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शनिचरी अमावस्या और शनि जयंती पर त्रिवेणी शनि मंदिर में उमड़ी श्रद्धा की विशाल भीड़ के बीच भक्तों ने तेल, कपड़े और जूते-चप्पल अर्पित किए. मंदिर में एकत्र तेल किसानों के पशुओं के उपयोग के लिए दिया जाएगा. जबकि कपड़े और जूतों का रीसाइक्लिंग कर फाइल कवर, आरडीएफ ईंधन और जरूरतमंदों के लिए उपयोगी सामग्री तैयार की जाएगी.
शनिचरी अमावस्या के पावन अवसर पर त्रिवेणी स्थित शनि मंदिर में आस्था का अद्भुत सैलाब उमड़ पड़ा. देशभर से लाखों श्रद्धालु भगवान शनि के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे. भक्तों ने अपनी मनोकामनाओं के साथ तेल अर्पित किया और मन्नत पूरी होने पर कपड़े व जूते-चप्पल भी दान स्वरूप छोड़े.
लेकिन इस बार इन चढ़ावों की कहानी खास बन गई. मंदिर में एकत्रित तेल को संग्रहित कर किसानों के पशुओं के उपयोग के लिए उपलब्ध कराया जाएगा. वहीं घाट पर छोड़े गए कपड़े और जूते-चप्पलों को नया जीवन मिलेगा. इनसे फाइल कवर, उपयोगी सामग्री और रीसाइक्लिंग के जरिए ऊर्जा से जुड़े उत्पाद तैयार किए जाएंगे. आस्था अब सेवा और उपयोगिता का नया रूप बन रही है.
24 घंटे मे 1000 लीटर तेल से हुआ भगवान का अभिषेक
शनिचरी अमावस्या और शनि जयंती के शुभ अवसर पर त्रिवेणी शनि मंदिर में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा. देशभर से लाखों श्रद्धालु भगवान शनि के दर्शन और पूजा के लिए पहुंचे. श्रद्धालुओं ने श्रद्धा भाव से शनि देव को तेल अर्पित किया, जिसके चलते महज 24 घंटे में मंदिर में 1000 लीटर से अधिक तेल एकत्र हो गया. मंदिर प्रशासक कार्तिकेय सिंह सेंगर के अनुसार, भक्तों द्वारा बड़ी मात्रा में तेल चढ़ाया गया, जिसकी कीमत एक लाख रुपये से अधिक आंकी गई है. परंपरा के अनुसार इस तेल को संग्रहित कर आसपास के किसानों को पशुओं के उपयोग के लिए उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे मंदिर को भी अच्छी आय प्राप्त होगी.
स्नान के बाद चला सफाई अभियान
शनिचरी अमावस्या पर त्रिवेणी शनि मंदिर में आस्था का अनोखा नजारा देखने को मिला. दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने भगवान शनि की पूजा-अर्चना के बाद मन्नत पूरी होने पर घाट पर जूते-चप्पल और कपड़े दान स्वरूप छोड़ दिए. श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए नगर निगम ने विशेष सफाई अभियान चलाया. 90 से अधिक सफाई मित्रों ने अलग-अलग शिफ्ट में मोर्चा संभाला. जेसीबी मशीनों की मदद से घाटों पर जमा कपड़े और जूते-चप्पलों को डंपर और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर ट्रांसफर स्टेशन भेजा गया. यहां इन वस्तुओं को नया रूप दिया जाएगा. कपड़ों से फाइल कवर बनाए जाएंगे, जूतों से आरडीएफ ईंधन तैयार होगा.जबकि उपयोग योग्य सामान “नेकी की दीवार” के जरिए जरूरतमंदों तक पहुंचाया जाएगा.
जानिए कैसे होगा कपड़ो व जूतों का इस्तेमाल
योगेंद्र सिंह पटेल नगर निगम उपआयुक्त ने बताया कि, जो जूते-चप्पल पूरी तरह खराब हो जाते हैं और दोबारा इस्तेमाल लायक नहीं रहते, उनकी भी एक नई कहानी शुरू होती है. पहले इन्हें सावधानी से सुखाया जाता है, फिर मशीनों की मदद से छोटे-छोटे टुकड़ों में बदला जाता है. इसके बाद इन्हीं बेकार दिखने वाले जूतों से आरडीएफ ईंधन तैयार किया जाता है. यही ईंधन आगे औद्योगिक भट्टियों और बिजली संयंत्रों में ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत के रूप में उपयोग होकर कचरे को नई पहचान देता है.
राजा विक्रमादित्य से जुड़ा है इतिहास
नवग्रह मंदिर के पुजारी राकेश बैरागी ने लोकल 18 को बताया कि यह मंदिर 2000 वर्ष पुराना है. राजा विक्रमादित्य की जब साढ़ेसाती खत्म हुई थी, तो शनि महाराज राजा पर प्रसन्न हुए और यहां सारे ग्रह एक साथ प्रकट हुए और मंदिर में एक साथ विराजमान हुए. तभी से इस मंदिर में लोगों की गहरी आस्था है.भक्त भगवान को लोहा, तिल, नमक, काला कपड़ा, तेल चढ़ाते हैं. इसके अलावा भक्त घाट पर स्नान के बाद पहने हुए कपड़े और जूते-चप्पल को पनौती के रूप में वहीं छोड़ जाते हैं. ऐसा करने की परंपरा सदियों पुरानी है, जिसपर भक्त आज भी अमल करते आ रहे हैं.


