलियन मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करना है. इसके साथ ही 125 गीगावाट अतिरिक्त नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ने, 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश आकर्षित करने, 6 लाख से अधिक रोजगार सृजित करने और हर साल 50 मिलियन मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने की उम्मीद है. (फोटो: PTI)

पवन ऊर्जा क्षेत्र में भी भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है. वित्त वर्ष 2025-26 में देश ने 6.05 गीगावाट पवन क्षमता जोड़ी, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 46 प्रतिशत अधिक है. कुल स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता 56 गीगावाट को पार कर चुकी है, जिससे भारत इस क्षेत्र में दुनिया का चौथा सबसे बड़ा देश बन गया है. सरकार ने पवन ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए ‘जनरेशन-बेस्ड इंसेंटिव’ (GBI) योजना के तहत 500 करोड़ रुपये का पूंजीगत प्रावधान भी किया है. इस योजना के तहत उत्पादित बिजली की प्रति यूनिट पर वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाता है, जिससे निवेशकों और डेवलपर्स को प्रोत्साहन मिलता है. (फोटो: Reuters)


