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OPINION: हाईलाइट्स पैकेज बन गया है IPL, बॉलर्स के लिए बोरिंग होता टी-20, फॉर्मेट के फ्यूचर पर अब उठने लगे सवाल

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नई दिल्ली. क्रिकेट को अक्सर बल्ले और गेंद का खेल कहा जाता है, लेकिन आज के टी20 दौर में ऐसा लगता है कि यह संतुलन कहीं खो सा गया है. “गेंद” शब्द जैसे धीरे-धीरे महत्वहीन होता जा रहा है. हाई-रिस्क, हाई-रिवार्ड वाले इस आधुनिक टी20 प्रारूप में सारा ध्यान सिर्फ बल्लेबाज़ों पर केंद्रित हो गया है. सवाल यह है कि यह जोखिम किसके लिए है और इनाम किसे मिल रहा है गेंदबाज़ तो मानो सिर्फ दर्शक बनकर रह गए हैं.

आज की टी20 क्रिकेट में अगर जोखिम सफल हो जाता है, तो हमें 15 गेंदों में अर्धशतक देखने को मिलते हैं और 220 से ज्यादा के स्कोर आम हो गए हैं लेकिन इस पूरे खेल में गेंदबाज़ कहाँ हैं? ऐसा लगता है जैसे हर मैच सिर्फ हाइलाइट्स पैकेज बनकर रह गया है, जिसमें गेंदबाज़ों की भूमिका लगभग खत्म हो चुकी है. कई मैचों में तो पहले छह ओवरों में ही 100 रन तक बन जाते हैं, जो पूरी तरह से असंतुलित स्थिति को दर्शाता है.

गेंदबाज हो रहे हैं गेम से बाहर!

उदाहरण के तौर पर पंजाब किंग्स के पास अर्शदीप सिंह और मार्को यानसेन जैसे विश्व स्तरीय गेंदबाज़ हैं, वहीं सनराइजर्स हैदराबाद के पास भी मजबूत गेंदबाज़ी आक्रमण है इसके बावजूद वैभव सूर्यवंशी ने 26 गेंदों में 78 रन ठोक दिए, अभिषेक शर्मा ने भी वैसा ही प्रदर्शन किया और फिर प्रियांश आर्य ने भी उसी अंदाज़ में बल्लेबाज़ी की क्या गेंदबाज़ सिर्फ मार खाने के लिए हैं? क्या वे सिर्फ मनोरंजन का साधन बनकर रह गए हैं?यह सवाल भी अहम है कि क्या यह प्रारूप वास्तव में खेल को रोचक बना रहा है या फिर इसे एकतरफा और उबाऊ बना रहा है.  अगर गेंदबाज़ों को सशक्त नहीं किया गया, तो यह खेल लंबे समय में नुकसान उठा सकता है.

भारी बैट, छोटे मैदान गेंदबाजों का बड़ा नुकसान

टेस्ट क्रिकेट आज भी इसलिए महान है क्योंकि उसमें बल्ले और गेंद के बीच असली मुकाबला देखने को मिलता है. गेंदबाज़ और बल्लेबाज़ दोनों बराबरी के हिस्सेदार होते हैं. स्विंग होती गेंद, स्लिप में खड़े फील्डर और बल्लेबाज़ की परीक्षा ये सभी मिलकर खेल को रोमांचक बनाते हैं लेकिन टी20 का नया रूप इस संतुलन को खत्म करता जा रहा है. छोटे मैदान, छोटी बाउंड्री और भारी बल्ले गेंदबाज़ों के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं.

सिर्फ रन बनाने से नहीं बढ़ेगा रोमांच

अब सवाल यह है कि इस स्थिति को कैसे सुधारा जाए? क्या हम यूँ ही देखते रहेंगे कि टी20 में पार स्कोर 250 तक पहुँच जाए? इसका कोई आसान जवाब नहीं है, लेकिन यह जरूरी है कि खेल में संतुलन बना रहे और बल्लेबाज़ व गेंदबाज़ दोनों बराबर के हिस्सेदार हों.  फिलहाल तो स्थिति यह है कि बेहतरीन गेंदबाज़ भी अपने चार ओवरों में 45-50 रन लुटा रहे हैं, और जिन बल्लेबाज़ों को टेस्ट क्रिकेट में 15 गेंद खेलना भी मुश्किल होता है, वे यहाँ दबदबा बना रहे हैं.

बॉलर्स के लिए बने प्लान 

आईपीएल जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट के लिए यह बेहद जरूरी है कि क्रिकेट का स्तर उच्चतम बना रहे. अभी हालात ऐसे हैं कि 70 रन के पावरप्ले और 200+ स्कोर आम हो गए हैं, जिन्हें 18वें ओवर तक आसानी से हासिल कर लिया जाता है. ऐसा नहीं होना चाहिए कि हम सिर्फ बल्लेबाज़ों को ही सितारा बनाएं और गेंदबाज़ों को एक कमजोर सहायक भूमिका में धकेल दें.  आने वाले समय में इस समस्या का समाधान कैसे निकाला जाता है, यह बेहद महत्वपूर्ण होगा क्योंकि अगर यही हाई-रिस्क, हाई-रिवार्ड टी20 प्रारूप वैश्विक स्तर पर मानक बन गया, तो क्रिकेट का संतुलन और उसकी असली खूबसूरती खतरे में पड़ सकती है.



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