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विराट ने जिस तरह से इमोशनल होते हुए कहा कि मैं अपना घर छोड़कर,परिवार छोड़कर, अपना सारा सामान यहां लाकर, खेलना क्यों न चाहूं?” इस एक लाइन में कोहली की प्रतिबद्धता साफ झलकती है. यह उस खिलाड़ी की पीड़ा भी है, जिसने सालों तक भारतीय क्रिकेट का भार अपने कंधों पर उठाया.
टेस्ट क्रिकेट से जबरदस्ती रिटायरमेंट के बाद विराट कोहली ने पहली बार सिस्टम पर उटाए सवाल
नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट के सबसे जुनूनी चेहरों में से एक विराट कोहली जब बोलते हैं, तो उनके शब्द सिर्फ बयान नहीं होते वे भावनाओं का विस्फोट होते हैं. हाल ही में आरसीबी के पॉडकास्ट में कोहली ने जो कहा, उसने क्रिकेट जगत को झकझोर दिया. यह सिर्फ एक खिलाड़ी की प्रतिक्रिया नहीं थी, बल्कि एक ऐसे दिग्गज की आवाज थी, जिसे लगता है कि उसे खुद को बार-बार साबित करने के लिए मजबूर किया जा रहा है.टेस्ट क्रिकेट में जिस तरह से विराट ने रिटायरमेंट लिया वो किसी को पचा नहीं था और सब इंतजार कर रहे थे कि एक दिन जब किंग बोलेगा तो बवाल होगा.
विराट ने जिस तरह से इमोशनल होते हुए कहा कि मैं अपना घर छोड़कर,परिवार छोड़कर, अपना सारा सामान यहां लाकर, खेलना क्यों न चाहूं?” इस एक लाइन में कोहली की प्रतिबद्धता साफ झलकती है. यह उस खिलाड़ी की पीड़ा भी है, जिसने सालों तक भारतीय क्रिकेट का भार अपने कंधों पर उठाया और अब जब वह अपने करियर के एक नए मोड़ पर खड़ा है, तो उसे अपनी भूमिका को लेकर स्पष्टता चाहिए क्योंकि टेस्ट फॉर्मेट की तरह वो वनडे क्रिकेट में अंधेरे में नहीं रहना चाहते.
विराट को टेस्ट की टीस!
टेस्ट क्रिकेट से उनके जबरन संन्यास की चर्चाओं के बाद से यह पहली बार है जब कोहली ने इतने खुले तौर पर अपनी भावनाएं जाहिर की हैं. आमतौर पर आक्रामक और आत्मविश्वासी दिखने वाले कोहली इस बार कहीं न कहीं आहत नजर आए. उन्होंने कहा कि अगर उन्हें हर बार अपनी अहमियत साबित करनी पड़े, तो वह उस स्थिति में नहीं हैं यह बयान उनके आत्मसम्मान और आत्मविश्वास दोनों को दर्शाता है. कोहली का यह गुस्सा सिर्फ व्यक्तिगत नहीं है, बल्कि यह उस सिस्टम पर भी सवाल उठाता है, जहां अनुभवी खिलाड़ियों को कभी-कभी असमंजस की स्थिति में रखा जाता है. एक खिलाड़ी जो अपनी तैयारी, अपनी फिटनेस और अपने प्रदर्शन के प्रति ईमानदार है, वह सिर्फ एक चीज चाहता है विश्वास. सूत्रों की माने तो टीम मैनेजमेंट और चीफ सेलेक्टर ने टेस्ट क्रिकेट को लेकर उनकी काबलियत पर सवाल उठाए थे जिसकी वजह से उनको मजबूरी में रिटायर होना पड़ा.
हैंडल विथ केयर
उनकी बातों में एक और महत्वपूर्ण पहलू था कृतज्ञता. कोहली ने यह भी कहा कि वह अपने करियर में मिले हर अवसर के लिए भगवान के आभारी हैं. यह दिखाता है कि उनके अंदर का इंसान अभी भी जमीन से जुड़ा हुआ है, लेकिन एक खिलाड़ी के तौर पर वह सम्मान और स्पष्टता की उम्मीद रखते हैं. विराट कोहली के इस बयान ने एक बहस को जन्म दे दिया है क्या भारतीय क्रिकेट अपने सबसे बड़े मैच-विनर्स में से एक को सही तरीके से हैंडल कर पा रहा है? या फिर यह एक ऐसे अध्याय की शुरुआत है, जहां कोहली खुद अपने रास्ते तय करेंगे? एक बात तो साफ है—विराट कोहली अभी खत्म नहीं हुए हैं. उनके अंदर की आग अभी भी जल रही है, और अगर उसे सही दिशा मिली, तो वह एक बार फिर मैदान पर वही पुराना “किंग कोहली” बनकर उभर सकते हैं.
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मैं, राजीव मिश्रा, वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स कंटेंट की योजना, संपादकीय रणनीति और एंकरिंग की जिम्मेदारी निभाता हूँ. खेल पत्रका…और पढ़ें


