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यूपी में कहां है सुग्रीव का मंदिर? त्रेतायुग में भरत ने कराया था निर्माण, जानें क्या है मान्यता

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Ayodhya Latest News: आज भी सुग्रीव किला मंदिर में भगवान श्रीराम को राजा के रूप में विराजमान माना जाता है और उनके साथ सुग्रीव जी की भी पूजा की जाती है. मंदिर में विधि-विधान से दोनों की आराधना होती है जो भक्तों के लिए अत्यंत विशेष अनुभव होता है.

अयोध्या: मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की पावन जन्मस्थली अयोध्या केवल एक धार्मिक नगरी ही नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और पौराणिक कथाओं का अद्भुत संगम है. यहां स्थित प्रत्येक मंदिर अपने भीतर किसी न किसी दिव्य कथा को समेटे हुए है. जो श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देता है. इन्हीं पवित्र स्थलों में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है सुग्रीव किला मंदिर, जो रामलला के प्रवेश द्वार के पास स्थित है और जिसकी महत्ता त्रेता युग से जुड़ी मानी जाती है.

सुग्रीव किला मंदिर के महंत अनंत पदमनाभाचार्य ने बताया कि सुग्रीव किला मंदिर का संबंध वाल्मीकि रामायण में वर्णित घटनाओं से जोड़ा जाता है. मान्यता के अनुसार जब भगवान श्रीराम ने लंका पर विजय प्राप्त कर अयोध्या लौटने का निर्णय लिया तो उनके साथ वानर सेना, हनुमान जी और वानरराज सुग्रीव भी अयोध्या आए थे. यह वही समय था जब 14 वर्षों का वनवास पूर्ण कर श्रीराम अपने राज्य में पुनः प्रवेश कर रहे थे. कथा के अनुसार श्रीराम के अयोध्या आगमन की सूचना मिलते ही उनके छोटे भाई भरत ने उनके स्वागत के लिए एक भव्य महल का निर्माण कराया. यह महल वर्तमान राम मंदिर के समीप स्थित बताया जाता है. कहा जाता है कि यह निर्माण केवल स्वागत के लिए ही नहीं, बल्कि श्रीराम के राजतिलक और उनके गौरवशाली पुनः स्थापन का प्रतीक भी था.

राजा के रूप में होती है प्रभु राम की सेवा
जब श्रीराम अयोध्या पहुंचे तो उन्होंने अपने प्रिय मित्र और सहयोगी सुग्रीव के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए भरत को आदेश दिया कि यह भव्य महल सुग्रीव को दे दिया जाए. ताकि वे वहीं निवास कर सकें. लेकिन सुग्रीव ने अत्यंत विनम्रता के साथ एक शर्त रखी. उन्होंने कहा कि वे तभी इस महल में रहेंगे जब स्वयं श्रीराम वहां राजा के रूप में विराजमान रहेंगे.यह शर्त उनकी प्रभु के प्रति अटूट भक्ति और समर्पण को दर्शाती है.

अद्भुत है मान्यता
इसी मान्यता के आधार पर आज भी सुग्रीव किला मंदिर में भगवान श्रीराम को राजा के रूप में विराजमान माना जाता है और उनके साथ सुग्रीव जी की भी पूजा की जाती है. मंदिर में विधि-विधान से दोनों की आराधना होती है जो भक्तों के लिए अत्यंत विशेष अनुभव होता है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस पवित्र स्थल पर दर्शन और पूजन करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं. शत्रुओं का नाश होता है और भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है. यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भक्ति, मित्रता और समर्पण का जीवंत प्रतीक है. अयोध्या आने वाले भक्तों के लिए सुग्रीव किला मंदिर एक ऐसा स्थान है जहां इतिहास और आस्था एक साथ जीवंत हो उठते हैं और जहां प्रभु श्रीराम की दिव्यता का अनुभव गहराई से किया जा सकता है.

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Abhijeet Chauhan

न्‍यूज18 हिंदी डिजिटल में कार्यरत. उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल और हरियाणा की पॉलिटिक्स और क्राइम खबरों में रुचि. वेब स्‍टोरी और AI आधारित कंटेंट में रूचि. राजनीति, क्राइम, मनोरंजन से जुड़ी खबरों को लिखने मे…और पढ़ें



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