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Ghazipur Bowler Story: गाजीपुर की छोटी क्रिकेट अकादमी से निकलकर IPL की चमक तक पहुंचना आसान नहीं होता, लेकिन सहजानंद स्थित अकादमी में अभ्यास करने वाले अश्वनी राय ने यह कर दिखाया है. चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के नेट बॉलर के रूप में चुने गए अश्वनी आज बड़े खिलाड़ियों के साथ मैदान साझा कर रहे हैं. खास बात यह है कि उनके स्लोअर वन, यॉर्कर और रिवर्स स्विंग ने बल्लेबाजों को खूब छकाया है.
गाजीपुर: चेपॉक स्टेडियम की हरी घास पर सामने थे आईपीएल के खतरनाक हिटर शिवम दुबे और गेंदबाजी छोर से दौड़ रहा था गाजीपुर का एक लड़का. गेंद टप्पा खाकर हवा में बदली और दुबे डिफेंस खेलने को मजबूर हो गए. यह कोई फिल्मी सीन नहीं, बल्कि सहजानंद अकादमी से निकले अश्वनी राय की वो ऑफ-कटर गेंद थी, जिसने CSK नेट्स में बड़े खिलाड़ियों को भी प्रभावित कर दिया. कुछ ऐसी ही हैरतअंगेज और गौरवशाली दास्तां लिखी है गाजीपुर के उभरते हुए राइट आर्म मीडियम पेसर अश्वनी राय ने.
अश्वनी आज गाजीपुर के हर उस युवा के लिए मिसाल बन चुके हैं जो अपनी आंखों में आईपीएल और नीली जर्सी का सपना पाले हुए हैं. चेन्नई सुपर किंग्स के कैंप में बतौर नेट बॉलर शामिल होकर अश्वनी ने अपनी गेंदबाजी का ऐसा लोहा मनवाया कि इंटरनेशनल खिलाड़ी भी उनकी तारीफ करने को मजबूर हो गए है.
शून्य से शुरुआत, तीन गुरुओं का आशीर्वाद
अश्वनी राय का यह सफर इतना आसान नहीं था. जमीन से उठकर आसमान छूने की इस कहानी की शुरुआत गाजीपुर की सहजानंद एकेडमी से हुई. अश्वनी बड़े गर्व से बताते हैं कि आज वो जहां भी हैं, उसमें गाजीपुर जिला क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष शाश्वत सिंह, संजीव सिंह सर और रंजन सिंह सर का बहुत बड़ा योगदान है. अश्वनी कहते हैं, मैं शून्य था, इन लोगों ने मुझे बैट पकड़कर चलाना सिखाया. एसोसिएशन और मेरे कोचों के सपोर्ट के बिना मैं चेन्नई सुपर किंग्स के नेट सेशन तक कभी नहीं पहुंच पाता.
जब ऋतुराज ने थपथपाई पीठ, शिवम दुबे को कराया डिफेंस
अश्वनी राय की ताकत उनकी स्लोवर वन और कटर गेंदें हैं, जिन्हें वो अपनी भाषा में जलेबी बिखेरना कहते हैं. चेन्नई के कैंप में उन्होंने शिवम दुबे, ऋतुराज गायकवाड़ और डेवाल्ड ब्रेविस (बेबी एबी) जैसे खूंखार बल्लेबाजों को नेट पर पानी पिलाया. अश्वनी बताते हैं कि इंटरनेशनल लेवल पर सबसे कठिन गेंदबाजी शिवम दुबे को करना था.
उन्होंने कहा कि शिवम दुबे की रीच बहुत लंबी है और वो खड़े-खड़े लंबे छक्के मारते हैं. लेकिन जब मैंने अपनी कटर और स्लोवर गेंद पर शिवम दुबे जैसे हार्ड-हिटर को डिफेंस करने पर मजबूर किया, तो उन्होंने रुककर मेरी तारीफ की. कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ ने भी मेरी पीठ थपथपाई और कहा कि बस इसी तरह मेहनत करते रहो और डिसिप्लिन बनाए रखो.
पुरानी गेंद से यॉर्कर और रिवर्स स्विंग का मास्टरक्लास
एक मंझे हुए गेंदबाज की तरह अश्वनी अपनी स्किल्स को बखूबी समझते हैं. उनका कहना है कि गेंदबाज की स्किल से पहले उसका डिसिप्लिन और बार-बार एक ही टप्पे पर गेंद फेंकना सबसे बड़ी खासियत होती है. वह बताते हैं कि कैंप में हमें सिखाया गया कि अगर नई गेंद मिले तो उसे ऊपर डालकर स्विंग कराना है, लेकिन जब गेंद पुरानी हो जाए, तो डेथ ओवर्स में स्लोवर वन, यॉर्कर और सबसे खास रिवर्स स्विंग पर काम करना पड़ता है, जो आजकल क्रिकेट में बहुत कम देखने को मिलती है.
गाजीपुर के ट्रायल्स में दिखता है इंटरनेशनल कॉन्फिडेंस
अश्वनी का कहना है कि धोनी और दुनिया के बड़े खिलाड़ियों के कैंप से जो सीख उन्हें मिली है, उसका असर अब उनके खेल में साफ दिखता है. अब जब भी गाजीपुर में कोई लोकल मैच या ट्रायल होता है, तो उनका कॉन्फिडेंस एक अलग ही लेवल पर होता है. अश्वनी की आंखें अब भविष्य पर टिकी हैं. उनका साफ कहना है कि यह तो बस शुरुआत है, आने वाले समय में वो नेट बॉलर की बंदिशों को तोड़कर आईपीएल की मुख्य टीम में बतौर मेन बॉलर गाजीपुर का नाम रोशन करना चाहते हैं.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.


