Success Story: जमशेदपुर की शोमा और डालियां ने अपने हुनर से पारंपरिक बाटिक प्रिंट को नई पहचान दी है. कभी सीमित दायरे तक सीमित यह कला अब देश-विदेश तक पहुंच चुकी है. दोनों ने शहर में छोटा काम शुरू किया, जो धीरे-धीरे सफल व्यवसाय बन गया. शोमा के अनुसार बाटिक प्रिंट एक पारंपरिक कला है, जिसमें कपड़े पर डिजाइन बनाने के लिए मॉम (वैक्स) और रेज़िन को गर्म कर लगाया जाता है. डिजाइन के बाद कपड़ा डाई में डुबोया जाता है. जहां मोम होती है, वहां रंग नहीं चढ़ता, बाकी हिस्सों में रंग भर जाता है. बाद में मोम हटाकर कपड़े को अंतिम रूप दिया जाता है. पूरा काम हाथ से होने के कारण हर पीस अलग और खास होता है. डालियां बताती हैं कि यह प्रिंट खूबसूरत होने के साथ टिकाऊ भी है और सही देखभाल पर 10 साल तक रंग फीका नहीं पड़ता. बाटिक साड़ी लगभग ₹1000, जबकि ब्लाउज ₹400-₹500 में मिल जाता है. सूट-सलवार, दुपट्टा और शॉल में भी इसकी खूब मांग है. यह कहानी महिला उद्यमिता और पारंपरिक कला की वैश्विक पहचान की मिसाल बन गई है.


