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BCCI ना कोई सरकारी संस्था, न ही फंडिंग लेता है…RTI के दायरे में नहीं बीसीसीआई, CIC का ऐतिहासिक फैसला

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केंद्रीय सूचना आयोग की तरफ से सोमवार को जो बात कही गई उससे भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने राहत की सांस ली. CIC ने ये बात साफ करते हुए कहा कि बीसीसीआई ना तो सरकार से कोई फंडिंग लेता है और ना ही सरकारी संस्था है. ऐसे में ये RTI के दायरे में नहीं आता.

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RTI के दायरे में नहीं बीसीसीआई, CIC का ऐतिहासिक फैसला

नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड इस बार खिलाड़ियों के सलेक्शन नहीं बल्कि उनको लेकर दायर की गई पीआईएल की वजह से चर्चा में है. इस बात को केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) की तरफ से साफ कर दिया गया है कि बीसीसीआई ना तो कोई सरकारी संस्था है और न ही सरकार से किसी तरह की फंडिंग लेता है. इसी वजह से बोर्ड सूचना का अधिकार (RTI) के दायरे से बाहर है.

सूचना आयुक्त पीआर रमेश का यह आदेश मद्रास हाईकोर्ट द्वारा सितंबर 2025 में इस मामले को CIC के पास वापस भेजने के बाद आया है. हाईकोर्ट ने यह फैसला BCCI द्वारा अक्टूबर 2018 के CIC आदेश के खिलाफ दायर अपील की सुनवाई के दौरान दिया था. जिसमें क्रिकेट बोर्ड को ‘सार्वजनिक प्राधिकरण’ माना गया था और RTI के दायरे में लाया गया था.

यह आदेश ऐसे समय आया है जब केंद्र सरकार ने आठ महीने पहले राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक 2025 में संशोधन कर BCCI जैसे खेल संगठनों को RTI के दायरे से बाहर रखने का फैसला किया था. अब केवल उन्हीं खेल संस्थाओं को पारदर्शिता के दायरे में लाया जाएगा, जिन्हें सरकार से फंड मिलता है. अक्टूबर 2018 के एम श्रीधर आचार्यलु के आदेश को पलटते हुए रमेश ने कहा कि BCCI एक स्वायत्त निजी संस्था है. अपने नियमों और विनियमों के तहत चलती है और इसके प्रशासन, प्रबंधन या कार्यों पर सरकार का कोई गहरा या व्यापक नियंत्रण नहीं है.

उन्होंने कहा, “सिर्फ राज्य द्वारा निगरानी या विनियमन से किसी संगठन के निजी स्वरूप को बदलकर उसे RTI के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं कहा जा सकता.” सरकार का BCCI के पदाधिकारियों की नियुक्ति या आंतरिक कामकाज में कोई दखल नहीं है. रमेश ने जोर देकर कहा कि कानून के तहत मिलने वाली टैक्स छूट या अन्य रियायतें ‘महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता’ नहीं मानी जा सकतीं, जब तक कि संस्था पूरी तरह इन्हीं पर निर्भर न हो.

उन्होंने कहा, “BCCI अपनी आय मीडिया राइट्स, स्पॉन्सरशिप और टिकट बिक्री जैसी व्यावसायिक गतिविधियों से हासिल करता है. यह आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर है और सरकार के फंड पर निर्भर नहीं है. इसलिए इसे राज्य द्वारा महत्वपूर्ण रूप से वित्तपोषित नहीं कहा जा सकता.”

आदेश में कहा गया कि BCCI तमिलनाडु सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1975 के तहत पंजीकृत है. न कि किसी कानून के तहत, इसलिए यह केवल ‘व्यक्तियों का निजी संघ’ है और न तो सरकार के स्वामित्व में है, न ही उसके नियंत्रण या वित्तपोषण में.

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Viplove Kumarchief sub editor

विप्लव कुमार 2022 से न्यूज18 के साथ काम कर रहे हैं. रीडर्स के लिए दिन की शुरुआत अच्छी हो इसकी खास जिम्मेदारी उनके कंधे पर होती है. सुबह की शिफ्ट में आकर पिछले दिन हुई रोचक घटना से लेकर पूरे दिन होने वाली गतिविध…और पढ़ें



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