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Jamun Farming Tips after Flowering: जामुन की खेती करने वाले किसानों के लिए बौर आने के बाद का समय सबसे जरूरी होता है, क्योंकि इसी दौरान की गई एक छोटी सी लापरवाही पूरी फसल को बर्बाद कर सकती है. जिला उद्यान अधिकारी डॉ. पुनीत कुमार पाठक के अनुसार, बौर आने पर सिंचाई का सही संतुलन, पोटाश का उपयोग और जैविक खाद का प्रयोग जामुन की मिठास और चमक को कई गुना बढ़ा सकता है. जानिए, तुड़ाई से लेकर कोल्ड स्टोरेज तक की वो खास तकनीकें, जिनसे जामुन की शेल्फ लाइफ बढ़ाकर किसान अधिक मुनाफा कमा सकते हैं.
जामुन में बौर आने के बाद नमी का संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है. इस दौरान अधिक पानी देने से फूल गिर सकते हैं और बिल्कुल पानी न देने से वे सूख सकते हैं. हल्की सिंचाई का ऐसा चक्र बनाएं जिससे मिट्टी में नमी बनी रहे. फूल से फल बनने की प्रक्रिया यानि फ्रूट सेटिंग के दौरान नमी का सही स्तर यह सुनिश्चित करता है कि फल समय से पहले न गिरें.

जिला उद्यान अधिकारी डॉ पुनीत कुमार पाठक ने बताया कि फलों की चमक और मिठास बढ़ाने में पोटाश का रोल अहम रहता है. बौर आने के बाद जब छोटे फल दिखने लगें, तब मिट्टी में पोटाश और जिंक का छिड़काव करें. यह न केवल फल के गूदे को रसीला बनाता है, बल्कि फल के छिलके को भी मजबूती देता है. पोषण की कमी होने पर फल छोटे रह जाते हैं और उनकी बाजार वैल्यू कम हो जाती है.

रासायनिक उर्वरकों के बजाय अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट का प्रयोग करें. जैविक खाद मिट्टी की संरचना में सुधार करती है और जामुन के प्राकृतिक स्वाद को निखारती है. पौधों के थालों में जैविक मल्चिंग करने से वाष्पीकरण कम होता है और जड़ों को निरंतर पोषण मिलता रहता है. यह तरीका न केवल पैदावार बढ़ाता है बल्कि लागत में भी कमी लाता है.
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जामुन की फसल पर अक्सर ‘लीफ रोलर’ और ‘हॉपर’ जैसे कीटों का हमला होता है. बौर के समय और फल बनने की शुरुआत में सावधानी जरूरी है. रासायनिक कीटनाशकों के बजाय नीम के तेल 3 से 5 ml प्रति लीटर पानी का घोल बनाकर छिड़काव करें जो सुरक्षित और प्रभावी होता है. यह मधुमक्खियों जैसे मित्र कीटों को नुकसान पहुंचाए बिना हानिकारक कीटों को नियंत्रित करता है, जिससे परागण की प्रक्रिया भी बाधित नहीं होती है.

जामुन एक परागण-निर्भर फसल है. बौर आने के समय बगीचे में कीटनाशकों का अंधाधुंध प्रयोग न करें, क्योंकि यह मधुमक्खियों को दूर भगा देता है. अगर संभव हो, तो बगीचे के आसपास मधुमक्खी के बक्से रखें. बेहतर परागण से न केवल फलों की संख्या बढ़ती है, बल्कि फलों का आकार भी एकसमान रहता है. प्राकृतिक परागण बंपर पैदावार के लिए जरूरी है.

फलों की गुणवत्ता के लिए धूप का जड़ों और टहनियों तक पहुंचना जरूरी है. बौर आने से पहले सूखी और बीमार टहनियों की हल्की छंटाई कर दें. जब फल गुच्छों में आने लगें, तो यह ध्यान रखें कि पौधों के बीच हवा का आवागमन बेहतर रहे. घनी टहनियों के बीच फल अक्सर छोटे रह जाते हैं और उनमें फंगस लगने का डर रहता है. सही कैनोपी प्रबंधन से फल चमकदार बनते हैं.

जामुन एक नाजुक फल है, इसलिए इसकी तुड़ाई का समय बहुत महत्वपूर्ण है. जब फल पूरी तरह गहरे बैंगनी या काले हो जाएं, तभी उन्हें तोड़ें. तुड़ाई हमेशा सुबह के ठंडे समय में करें ताकि उनकी ताजगी बनी रहे. तुड़ाई ग्रेडिंग करके पैकेजिंग करें. सीधे स्थानीय बाजारों या जूस बनाने वाली फैक्ट्रियों से संपर्क कर आप अपनी इस बंपर पैदावार को बेच सकते हैं.

जामुन एक जल्दी खराब होने वाला फल है, इसलिए इसकी शेल्फ लाइफ बढ़ाना चुनौतीपूर्ण होता है. तुड़ाई के बाद फलों को सीधा धूप में न रखें, बल्कि किसी ठंडी और छायादार जगह पर फैला दें. जामुन को ज्यादा दिनों तक फ्रेश रखने के बांस की टोकरियों में रखना चाहिए. अगर आप इसे 5°C से 7°C के तापमान और उच्च आर्द्रता वाले कोल्ड स्टोरेज में रखते हैं, तो यह 2 से 3 सप्ताह तक खराब नहीं होता है. बिना धोए फ्रिज में रखने से इसकी ताजगी बरकरार रहती है.


