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19 मई 1987 को फिजी के नादी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एयर न्यूजीलैंड फ्लाइट 24 अचानक दुनिया की सबसे रहस्यमयी हाईजैक घटनाओं में बदल गई. अमजद अली नाम का एक व्यक्ति डायनामाइट लेकर विमान के कॉकपिट में घुस गया. करीब छह घंटे तक चले तनाव के बाद 105 यात्रियों की जान बच गई, लेकिन इस घटना का सबसे चौंकाने वाला मोड़ बाद में सामने आया.
फिजी के नादी एयरपोर्ट की शांत रात में कशिश अखबार में बोइंग 747 की तस्वीर देख रही थी. समर बताता है कि यह रात जल्द ही डर और रहस्य में बदलने वाली थी.

एयर न्यूज़ीलैंड फ्लाइट 24 टोक्यो से ऑकलैंड जा रही थी. फिजी में फ्यूल भरने के दौरान 105 यात्री आराम से सफर का इंतजार कर रहे थे.

एयरपोर्ट स्टाफ अमजद अली हाथ में बैग लेकर एयरक्राफ्ट में दाखिल हो गया. चूंकि वह भी फ्यूल फिलिंग स्टाफ से था, लिहाजा उस पर किसी को शक नहीं हुआ.
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अमजद अली के बैग में डायनामाइट था. अगर धमाका होता, तो विमान में बैठे सभी यात्रियों और एयरपोर्ट पर मौजूद लोगों की जान खतरे में पड़ सकती थी.

अमजद अली कॉकपिट में पहुंचा और डायनामाइट दिखाकर पायलटों को धमकाने लगा. उसने कहा कि मांगें नहीं मानी गईं, तो वह पूरा विमान उड़ा देगा.

हाईजैकर ने फिजी के अपदस्थ प्रधानमंत्री और 27 मंत्रियों की रिहाई मांगी. साथ ही उसने खुद को सुरक्षित लीबिया भेजने की मांग रखी और बिल्कुल शांत दिखाई देता रहा.

स्थिति बिगड़ने पर यात्रियों में डर फैल गया. कई लोग रोने लगे, जबकि तीन क्रू मेंबर्स आखिर तक विमान में रहकर सभी की जान बचाने की कोशिश करते रहे.

करीब छह घंटे तक विमान में तनाव बना रहा. बाहर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट थीं, जबकि अंदर मौजूद क्रू मेंबर्स हर पल मौत के खतरे के बीच शांत बने रहे.

दोपहर में मौका मिलते ही फ्लाइट इंजीनियर ग्रेम वॉल्श ने कांच की भारी बोतल से हाईजैकर के सिर पर हमला कर दिया. उसी पल पूरी कहानी बदल गई.

बोतल लगते ही कॉकपिट में संघर्ष शुरू हो गया. तीनों क्रू मेंबर्स ने मिलकर अमजद अली को काबू किया और बिना धमाके के सभी लोगों की जान बच गई.

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि विमान हाईजैक करने वाला अमजद अली बाद में फिजी की संसद का सदस्य बना और उसे न्यूजीलैंड की नागरिकता भी मिली.

एक कांच की बोतल ने सैकड़ों लोगों की जान बचाई. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही रहा कि अपराधी बाद में सत्ता तक कैसे पहुंच गया.

19 मई 1987 की यह घटना सिर्फ हाईजैक नहीं, बल्कि साहस, डर और व्यवस्था पर उठे सवालों की कहानी बन गई, जिसे दुनिया आज भी याद करती है.


