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1973 में जल कल योजना पाठा क्षेत्र के लिए किसी उम्मीद की किरण से कम नहीं थी. सरकार ने गांवों में पाइपलाइन बिछाई, पानी की टंकियां बनवाईं और एक व्यवस्थित सप्लाई सिस्टम तैयार किया गया था. शुरुआती वर्षों में इसका असर भी देखने को मिला और लोगों को राहत मिली थी. लेकिन समय के साथ यह योजना अपनी रफ्तार खोती चली गई.
चित्रकूटः बुंदेलखंड के चित्रकूट जिले का पाठा क्षेत्र का कई गांव आज भी पानी की समस्या से जूझ रहा है, लेकिन इस संकट की जड़ें दशकों पुरानी हैं. पथरीली जमीन, कम वर्षा और प्राकृतिक जलस्रोतों की कमी ने इस इलाके को हमेशा जल संकट की मार झेलने पर मजबूर किया है. हालांकि इस गंभीर स्थिति को देखते हुए वर्ष 1973 में सरकार ने पाठा जल कल योजना की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य दूरस्थ जलस्रोतों से पानी लाकर गांव-गांव तक पहुंचाना था.
ठप पड़ गई सरकार की ये योजना
बता दे कि उस दौर में यह योजना पाठा क्षेत्र के लिए किसी उम्मीद की किरण से कम नहीं थी. सरकार ने गांवों में पाइपलाइन बिछाई, पानी की टंकियां बनवाईं और एक व्यवस्थित सप्लाई सिस्टम तैयार किया गया था. शुरुआती वर्षों में इसका असर भी देखने को मिला और लोगों को राहत मिली थी. लेकिन समय के साथ यह योजना अपनी रफ्तार खोती चली गई और आज यह योजना पूरी तरह से ठप पड़ी नजर आती है.इस योजना के तहत बनाई गई टंकिया खंडहर हो चुकी है.और कही कही एक दम से खत्म हो चुकी है.
1973 में शुरू हुई थी पाठा जल कल योजना
वही इस संबंध में पाठा के सरहट गांव के पूर्व प्रधान राजन कोल ने लोकल 18 को जानकारी में बताया कि यह चित्रकूट पाठा क्षेत्र बहुताय पिछड़ा क्षेत्र रहा है. यहां पेयजल का कभी अभाव अभाव रहा है.जो गांव में कुएं बनाए जाते थे,वह तक सुख जाते थे.और जिन कुओं में पानी रहता था.उसको निकालने के लिए लगभग 150 फिट रस्सी लगती थी.और ज्यादातर लोग प्राकृतिक झरनों का पानी प्रयोग करते थे, और दो-दो किलोमीटर लोग जाकर पानी लाते थे.
इस समय 1973 में सरकार की यह योजना आई थी. जिसको पाठा जल कल नाम दिया गया था. और प्रत्येक गांव में इसकी लाइन बिछाई गई और टंकियां बनाई गई थी.और टंकियां में उस पाइपलाइन के द्वारा पानी सप्लाई होता था. लेकिन आज यह योजना पूरी तरह से बंद है और इसकी जगह हर घर नल योजना से लोगों को थोड़ा पानी मिल रहा है. उन्होंने आगे की जानकारी में बताया कि पाठा जल कल योजना पूरे यूपी में चित्रकूट में ही चालू की गई थी.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें


