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केरल में वी डी सतीशन बने मुख्यमंत्री, शशि थरूर क्यों नहीं आए

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केरल CM सतीशन के शपथ में राहुल समेत सब गए, मगर शशि थरूर क्यों नहीं गए? क्योंं

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वीडी सतीशन ने सोमवार को केरल के मुख्यमंत्री के रूप में अपने मंत्रिमंडल के साथ शपथ ली. इस मौके पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला, सनी जोसेफ, के. मुरलीधरन समेत कई नेता मौजूद थे. हालांकि, इस समारोह में एक अहम नेता शशि थरूर नहीं पहुंचे.

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केरल में वीडी सतीशन के शपथ ग्रहण समारोह में शशि थरूर शामिल नहीं हुए.

केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) की सरकार बनने के बाद सोमवार को वीडी सतीशन ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने तिरुवनंतपुरम में आयोजित समारोह में उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. सतीशन ने ईश्वर के नाम पर शपथ ली. शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई बड़े नेता मौजूद रहे. कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री पिनारई विजयन, वामपंथी दलों के नेता और भाजपा प्रतिनिधियों ने भी समारोह में हिस्सा लिया.

अमेरिका में हैं शशि थरूर

हालांकि इस बड़े आयोजन में कांग्रेस सांसद शशि थरूर की गैरमौजूदगी ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा. सोशल मीडिया पर भी लोग सवाल पूछने लगे कि आखिर थरूर समारोह में क्यों नहीं पहुंचे. अब इसकी वजह सामने आ गई है. दरअसल, शशि थरूर इन दिनों अमेरिका दौरे पर हैं. वह बोस्टन में अपने पुराने शिक्षण संस्थान स्लेचर स्कूल ऑफ लॉ एंड डिप्लोमेसी में आयोजित दीक्षांत समारोह में शामिल होने गए हैं. थरूर वहां मुख्य संबोधन देने पहुंचे हैं. इसके साथ ही वह अपने बैच के 50 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित रीयूनियन कार्यक्रम में भी हिस्सा ले रहे हैं. थरूर ने 15 मई को ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर जानकारी दे दी थी कि वह पहले से तय कार्यक्रम के कारण मुख्यमंत्री शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं हो पाएंगे.

उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा था- मुझे अफसोस है कि मैं अपने सहयोगी और केरल के नए मुख्यमंत्री वीडी सतीशन के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं हो पा रहा हूं. मैं इस सप्ताहांत बोस्टन में हूं, जहां मुझे अपने अल्मा मेटर फ्लेचर स्कूल ऑफ लॉ एंड डिप्लोमेसी में भाषण देना है. थरूर ने अपने पोस्ट में यह भी कहा कि अमेरिका में वह अपने पुराने दिनों का जश्न मना रहे हैं, जबकि केरल में भविष्य की नई शुरुआत हो रही है. सोमवार सुबह भी उन्होंने सोशल मीडिया पर एक और पोस्ट कर सतीशन और यूडीएफ गठबंधन को शुभकामनाएं दीं.

उधर, केरल में कांग्रेस के लिए यह दिन बेहद अहम माना जा रहा है. करीब एक दशक बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ राज्य की सत्ता में लौटा है. नौ अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव में यूडीएफ ने 140 सदस्यीय विधानसभा में 102 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया. वहीं माकपा के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) को 35 सीटें मिलीं, जबकि भाजपा को तीन सीटों पर जीत मिली.



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