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यूपी पुलिस में प्रमोशन मिलने के बावजूद कई वरिष्ठ अधिकारी अब भी पुराने पदों पर ही कार्य कर रहे हैं. माना जा रहा है कि इंटेलिजेंस और पीएसी में पोस्टिंग को लेकर अभी भी मंथन चल रहे है तो वही कुछ विभाग भी इन तबादलों से नाखुश नजर आ रहे हैं.
यूपी पुलिस में बड़े फेरबदल पर सस्पेंस
Lucknow :उत्तर प्रदेश पुलिस महकमे में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की तैनाती और तबादलों को लेकर लंबे समय से असमंजस की स्थिति बनी हुई है. जहां डीजी स्तर के कई अधिकारी प्रमोट हो चुके हैं, लेकिन उन्हें अब तक नई जिम्मेदारियां नहीं सौंपी गई हैं तो वहीं होमगार्ड, ईओडब्ल्यू, विजिलेंस और इंटेलिजेंस जैसे महत्वपूर्ण विभागों में प्रमुख के पद खाली पड़े हैं. ऐसे में पुलिस विभाग के भीतर अफसरों की पोस्टिंग को लेकर चर्चाओं और अटकलों का दौर तेज हो गया है.
प्रमोशन के बाद भी पुराने पदों पर बने अधिकारी
सूत्रों के मुताबिक विभाग के भीतर कई अहम पदों को लेकर अंदर ही अंदर खींचतान चल रही है. यही वजह है कि प्रमोशन मिलने के बावजूद कई वरिष्ठ अधिकारी अब भी पुराने पदों पर ही कार्य कर रहे हैं. जिसमें वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी आलोक सिंह को डीजी स्तर पर प्रमोट हुए 17 दिन बीत चुके हैं, लेकिन वह अब भी एडीजी जोन कानपुर के पद पर तैनात हैं. इससे पहले 1 मार्च को डीजी स्तर पर प्रमोट हुए तीन अन्य अधिकारी भी अपने पुराने पदों पर ही बने हुए हैं. हालांकि पुलिस महकमे में इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर नई तैनातियों पर फैसला क्यों नहीं हो पा रहा है.
इंटेलिजेंस और पीएसी में पोस्टिंग को लेकर मंथन
सूत्रों के अनुसार डीजी स्तर के एक वरिष्ठ अधिकारी पीएसी और इंटेलिजेंस जैसे प्रभावशाली विभागों में से किसी एक की जिम्मेदारी पाने की कोशिश में हैं वहीं पुलिस विभाग में डीजीपी के बाद डीजी इंटेलिजेंस और पीएसी प्रमुख के पद को काफी अहम माना जाता है. हालांकि 31 मार्च 2023 को डॉ. डी.एस.चौहान के रिटायर होने के बाद से डीजी इंटेलिजेंस के पद पर किसी डीजी स्तर के अधिकारी की नियुक्ति नहीं हुई है. ऐसे में माना जा रहा है कि फिलहाल यह पद खाली ही रखा जा सकता है.
कई अहम विभाग बिना स्थायी मुखिया के हो रहे संचालित
बता दें कि डीजी होमगार्ड का पद 28 फरवरी से खाली पड़ा हुआ है. वहीं अप्रैल में नीरा रावत के रिटायर होने के बाद से डीजी ईओडब्ल्यू की कुर्सी भी खाली है. हालांकि ईओडब्ल्यू प्रमुख का पद तकनीकी रूप से एडीजी स्तर का माना जाता है, लेकिन परंपरा के मुताबिक यहां हमेशा डीजी स्तर के अधिकारी की तैनाती होती रही है. इसके बावजूद अब तक किसी नए अधिकारी को जिम्मेदारी नहीं दी गई है. वही विजिलेंस विभाग में भी स्थायी तैनाती को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है. ऐसे में कई महत्वपूर्ण विभाग फिलहाल बिना स्थायी मुखिया के ही संचालित हो रहे हैं.
स्थायी डीजीपी की नियुक्ति के बाद हो सकता है फैसला
हालांकि पुलिस महकमे में चर्चा है कि उत्तर प्रदेश को स्थायी डीजीपी मिलने के बाद ही बड़े स्तर पर तबादले और नई तैनातियां की जाएंगी. वर्तमान डीजीपी राजीव कृष्णा की मूल तैनाती डीजी विजिलेंस के पद पर है और उन्हें फिलहाल डीजीपी का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है. यदि उनकी नियुक्ति स्थायी डीजीपी के रूप में होती है, तो विजिलेंस प्रमुख का पद खाली होगा और वहां किसी अन्य डीजी स्तर के अधिकारी को तैनात किया जा सकता है. इसके बाद अन्य विभागों में भी फेरबदल का रास्ता साफ हो सकता है.
फिलहाल उत्तर प्रदेश में डीजी स्तर के कुल 14 अधिकारी हैं, लेकिन कई बड़े पद खाली होने के बावजूद नियुक्तियां लंबित हैं. ऐसे में पुलिस महकमे के भीतर अफसरों की पोस्टिंग को लेकर चर्चाएं लगातार बनी हुई हैं.
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