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बाराबंकी के बडेल गांव के किसान अनुज कुमार हाइब्रिड मक्का की खेती से अच्छी कमाई कर रहे हैं. उन्होंने आधे एकड़ में मक्का लगाकर एक फसल में 70–80 हजार रुपये तक मुनाफा हासिल किया. कम लागत, कम समय में तैयार होने और बाजार में सालभर मांग रहने के कारण हाइब्रिड मक्का किसानों के लिए लाभदायक नकदी फसल बनती जा रही है.
बाराबंकी. मोटे अनाजों में कई ऐसी फसलें हैं जो किसानों के लिए फायदे का सौदा बन रही हैं. इनमें हाइब्रिड मक्का एक उभरती हुई नगदी फसल है, जिसकी ओर आजकल किसान तेजी से रुख कर रहे हैं, क्योंकि पारंपरिक खेती की तुलना में मक्का की खेती से बेहतर आमदनी हासिल की जा सकती है. मक्का की बाजार में सालभर मांग बनी रहती है, लेकिन गर्मियों में इसकी कीमत और भी बेहतर मिलती है, जिससे किसानों को अधिक लाभ होता है. यह फसल कम समय में तैयार हो जाती है. इसकी लागत भी बेहद कम होती है, जिस कारण कई किसान हाइब्रिड मक्का की खेती किसानों की आय बढ़ाने का एक मजबूत विकल्प बनती जा रही है, जिससे उन्हें कम मेहनत में अधिक मुनाफा मिल रहा है. जिले के किसान हाइब्रिड मक्के की खेती कर रहे है, उन्हें लागत के हिसाब से अच्छा मुनाफा मिल रहा है जिसके लिए वह कई सालों से मक्के की खेती कर रहे हैं. जनपद बाराबंकी के बडेल गांव के रहने वाले किसान अनुज कुमार मोटे अनाजों में हाइब्रिड मक्के की खेती की शुरुआत की, जिसमें उन्हें अच्छा फायदा देखने को मिला. आज वह करीब आधे एकड़ में हाइब्रिड मक्के की खेती कर एक फसल पर 70 से 80 हजार रुपए मुनाफा कमा रहे हैं.
एक फसल पर 70 से 80 हजार रुपए तक का मुनाफा
किसान अनुज कुमार ने बताया वैसे तो हम मोटे अनाजों में मक्का की खेती ज्यादा करते हैं, क्योंकि अन्य फसलों के मुकाबले इसमें मुनाफा कई ज्यादा है. इस समय करीब आधे एकड़ में हाइब्रिड मक्के की खेती की है, क्योंकि इस किस्म के मक्के की बाजारों में काफी डिमांड रहती है और आज कल इसकी कीमत भी अच्छी मिलती है. वैसे तो इसकी खेती साल में दो बार की जाती है, एक गर्मी दूसरी बरसात में ज्यादातर हम लोग गर्मी के दिनों में इसकी खेती करते हैं. इसमें हम लागत की बात करें तो एक बीघे में करीब 5 से 6 हजार रुपये आती है. वही मुनाफा करीब एक फसल पर 70 से 80 हजार रुपए तक हो जाता है. हाइब्रिड मक्के क़ी खेती करना बहुत ही आसान है पहले खेत की 2-3 बार गहरी जुताई की जाती हैं, फिर इसमें गोबर वह डाया आदि खादों का छिड़काव कर मक्के के बीज की बुआई की जाती हैं. फिर वही 15 से 20 दिन बाद जब इसका पौधा थोड़ा बड़ा हो जाता है, तब इसकी सिंचाई की जाती है वही महज इसकी बुवाई करने के दो से ढाई महीने बाद फसल निकलना शुरू हो जाती है जो करीब 1 महीने तक चलती है.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें


