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Test Cricket Records: ‘टेस्ट’ को क्रिकेट का सबसे कठिन फॉर्मेट माना जाता है. पांच दिनों तक चलने वाले मैच में खिलाड़ियों के धैर्य, तकनीक और मानसिक मजबूती की असली परीक्षा होती है. क्रिकेट के इतिहास में कई बड़े-बड़े बल्लेबाज आए और गए, लेकिन एक टेस्ट मैच के सभी 5 दिन बल्लेबाजी के लिए क्रीज पर आने की उपलब्धि बेहद कम खिलाड़ियों को नसीब हुई है. इस लिस्ट में वैसे तो इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के खिलाड़ियों का बोलबाला है, लेकिन भारतीय क्रिकेट इतिहास के तीन ऐसे नाम भी शामिल हैं, जिन्होंने इस स्पेशल लिस्ट में अपना नाम दर्ज कराया. आइए जानते हैं इतिहास के उन 13 क्रिकेटरों के बारे में जिन्होंने टेस्ट मैच के हर एक दिन मैदान पर बल्ले से जौहर दिखाया.
भारत के मोटगनहल्ली जयसिम्हा दुनिया के पहले ऐसे बल्लेबाज थे, जिन्होंने टेस्ट मैच के सभी पांचों दिन बल्लेबाजी करने का अनोखा रिकॉर्ड बनाया था. 1960 में कोलकाता के ऐतिहासिक ईडन गार्डन्स मैदान पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उन्होंने यह कारनामा किया. मैच के पहले दिन वो नौवें नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे और 20 रन पर नाबाद रहे. इसके बाद मैच की परिस्थितियों के कारण भारत को दूसरी पारी में जल्दी बल्लेबाजी करनी पड़ी और जयसिम्हा ने दूसरी पारी में शानदार 74 रनों की पारी खेली.

इंग्लैंड के महान और सबसे जिद्दी बल्लेबाजों में शुमार जियोफ बॉयकॉट इस सूची में दूसरे स्थान पर आते हैं. 1977 में एशेज सीरीज के दौरान ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ नॉटिंघम टेस्ट में बॉयकॉट ने पहली पारी में शतकीय पारी (107 रन) खेली. इसके बाद मैच के उतार-चढ़ाव और ओवरों के खेल के चलते जब इंग्लैंड दूसरी पारी में उतरा, तो बॉयकॉट ने एक बार फिर मोर्चा संभाला और 80 रन बनाकर नाबाद रहे. वह मैच के पांचों दिन बल्लेबाजी के लिए क्रीज पर आए थे.

क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले लॉर्ड्स मैदान पर ऑस्ट्रेलिया के किम ह्यूज ने इंग्लैंड के खिलाफ यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की थी. 1980 में शताब्दी टेस्ट के दौरान किम ह्यूज ने पहली पारी में शानदार 117 रन बनाए थे, जिसके लिए उन्हें क्रीज पर काफी समय बिताना पड़ा. इसके बाद दूसरी पारी में भी उन्होंने इंग्लैंड के गेंदबाजों की खबर लेते हुए 84 रनों की बेहतरीन पारी खेली और मैच के पांचों दिन बल्लेबाजी के करने वाले पहले ऑस्ट्रेलियाई बने.
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लॉर्ड्स का मैदान एक बार फिर इस अनोखे रिकॉर्ड का गवाह बना जब इंग्लैंड के मध्यक्रम के बल्लेबाज एलन लैम्ब ने वेस्टइंडीज के खतरनाक तेज गेंदबाजों के सामने पांचों दिन बल्लेबाजी के लिए उतरना पड़ा. 1980 के उस दौर में वेस्टइंडीज की टीम घातक तेज गेंदबाजों से भरी हुई थी. लैम्ब पहली पारी में केवल 23 रन ही बना सके थे, लेकिन दूसरी पारी में उन्होंने शानदार वापसी की और मजबूत विंडीज आक्रमण के खिलाफ 110 रनों की शतकीय पारी खेलकर इतिहास रच दिया.

भारत के पूर्व ऑलराउंडर और मुख्य कोच रवि शास्त्री इस एलीट क्लब में शामिल होने वाले दूसरे भारतीय बल्लेबाज थे. साल 1984 के आखिरी दिन शुरू हुए कोलकाता टेस्ट में इंग्लैंड के खिलाफ शास्त्री ने बतौर ओपनर मैदान संभाला था. उन्होंने पहली पारी में धीमी और बेहद सूझबूझ भरी बल्लेबाजी करते हुए 111 रनों का शतक जड़ा. बारिश और खराब रोशनी से प्रभावित इस मैच में भारत को दूसरी पारी में भी बल्लेबाजी का मौका मिला, जहां शास्त्री 7 रन बनाकर नाबाद रहे और पांचों दिन बैटिंग करने का रिकॉर्ड पूरा किया.

वेस्टइंडीज के सलामी बल्लेबाज एड्रियन ग्रिफिथ ने सदी के अंत में न्यूजीलैंड के खिलाफ हैमिल्टन टेस्ट में यह कारनामा किया था. 1999 में ग्रिफिथ ने पहली पारी में ठोस बल्लेबाजी का प्रदर्शन करते हुए 114 रनों की बेहतरीन शतकीय पारी खेली थी. न्यूजीलैंड की मजबूत गेंदबाजी के सामने उन्होंने विकेट के एक छोर को संभाले रखा. हालांकि, दूसरी पारी में वह बड़ी पारी नहीं खेल पाए और 18 रन पर आउट हो गए, लेकिन तब तक उनका नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुका था.

