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Maharashtra Day and Labour Day: 1 मई का दिन महाराष्ट्र के लिए दोहरी खुशी का होता है. इसी दिन 1960 में बॉम्बे स्टेट से अलग होकर महाराष्ट्र राज्य बना था. साथ ही यह अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस भी है. महाराष्ट्र के गठन में मजदूरों का बड़ा योगदान रहा है, इसलिए यह संयोग बेहद खास माना जाता है.
1 मई को ही महाराष्ट्र दिवस और मजदूर दिवस क्यों मनाया जाता है? जानिए कारण (Photo : Generative AI)
नई दिल्ली: महाराष्ट्र दिवस और मजदूर दिवस दोनों ही 1 मई को मनाए जाते हैं. यह महज एक इत्तेफाक नहीं है बल्कि इसके पीछे गहरा ऐतिहासिक संघर्ष छिपा है. 1 मई 1960 को ही बॉम्बे पुनर्गठन अधिनियम के जरिए महाराष्ट्र राज्य का गठन हुआ था. दूसरी तरफ 1 मई पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस यानी लेबर डे के तौर पर मनाया जाता है. महाराष्ट्र के गठन का आंदोलन भी आम जनता और मजदूरों के पसीने से सींचा गया था. आज के दिन पूरे महाराष्ट्र में सरकारी छुट्टी होती है और बड़े स्तर पर परेड और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है. यह दिन न केवल एक राज्य की पहचान का उत्सव है बल्कि हक के लिए लड़ने वाले कामगारों के सम्मान का प्रतीक भी है.
महाराष्ट्र दिवस क्या है और यह क्यों मनाया जाता है?
महाराष्ट्र दिवस हर साल 1 मई को मनाया जाता है. यह दिन 1960 में महाराष्ट्र राज्य की स्थापना की याद दिलाता है. भारत की आजादी के समय बॉम्बे स्टेट एक बहुत बड़ा प्रांत था. इसमें मराठी और गुजराती बोलने वाले लोग एक साथ रहते थे. धीरे-धीरे अलग भाषा के आधार पर अलग राज्य की मांग उठने लगी. मराठी भाषी लोग अपने लिए ‘संयुक्त महाराष्ट्र’ की मांग कर रहे थे. इसके लिए ‘संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन’ शुरू हुआ जो काफी उग्र रहा. लंबे संघर्ष और बलिदान के बाद केंद्र सरकार ने बॉम्बे स्टेट को दो हिस्सों में बांटने का फैसला किया. इसी फैसले के बाद मराठी भाषियों के लिए महाराष्ट्र और गुजराती भाषियों के लिए गुजरात राज्य अस्तित्व में आया.
महाराष्ट्र दिवस और मजदूर दिवस एक ही दिन पड़ने का क्या कारण है?
महाराष्ट्र दिवस और मजदूर दिवस का एक ही तारीख पर पड़ना ऐतिहासिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है. अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस की शुरुआत 19वीं सदी में अमेरिका के शिकागो से हुई थी. वहां मजदूरों ने 8 घंटे काम की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था. भारत में लेबर डे पहली बार 1923 में मद्रास में मनाया गया था.
जब 1960 में महाराष्ट्र राज्य बनाने की घोषणा हुई तो इसके लिए 1 मई की तारीख चुनी गई. इसका मुख्य कारण यह था कि संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन में मिल मजदूरों और आम कामगारों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था. उनके संघर्ष को सम्मान देने के लिए तत्कालीन सरकार ने इस विशेष दिन को राज्य स्थापना के लिए चुना. इस तरह महाराष्ट्र की अस्मिता और मजदूरों का हक एक ही दिन के सूत्र में बंध गए.
क्या महाराष्ट्र और गुजरात दोनों का स्थापना दिवस एक ही है?
हां, महाराष्ट्र और गुजरात दोनों राज्यों का गठन एक ही दिन हुआ था. 1 मई 1960 को जब बॉम्बे स्टेट का बंटवारा हुआ तो दो नए राज्य बने. गुजरात में इस दिन को ‘गुजरात स्थापना दिवस’ के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है. हालांकि दोनों राज्यों के बीच बॉम्बे (मुंबई) को लेकर काफी विवाद था.
मराठी भाषी चाहते थे कि मुंबई महाराष्ट्र का हिस्सा बने जबकि गुजराती भाषी भी अपना दावा पेश कर रहे थे. अंत में मुंबई को महाराष्ट्र की राजधानी बनाया गया. यही कारण है कि 1 मई का दिन पश्चिमी भारत के इन दो प्रमुख राज्यों के लिए गौरवशाली इतिहास लेकर आता है.
इस दिन महाराष्ट्र में किस तरह के आयोजन होते हैं?
महाराष्ट्र दिवस पर राज्य सरकार द्वारा शिवाजी पार्क में भव्य परेड आयोजित की जाती है. राज्य के राज्यपाल इस परेड की सलामी लेते हैं और ध्वजारोहण करते हैं. इस दिन महाराष्ट्र की समृद्ध संस्कृति और लोक कलाओं का प्रदर्शन किया जाता है. लावणी, पोवाड़ा और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए राज्य की विरासत को याद किया जाता है.
स्कूलों और सरकारी दफ्तरों में भी तिरंगा फहराया जाता है. चूंकि यह मजदूर दिवस भी है इसलिए कई श्रमिक संगठन अपनी मांगों और उपलब्धियों को लेकर रैलियां निकालते हैं. यह दिन महाराष्ट्र के लोगों के लिए अपनी भाषा, मिट्टी और हक के प्रति एकजुटता दिखाने का बड़ा अवसर होता है.
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दीपक वर्मा News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक से भी ज्यादा का अनुभव रखने वाले दीपक मुख्य रूप से विज्ञान, राजनीति और भारत के आंतरिक घ…और पढ़ें


