Last Updated:
Arhar Ki Kheti: अरहर एक ऐसी फसल है. जिसकी खेती करते हुए किसान कम समय और बेहद कम लागत में तगड़ा मुनाफा कमा सकते हैं व्यावसायिक रूप से अरहर की खेती करने वाले किसानों को वैज्ञानिक विधि अपनाते हुए कुछ ऐसे तरीके इस्तेमाल के सकते है जिससे वह मात्रा आदि लागत में दोगुनी पैदावार प्राप्त कर सकते हैं.
अगर आप किसान है और अरहर की खेती कर रहे है तो पारंपरिक तरीकों के इतर किसान वैज्ञानिक विधि का इस्तेमाल करते हुए अपने फसल की पैदावार को बढ़ा सकते है. जिससे उन्हें कम लागत में ही अधिक पैदावार प्राप्त करने का मौका मिलेगा और वह अपनी आय को बढ़ाने में भी आसानी से कामयाब हो सकेंगे.

अरहर एक ऐसी फसल है जिसकी मार्केट में जबरदस्त डिमांड रहती है. ऐसे में किसान पारंपरिक खेती की बजाए स्मार्ट खेती को अपनाकर अपने फसल के उत्पादन को आधी लागत में दोगुना कर सकते है और कई गुना तक अधिक मुनाफा कमा सकते है. किसी भी फसल की अच्छी और गुणवत्ता युक्त पैदावार प्राप्त करने के लिए सही बीज का चयन बेहद आवश्यक होता है.

फसल बुवाई से पहले किसान को हमेशा उन्नत किस्म के बीज का चयन करना चाहिए. जिससे पैदावार अधिक प्राप्त हो सके. कृषि एक्सपर्ट डॉ. अखिलेश बताते है कि किसी भी फसल की बुवाई से पहले यदि वैज्ञानिक तरीकों से बीजों का उपचारण सही ढंग से किया जाए तो इससे फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है. साथ ही साथ उत्पादन भी अधिक प्राप्त किया जा सकता है.
Add News18 as
Preferred Source on Google

किसानों के द्वारा पारंपरिक सिंचाई पद्धति का इस्तेमाल करने की बजाय अब ड्रिप इरिगेशन सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है. ड्रिप इरिगेशन सिस्टम आज के समय में पानी की बचत के साथ-साथ पौधों को उनकी जरूरत के अनुसार पानी पहुंचाने में बेहद फायदेमंद साबित हो रहा है. ऐसे में खेतों की सिंचाई के लिए यह सिस्टम किसानों के लिए फायदेमंद होने के साथ-साथ फसलों के लिए भी बेहद उपयोगी साबित हो रहा है.

अरहर की खेती करने वाले किसान पारंपरिक विधि के अलावा मेड विधि का उपयोग कर सकते है. मेड विधि अरहर की उत्पादन के लिए बेहद कारगर साबित हो रही है. इस तकनीक में पौधे को मेड पर लगाया जाता है. जिससे मिट्टी में अधिक समय तक नमी बनी रहती है और खेतों से अतिरिक्त जल की भी निकासी आसानी से की जा सकती है.

यह तकनीक जहां किसानों के लिए बेहद कम खर्चीली होती है. वहीं खेत में रासायनिक खाद्य और दवाइयां का छिड़काव भी काम हो जाता है. जिससे फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है और फसल ऑर्गेनिक बनी रहती है. फसल की बेहतर गुणवत्ता के कारण बाजार में किसानों को उनकी फसल का मूल्य भी अच्छा प्राप्त हो सकता है. जिससे उनकी कमाई में बेहतरीन इजाफा देखने को मिल सकता है.

सिंचाई की इस तकनीक से हर पौधे तक पानी की पहुंच बेहतर तरीके से सुनिश्चित की जाती है. जिससे पौधों का विकास तेजी से होता है और फलियां की संख्या में भी तगड़ा इजाफा देखने को मिलता है. जिससे उत्पादन बेहतर होता है और इसका लाभ सीधे किस को देखने को मिलता है. इसके अलावा फसल को समय के अनुसार कीटों से बचना भी बेहद आवश्यक होता है.

फसल को कीटो से बचने के लिए किसान जहां आमतौर पर रासायनिक दावों का छिड़काव करते है वहीं इसके अलावा वह इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट जैसी तकनीक का उपयोग कर सकते है. किसान अपने खेत में फेरोमोन ट्रैप और लाइट ट्रैप जैसे मॉडर्न तकनीक का इस्तेमाल करते हुए पौधों पर लगने वाले हानिकारक कीटों को कंट्रोल कर सकते है.

सही तरीके से बीजों का उच्चारण करने से पौधों की इम्युनिटी बढ़ती है और समय-समय पर लगने वाली कई तरह की बीमारियों से फसल को आसानी से बचाया जा सकता है. फसलों पर बीमारियों के लगने का खतरा जितना कम होगा. उत्पादन उतना ही अधिक और बेहतर प्राप्त किया जा सकता है. सीड ट्रीटमेंट एक ऐसी पद्धति है जो न सिर्फ फसल को मजबूती देती है बल्कि कीटनाशकों पर होने वाले खर्च को भी बचाती है.