इंग्लैंड के दिग्गज ऑलराउंडर एंड्रयू फ्लिंटॉफ ने 2006 में भारत के खिलाफ मोहाली टेस्ट में कप्तानी करते हुए बल्ले से यह अनोखा कमाल किया था. फ्लिंटॉफ अमूमन अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के लिए जाने जाते थे, लेकिन भारतीय स्पिनरों और परिस्थितियों के सामने उन्होंने गजब का संयम दिखाया. पहली पारी में उन्होंने जुझारू 70 रन बनाए और दूसरी पारी में भी अर्धशतक (51 रन) ठोककर मैच के सभी पांच दिन क्रीज पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई.

दक्षिण अफ्रीका के सलामी बल्लेबाज अल्विरो पीटरसन वेलिंगटन के मैदान पर न्यूजीलैंड के खिलाफ इस खास सूची का हिस्सा बने. 2012 में पीटरसन ने पहली पारी में कीवी गेंदबाजों को छकाते हुए 156 रनों की विशाल और मैराथन पारी खेली, जिसके कारण खेल के शुरुआती तीन दिन उन्हीं के इर्द-गिर्द घूमते रहे. इसके बाद दक्षिण अफ्रीका की दूसरी पारी में उन्होंने 39 रन बनाए और मैच के पांचों दिन बल्लेबाजी करने वाले एकमात्र प्रोटियाज (दक्षिण अफ्रीकी) खिलाड़ी बने.

भारत के चेतेश्वर पुजारा इस सूची में शामिल होने वाले सबसे हालिया भारतीय हैं. दिलचस्प बात यह है कि भारत के तीनों खिलाड़ियों (जयसिम्हा, शास्त्री और पुजारा) ने यह कारनामा कोलकाता के ईडन गार्डन्स मैदान पर ही किया है. 2017 में खेले गए श्रीलंका के खिलाफ इस मैच में भारी बारिश के कारण खेल बार-बार बाधित हो रहा था. पुजारा पहली पारी में जब भारत के विकेट ताश के पत्तों की तरह गिर रहे थे, तब 52 रन बनाकर डटे रहे. दूसरी पारी में भी उन्होंने तकनीक का शानदार मुजाहिरा पेश करते हुए 22 रन बनाए.

एशेज सीरीज के रोमांच के बीच इंग्लैंड के खब्बू ओपनर रोरी बर्न्स ने ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों के दांत खट्टे किए थे. 2019 में बर्मिंघम टेस्ट की पहली पारी में बर्न्स ने बेहद धीमी, लेकिन असरदार 133 रनों की पारी खेली, जिसने इंग्लैंड को मैच में बनाए रखा. मैच के चौथे और पांचवें दिन की परिस्थितियों के बीच इंग्लैंड को जब दूसरी पारी खेलनी पड़ी, तो बर्न्स ने फिर से ओपनिंग की और 11 रन बनाए.

वेस्टइंडीज के क्रेग ब्रैथवेट अपनी कछुआ गति की बल्लेबाजी और क्रीज पर घंटों बिताने के लिए जाने जाते हैं. जिम्बाब्वे के खिलाफ 2023 में हुए बुलावायो टेस्ट में उन्होंने पहली पारी में तेज गेंदबाजों और स्पिनरों को थकाते हुए 182 रनों की कप्तानी पारी खेली. इसके बाद मैच के अंतिम चरणों में वेस्टइंडीज की दूसरी पारी के दौरान उन्होंने 25 रन बनाए और टेस्ट के पांचों दिन मैदान पर बल्ला थामने का गौरव हासिल किया.

क्रिकेट इतिहास में यह एकमात्र ऐसा मौका था जब एक ही टेस्ट मैच में दो अलग-अलग बल्लेबाजों ने यह रिकॉर्ड एक साथ बनाया. महान शिवनारायण चंद्रपॉल के बेटे तेजनारायण चंद्रपॉल ने कप्तान ब्रैथवेट के साथ मिलकर न केवल पहले विकेट के लिए विशाल साझेदारी की, बल्कि पहली पारी में नाबाद 207 रनों का दोहरा शतक जड़ दिया. इसके बाद दूसरी पारी में भी उन्होंने ओपनिंग की और 15 रन बनाए. इन दोनों विंडीज ओपनर्स ने जिम्बाब्वे के गेंदबाजों को खूब छकाया.

इस ऐतिहासिक लिस्ट में शामिल होने वाले सबसे आखिरी बल्लेबाज ऑस्ट्रेलिया के अनुभवी ओपनर उस्मान ख्वाजा हैं. 2023 की मशहूर एशेज सीरीज के पहले ही मैच में बर्मिंघम के मैदान पर ख्वाजा ने अंग्रेजों के ‘बैजबॉल’ का जवाब पारंपरिक टेस्ट क्रिकेट से दिया. उन्होंने पहली पारी में इंग्लैंड के गेंदबाजों के सामने दीवार बनते हुए 141 रनों का बेजोड़ शतक बनाया. इसके बाद मैच के अंतिम दिनों में जब ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए एक कड़े लक्ष्य का पीछा करना था, तब ख्वाजा ने दूसरी पारी में भी 65 रनों की मैच जिताऊ पारी खेली और इस रिकॉर्ड लिस्ट में अपना नाम दर्ज करा लिया.


