10.2 C
Munich

अब शहरी इलाकों का होगा तेजी से विकास, शहरी विकास मंत्रालय ने बनाया खास प्‍लान

Must read


Last Updated:

अब शहरी इलाकों को तेजी से विकास हो सकेगा. इसके लिए केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अर्बन चैलेंज फंड (यूसीएफ) के ऑपरेशनल गाइडलाइंस और लोन रिपेमेंट गारंटी सब-स्कीम (सीआरजीएसएस) का औपचारिक लॉन्च किया है.

Zoom

र्बन चैलेंज फंड के ऑपरेशनल गाइडलाइंस और लोन रिपेमेंट गारंटी सब-स्कीम लांच के मौके पर केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर.

नई दिल्ली. अब शहरी इलाकों को तेजी से विकास हो सकेगा. इसके लिए केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अर्बन चैलेंज फंड (यूसीएफ) के ऑपरेशनल गाइडलाइंस और लोन रिपेमेंट गारंटी सब-स्कीम (सीआरजीएसएस) का औपचारिक लॉन्च किया है. यह पहल देश में अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर की फाइनेंसिंग को नई दिशा देने की महत्वपूर्ण कोशिश मानी जा रही है. इस कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया. मोहन यादव और मोहन चरण मांझी ने वीडियो मैसेज के जरिए अपने विचार साझा किए.

केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि अर्बन चैलेंज फंड भारत के अर्बन डेवलपमेंट के अप्रोच में ‘रिवोल्यूशनरी बदलाव’ का प्रतीक है. यह फंड केवल ग्रांट देने तक सीमित नहीं है, बल्कि पब्लिक फंड्स के जरिए बड़े इन्वेस्टमेंट को आकर्षित कर शहरों को इकॉनॉमिकली स्ट्रॉन्ग और इन्वेस्टमेंट रेडी बनाने का माध्यम है. उन्होंने कहा कि भारत के शहर तेजी से इकॉनॉमिक ग्रोथ, इनोवेशन और जॉब क्रिएशन के सेंटर बन रहे हैं.

2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए शहरों की बेहतर प्लानिंग, फाइनेंसिंग और गवर्नेंस बेहद जरूरी है. उन्होंने यह भी बताया कि एएमआरयूटी , स्वच्छ भारत मिशन और स्मार्ट सिटी मिशन जैसी स्कीम्स ने मजबूत बेस तैयार किया है, लेकिन अब अगला चरण शहरों को सेल्फ-सस्टेनेबल और इन्वेस्टमेंट रेडी बनाने का है.

खट्टर ने बताया कि इस फंड में कुल 1 लाख करोड़ रुपये की सेंट्रल असिस्टेंस शामिल है, जिसे मार्केट बेस्ड फाइनेंसिंग के जरिए लगभग चार गुना इन्वेस्टमेंट जुटाने के लिए डिजाइन किया गया है. सेंट्रल असिस्टेंस प्रोजेक्ट कॉस्ट के 25 प्रतिशत तक सीमित रहेगी, जबकि कम से कम 50 प्रतिशत फंड्स म्युनिसिपल बॉन्ड्स, बैंक लोन और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के जरिए जुटाए जाएंगे.

उन्होंने बताया कि कुल राशि में से 90,000 करोड़ रुपये प्रोजेक्ट्स के लिए, 5,000 करोड़ रुपये कैपेसिटी बिल्डिंग के लिए और 5,000 करोड़ रुपये सीआरजीएसएस के तहत लोन गारंटी के लिए निर्धारित किए गए हैं. यह सब-स्कीम छोटे और मिड-लेवल शहरों को मार्केट बेस्ड फाइनेंसिंग हासिल करने में मदद करेगी. यह फंड अर्बन रिडेवलपमेंट, ट्रांसपोर्ट, वॉटर और सैनिटेशन तथा क्लाइमेट-फ्रेंडली प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देगा. उन्होंने राज्यों और अर्बन लोकल बॉडी से अपील की कि इसे केवल एक स्कीम नहीं, बल्कि ग्लोबली कॉम्पिटिटिव शहर बनाने के अवसर के रूप में देखें. यह योजना फाइनेंशियल ईयर 2025-26 से 2030-31 तक लागू की जाएगी, जिसका उद्देश्य देश के शहरों को नए ग्रोथ इंजन में बदलना है.

About the Author

authorimg

Sharad Pandeyविशेष संवाददाता

करीब 20 साल का पत्रकारिता का अनुभव है. नेटवर्क 18 से जुड़ने से पहले कई अखबारों के नेशनल ब्‍यूरो में काम कर चुके हैं. रेलवे, एविएशन, रोड ट्रांसपोर्ट और एग्रीकल्चर जैसी महत्वपूर्ण बीट्स पर रिपोर्टिंग की. कैंब्रिज…और पढ़ें



Source link

- Advertisement -spot_img

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img

Latest article